रोहतक। दीपावली से पहले शहर में सफाई को लेकर संकट खड़ा हो गया है। सोमवार को सफाई का 49 करोड़ का टेंडर फाइनल होना था, जिसके ऊपर अदालत ने रोक लगा दी है। क्योंकि पिछली एजेंसी ने अदालत में याचिका दायर कर निगम द्वारा उसका टेंडर रद्द करने के फैसले को चुनौती दी थी। अब अदालत ने निगम प्रशासन से 6 अक्तूबर तक जवाब मांगा है।
नगर निगम की ओर से शहर की गलियों की सफाई का कार्य निजी एजेंसी से कराने का निर्णय लिया था। इसके लिए जून माह में निगम की तरफ से 22 में से 16 वार्ड की गलियों का कार्य ठेके पर दे दिया। इसके लिए दो जोन बनाई गई। पहली जोन में शामिल वार्ड नंबर 1,3, 4, 6,7,8 व 17 में गलियों की सफाई का ठेका 24 करोड़ 26 लाख रुपये में और 12, 13, 14, 15, 16, 18, 19, 20 व 21 का ठेका 24 करोड़ व 75 लाख रुपये में दिया था। अगस्त माह में मुख्यालय की तरफ से निगम आयुक्त को पत्र भेजकर लिखा कि नियमों के तहत टेंडर 21 दिन बाद खोला जाना था, लेकिन निगम ने 12 दिन में ही टेंडर जारी कर दिया। इसके चलते टेंडर रद्द कर दिया था। साथ ही निगम ने दोबारा टेंडर जारी किया, जिसे 25 सितंबर को खोना जाना था, लेकिन अदालत ने उसके ऊपर रोक लगा दी है।
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इधर, निगम के सफाई कर्मियों की मांगों को लेकर भूख हड़ताल शुरू
वहीं, नगर पालिका कर्मचारी संघ के आह्वान पर सोमवार को नगर निगम के सफाई कर्मियों ने कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल शुरू कर दी है। पहले दिन 21 कर्मचारी क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे। अगले चार दिन और लगातार हड़ताल जारी रहेगी। माकपा का एक प्रतिनिधि मंडल डॉक्टर जगमति सांगवान के नेतृत्व में निगम कार्यालय के बाहर पहुंचा और अपना समर्थन व्यक्त किया।
निगम की ओर से सोमवार को गलियों की सफाई के लिए लगाया 49 करोड़ का टेंडर खोला जाना था, लेकिन पिछली एजेंसी अदालत में चली गई। अदालत ने टेंडर खोलने पर रोक लगा दी है। साथ ही छह अक्तूबर तक जवाब मांगा है।
संजीव कुमार, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम