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Rohtak News: अंधेरा हमारा दोस्त था पाकिस्तान का दुश्मन...2 रात चढ़ाई कर हासिल की थी फतह

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कारगिल युद्ध के दौरान मिला लक्ष्य हासिल करने के लिए ह​थियार के साथ तैनात हवलदार सतबीर। स्रोत :  - फोटो : कारगिल युद्ध के दौरान मिला लक्ष्य हासिल करने के लिए ह​थियार के साथ तैनात हवलदार सतबीर। स्रोत : परिजन
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विकास सैनी
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रोहतक। 17 जाट बटालियन में हवलदार रहे मूलरूप में हुमायूंपुर व हाल सेक्टर-35 सनसिटी निवासी सतबीर धनखड़ आज भी कारगिल युद्ध की बात करते हुए जोश से भर जाते हैं। वे कहते हैं कारगिल युद्ध केवल संसाधनों से नहीं बल्कि वीर जवानों के जोश और अदम्य साहस के बल से जीता गया था। दुश्मन चोटी के ऊपर था और हम नीचे। दुश्मन को मारने के लिए हमने ऊंची पहाड़ी पर चढ़ाई की। दिन में हम पत्थरों के पीछे छिपकर समय बिताते थे और रात में चढ़ाई करते थे। दो रात चढ़ाई कर हमने लक्ष्य पॉइंट 4875 हासिल किया था। इस दौरान हमारे पांच जवान बलिदान हो गए थे।
सेवानिवृत्त सतबीर धनखड़ बताते हैं 22 मई 1999 को उनकी बटालियन श्रीनगर के खेरु गांव में तैनात थी। उन्हें तुरंत मश्कोह सेक्टर जाने का संदेश मिला। उनकी बटालियन तुरंत रवाना हो गई। अगले दिन मतियान पहुंचते ही दुश्मन के हमले के कारण सेना का आगे बढ़ना मुश्किल हो गया।
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अंधेरा उनका दोस्त था और पाकिस्तान का दुश्मन। रात के अंधेरे में वे गाड़ियों की हेडलाइट बंद कर आगे बढ़े।पहला लक्ष्य पॉइंट 4540 फिर दूसरा लक्ष्य रॉकी नोब एवं तीसरा अहम लक्ष्य पॉइंट 4875 हासिल किया। हमें घुसपैठ की सूचना थी। बाद में पाक सेना की मौजूदगी की पुष्टि हुई। इसके बाद अधिकारियों ने रणनीति बदली।पहला लक्ष्य हासिल करने में हमें 5 जवान गंवाने पड़े।
सीओ कर्नल ने किया प्रेरित
सतबीर बताते हैं उनके पास दुश्मन की सही जानकारी नहीं थी। इस वजह से उन्हें यह नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद हर कदम सावधानी के साथ उठाया। लक्ष्य मुश्किल था। जवानों का हौसला भी कम हो रहा था। ऐसे में बटालियन के सीओ कर्नल बावा ने देश के लिए कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरित किया। जवान रात के अंधेरे में माइनस तापमान में भूख प्यास की परवाह छोड़कर आगे बढ़े।
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द्वितीय विश्व युद्ध लड़ चुके पिता की चिट्ठी ने दिया हौसला

सतबीर बताते हैं बचपन में द्वितीय विश्व युद्ध लड़ चुके सेवानिवृत्त पिता सूरजभान से अक्सर बहादुरी के किस्से सुना करते थे। वह युद्ध के हालात बताते थे। कारगिल युद्ध में यह सच्चाई करीब से जानी। युद्ध के माहौल में पिता की चिट्ठी ने हौसला दिया। पिता ने लिखा था, तुम एक सिपाही के बेटे हो। हमारी चिंता मत करना। अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाना। उनकी हौसला अफजाई से वे भूख-प्यास की परवाह किए बगैर आगे बढ़ते गए और परचम फहराया। सतबीर बताते हैं उनका बेटा प्रवीण भी सेना में नायक है। हाल ही में वह द्रास सेक्टर से नासिक गया है। सेना में उनके परिवार की यह तीसरी पीढ़ी है।
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