रोेहतक। पीजीआईएमएस के मेडिसन विभाग में तैनात कुछ डॉक्टरों द्वारा दिल के मरीजों को संस्थान की कैथ लैब में भेजने की बजाए निजी कैथ लैबों में भेजने के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। यह जांच संस्थान के डीन अकेडमिक अफेयर डॉ. एसएस लोहचब के नेतृत्व में दो सीनियर डॉक्टर करेंगे। बताया जा रहा है इस मामले में जांच टीम ने कुछ तथ्य भी जुटा लिए हैं। जांच शुरू होने के बाद मेडिसन विभाग के जूनियर व सीनियर डॉक्टरों में हलचल शुरू हो गई है।
संस्थान के आपातकालीन मेडिसन विभाग में दिल के मरीजों को मेडिसन विभाग के डॉक्टर भी जांचते हैं। यहां मरीज को दिल की समस्या मिलने पर दिल का टीका दिया जाता है। आरोप है कि मेडिसन के कुछ डॉक्टर एंजियोग्र्राफी व एंजियोप्लास्टी के लिए मरीज को संस्थान की अपनी कैथ लैब में भेजने की बजाए बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। यह मामला जब संस्थान के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के संज्ञान में आया तो इसकी जांच के निर्देश दिए गए। अब इस मामले की जांच प्रशासन ने डीन अकेडमिक अफेयर एवं सीनियर हार्ट सर्जन डॉ. एसएस लोहचब को दी है और वह जांच टीम का नेतृत्व करेंगे। जांच टीम में बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव नंदा व डॉ. महावीर ग्रेवान को शामिल किया गया है। बताया जा रहा है कि जांच टीम ने मेडिसन विभाग के डॉक्टरों का बयान लेना शुरू कर दिया है। जांच टीम मेडिसन विभाग से कार्डियोलॉजी विभाग में भेजी गई कॉल का रिकार्ड जांच रही है और कार्डियोलॉजी के किस डॉक्टर ने कॉल अटेंड की इसकी जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार इस मामले में सीनियर डॉक्टर तो अपना पल्ला झाड़ रहे हैं और जांच की सुई जूनियर डॉक्टरों पर मोड़ रहे हैं।
यह है मामला
संस्थान में कार्डियोलॉजी विभाग की कैथ लैब संचालित हो रही है। यहां एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी की सुविधा उपलब्ध है। सरकार की ओर से तय मानक पर यहां जरूरत पड़ने पर मरीज के दिल में स्टंट डाले जाते हैं। इसकी अधिकतम कीमत 27 हजार के करीब है। जबकि इसके लिए निजी कैथ लैब में मरीज से अन्य चार्ज जोड़ कर ढाई से साढे़ चार लाख रुपये तक वसूले जाते हैं। ऐसे में मेडिसन विभाग के कुछ डॉक्टरों पर आरोप है कि वह अपने यहां के मरीजों को संस्थान की कैथ लैब में भेजने की बजाए, निजी कैथ लैब में मौखिक रूप से भेजते हैं। इसमें कई डॉक्टरों का कमीशन तय होता है।
जांच के लिए टीम बनाई
दिल के मरीजों को एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी के लिए संस्थान की कैथ लैब में न भेजना गंभीर मामला है। प्रशासन के संज्ञान में जैसे ही यह मामला आया, तीन सीनियर डॉक्टरों की टीम को जांच के लिए तैनात कर दिया है। इस मामले की जांच डॉ. एसएस लोहचब, डॉ. महाबीर ग्रेवान व डॉ. संजीव नंदा तीनों सीनियर डॉक्टर कर रहे हैं। जल्द ही यह जांच पूरी हो जाएगी।
- डॉ. एचके अग्रवाल, रजिस्ट्रार, पीजीआईएमएस