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पांच लाख रुपये न देने पर सुबह से शाम तक ऑफिस में बैठाए रखता था नितिन गर्ग

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वर्ष 2016 में सिरसा में आयकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर नितिन गर्ग को सजा दिलाने के लिए सिरसा के व्यवसायी एवं बीड़ी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पुरुषोत्तम कुमार गोयल ने लंबी लड़ाई लड़ी। पुरुषोत्तम गोयल को इन पांच सालों में दोषी द्वारा कई प्रकार से प्रताड़ित किया गया और कई जगहों पर झूठी शिकायतें भी की। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी इस मुहिम में न तो किसी व्यापारी संगठन ने मदद की और न किसी सामाजिक संगठन ने।
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सोमवार को अदालत का फैसला आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पुरुषोत्तम गोयल ने बताया कि नितिन गर्ग ने उनको वर्ष 2013-14 की असेसमेंट के लिए नोटिस दिया। अपना पक्ष रखने के लिए वे सुबह से शाम तक उसके कार्यालय में बैठे रहते, लेकिन उसने सुनवाई नहीं की। शुरूआत में पांच लाख रुपये रिश्वत मांगी। हम सच्चे थे, इसलिए हमने मना कर दिया। फिर वह दो लाख रुपये पर आ गया। परंतु मैनें सोचा कि जब हमने कोई जुर्म ही नहीं किया तो हम इसे दो लाख रुपये किस बात के दें। हमने इसकी शिकायत सीबीआई की चंडीगढ़ शाखा को की की। निर्धारित समय पर वे बठिंडा स्थित इसकी ग्लोबल लैब पर पहुंच गए और दो लाख रुपये की रिश्वत दी।
सीबीआई ने इसे बठिंडा स्थित ग्लोबल लैब से दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए 7 फरवरी 2016 को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई टीम ने उसी दौरान नितिन गर्ग के बठिंडा स्थित आवास पर दबिश दी थी। गर्ग के घर व दफ्तर से 15.60 लाख रुपये की नकदी, एक किलो 620 ग्राम सोना, 60 लाख की कीमत के हीरे, पांच लाख रुपये की चांदी, परिवार के विभिन्न सदस्यों के नाम पर 26 बैंक अकाउंट, दो बैंक लॉकर के दस्तावेज बरामद किए गए थे। सिरसा में भी उसकी लैब पर सीबीआई ने छापेमारी की थी। पुरुषोत्तम गोयल ने नितिन गर्ग के खिलाफ प्रधानमंत्री व वित्त मंत्रालय को भी शिकायत की थी । इसी आधार पर नितिन गर्ग पर आय से अधिक संपत्ति का मामला भी चला। 2020 में सीबीआई की एक टीम ने उसके बठिंडा स्थित आवास पर दोबारा दबिश दी थी। इस दौरान सीबीआई अपने साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज ले गई थी। रेड के बाद वित्त मंत्रालय ने नितिन गर्ग को पद से रिटायर्ड कर दिया था। अभी उसके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी चल रहा है।
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फैसले से मिलेगा भ्रष्टाचारियों को सबक
शिकायतकर्ता पुरुषोत्तम गोयल ने कहा कि नितिन गर्ग ने पद में रहते हुए उन्हें काफी परेशान किया। इतना ही नहीं पिछले पांच वर्षों के दौरान भी उन पर झूठे केस व दबाव बनाने की कोशिश की गई कि मैं अपनी शिकायत वापिस ले लूं। लेकिन मैं नितिन गर्ग के दबाव में न आकर नितिन गर्ग को सजा दिलवाने पर अड़ा रहा। उन्होंने कहाकि बड़े अधिकारी के खिलाफ लड़ाई लड़ना आसान नहीं था, आम आदमी के बस की बात नहीं थी। अदालत से आए फैसले से वे खुश हैं और भ्रष्टाचारी नितिन गर्ग को मिली सजा एवं जेल जाने से बाकी भ्रष्टाचारियों को भी सबक मिलेगा।
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