दलित शब्द से मुझे व्यक्तिगत रूप से बेहद घृणा है। दलित शब्द को शब्दकोश्ा
से निकाल देना चाहिए। कोई भी व्यक्ति खुद को हीन नहीं समझे। आजादी के बाद
से सभी व्यक्तियों को समान अधिकार प्राप्त हैं।
डॉ. अंबेडकर के दिखाए
शिक्षा के मार्ग पर चलें, कठिन परिश्रम करें। समाज को तरक्की प्रदान करें।
यह विचार प्रदेश के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने रविवार को महम में डॉ.
अंबेडकर के महा परिनिर्वाण दिवस पर हुए कार्यक्रम में व्यक्त किए।
उन्होंने
कहा कि डॉ. अंबेडकर ने तमाम सामाजिक बाधाओं का सामना करते हुए खुद को
विश्व पटल पर खड़ा किया। अन्याय का विरोध करना, खुद को किसी भी स्तर पर
कमजोर नहीं समझना और हकों के लिए लड़ना ही डॉ. अंबेडकर को सच्ची
श्रद्धांजलि है।
प्रो. सोलंकी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर की दूरगामी सोच की
बदौलत ही प्रत्येक व्यक्ति को देश में समानता एवं स्वतंत्रता प्राप्त है।
देश में सभी धर्मों और जातियों के लोग आपसी सद्भाव एवं सहिष्णुता के साथ
रहते हैं। देश में कई विदेशी आक्रमणकारी आए और देश की मिट्टी में रच-बस गए।
भारत मां ने सबको अपने आंचल में बसा लिया और सब एक साथ रहे।
डॉ. अंबेडकर का योगदान अनुकरणीय
विधायक
मनीष ग्रोवर ने कहा कि देश की उन्नति में डॉ. अंबेडकर का योगदान अनुकरणीय
है। सामाजिक भेदभाव के बावजूद डॉ. अंबेडकर ने जो मुकाम हासिल किया है उसकी
कोई बराबरी नहीं कर सकता। प्रत्येक व्यक्ति को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी
चाहिए।
संगठन ने किया राज्यपाल को सम्मानित
इस मौके पर डॉ.
अंबेडकर हितकारी संगठन की तरफ से राज्यपाल सोलंकी को शाल और स्मृति चिह्न
देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी अनिल बिंटू ने
की।
इस दौरान भाजपा के प्रदेश महामंत्री सुरेश भट्ट, इंदौर भाजयुमो के
जिलाध्यक्ष सर्वेश तिवारी, प्रो. दलवीर सिंह, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा
के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इरफान, सुरेश तिवारी, राजकुमार चाहलिया, पूर्व
मंत्री जय नारायण खुंडिया, रमेश भाटिया, भाजपा नेता मनीष शर्मा, डीसी डीके
बेहेरा और एसपी शशांक आनंद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।