पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे राजद्रोह के आरोपी प्रोफेसर विरेंद्र सिंह को कोर्ट ने एक और झटका दिया है। पुलिस पूछताछ के दौरान उनके साथ कोई वकील नहीं रहेगा। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रोफेसर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि पुलिस पूछताछ के दौरान उन्हें वकील मुहैया करवाया जाए। सूत्रों की मानें तो पुलिस प्रोफेसर का नार्को टेस्ट करवा सकती है।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट में मुंबई हमलों के दोषी आंतकी कसाब का जिक्र भी आया। बता दें कि राजद्रोह का केस दर्ज होने और गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद कोर्ट ने प्रोफेसर की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। शिकंजा कसता देख प्रोफेसर ने बृहस्पतिवार को एसपी के सामने सरेंडर कर दिया था। शनिवार को दो दिन का रिमांड पूरा होने के बाद प्रोफेसर को कोर्ट में पेश किया जाएगा। आरोपी की रिमांड अवधि और बढ़ सकती है। पुलिस ने प्रोफेसर के लिए करीब 50 सवालों की फेहरिस्त तैयार की है। रिमांड में एक-एक सवाल का जवाब तलाशा जा रहा है।
पुलिस ने रिमांड में विरेंद्र की फोन डायरी बरामद की है। इसी डायरी को बरामद करने के लिए पुलिस ने रिमांड मांगा था। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने विरेंद्र सिंह की आवाज का नमूना भी लिया है। इसे विवादित ऑडियो टेप से मैच किया जाएगा। हालांकि मामला उजागर होने के समय प्रोफेसर ने माना था कि ऑडियो में उन्हीं की आवाज है, लेकिन इसे अधूरा ही सुनाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि प्रोफेसर की फोन डायरी में अंकित सभी मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया जाएगा ताकि मामले की सच्चाई तक पहुंचा जा सके। पुलिस की ओर से कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल भी निकलवाई जाएगी। शनिवार को आरोपी से निशानदेही करवाई जाएगी।
अभी विरेंद्र सिंह से पूछताछ चल रही है। उन्हें सिविल लाइन थाने में रखा गया है। पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा।
- पवन कुमार शर्मा, डीएसपी।
कोर्ट ने अब्दुल कसाब का जिक्र करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। अब विरेंद्र को शनिवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
आरसी दलाल, आरोपी के वकील।
ये है मामला
आरोप है कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रोफेसर वीरेंद्र ने जाट आरक्षण आंदोलन को भड़काया। उनका एक विवादित ऑडियो टेप सामने आया था, जिसमें वे आंदोलन को दूसरी जगह भी शुरू करने की बात कह रहे हैं। इस टेप के आधार पर भिवानी के रिटायर्ड कैप्टन पवन कुमार ने प्रोफेसर विरेंद्र सिंह और दलाल खाप के प्रवक्ता कैप्टन मानसिंह के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया था।
यह है नार्को टेस्ट का नियम
नार्को टेस्ट के लिए पुलिस को अदालत में अर्जी देनी होती है। जिसके बाद एक नोटिस देकर दूसरे पक्ष से जवाब मांगा जाता है। उनके जवाब के आधार पर कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों में बहस होती है। जिसके बाद अदालत नार्को टेस्ट की अनुमति देती है। टेस्ट में परखा जाता है कि आरोपी सवालों के सही जवाब दे रहा है या झूठ बोल रहा है।