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स्पलैश वाटर पार्क के स्वीमिंग पूल में डूबने से बच्ची की मौत 

Sun, 14 Aug 2016 02:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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स्पलैश वाटर पार्क के स्वीमिंग पूल में डूबने से बच्ची की मौत - फोटो : अमर उजाला
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स्पलैश वाटर पार्क और भिवानी के एक स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण टूर पर आई एक मासूम बच्ची की मौत हो गई। बच्ची अपने स्कूल के बच्चों के साथ भिवानी से रोहतक के स्पलैश वाटर पार्क में टूर पर आई थी। बताया जा रहा है कि वाटर पार्क के पूल में बच्ची बेसुध अवस्था में पड़ी रही, लेकिन किसी ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। मासूम की पानी में तड़प तड़पकर मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद वाटर पार्क और स्कूल प्रबंधनों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में बच्ची को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, मगर तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने मामले में स्पलैश वाटर पार्क के मैनेजर विजय शुक्ला और भिवानी के स्कूल के प्रधानाचार्य सुरेंद्र को हिरासत में लिया है। 
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 भिवानी के महम रोड स्थित सेक्टर 13 के मोड़  पर हैलो किड्स नाम से स्कूल है। स्कूल प्रबंधन शनिवार शाम करीब 50 बच्चों का टूर लेकर रोहतक के स्पलैश वाटर पार्क में आया था। इन बच्चों में उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले की तहसील गुढ़नपुर के गांव बोडंरा लच्छी निवासी सूरज की छह साल की बेटी अनुष्का भी शामिल थी। सूरज कई साल से भिवानी के महम रोड पर रहते हैं। वाटर पार्क में अलग-अलग उम्र के बच्चों और लोगों के स्वीमिंग पूल बने हैं। शाम करीब साढ़े पांच बजे अनुष्का (6) पुत्री सूरज अन्य बच्चों के साथ स्वीमिंग पूल में नहा रही थी।

कुछ देर बाद पूल में बच्चों की ज्यादा भीड़ हो गई। इसी बीच अनुष्का अचानक पानी में डूब गई। लेकिन उसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। अचानक एक बच्चे ने अनुष्का को बेसुध अवस्था में पानी के अंदर पड़ा देख लिया तो शोर मचा दिया। इसके बाद पार्क प्रबंधन सक्रिय हुआ। जल्दी में बच्ची को पूल से बाहर निकाला गया। आनन-फानन में स्कू ल और पार्क प्रबंधन बच्ची को लेकर पुलिस लाइन स्थित एक निजी अस्पताल में लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। मामले की सूचना मिलते ही शहर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुनीता टीम सहित मौके पर पहुंची। खबर लिखे जाने तक वह परिजनों और पार्क प्रबंधन से पूछताछ कर रही थीं। 
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बच्ची की मौत से पार्क में मची अफरातफरी
पूल में बच्ची के बेसुध अवस्था में मिलने के बाद पार्क में अफरातफरी मच गई। बच्ची को पूल से बाहर निकालने के बाद सभी बच्चों को पूल से बाहर निकाल दिया गया। इसी बीच अन्य पूल में नहा रहे बच्चे और युवा इकट्ठा हो गये। इसके बाद जितने भी बच्चे टूर पर आये थे सभी की तलाश शुरू हो गई। कुछ ही देर में पार्क के अंदर सन्नाटा छा गया।  

हादसे के बाद पार्क पर जड़ा ताला 
हादसे में स्पलैश वाटर पार्क प्रबंधन की लापरवाही सामने आने के बाद वाटर पार्क के कर्मचारियों ने अंदर से ताला लगा दिया। हादसे की सूचना मिलने पर जब शहर थाना प्रभारी सुनीता और सुखपुरा चौकी इंचार्ज टीम सहित वाटर पार्क पहुंचे तो उसका मुख्य गेट बंद था। कर्मचारियों ने गेट को अंदर से बंद कर रखा था। पुलिस ने गेट खुलवाया और कर्मचारियों से पूछताछ की। पुलिस करीब एक घंटे तक पार्क के आसपास जांच करती रही लेकिन मामले से जुड़ा कोई अहम सुराग हाथ नहीं लगा। जैसे ही पुलिस वाटर पार्क से निजी अस्पताल के लिए रवाना हुई तो पार्क के कर्मचारियों ने फिर से गेट को अंदर से बंद कर लिया। 

पत्नी ने किया था इनकार, फिर भी कराया दाखिला 
घटना की सूचना मिलने के बाद बच्ची के परिजन देर रात रोहतक पहुंचे। बच्ची के पिता सूरज ने बताया कि उनकी पत्नी ने अनुष्का का दाखिला इस स्कूल में कराने से मना किया था, लेकिन मैंने उसकी एक नहीं सुनी। यदि अपनी पत्नी की बात सुन लेता तो आज हमारी बच्ची जिंदा होती। उन्होंने पहले भी स्कूल प्रशासन पर इस तरह की लापरवाही करने का आरोप लगाया। पीओपी कारीगर सूरज ने बताया कि पिछले कई दिनों से स्कूल प्रबंधन ने टूर का कार्यक्रम तैयार किया था। 

सीसीटीवी फु टेज से खुलेगा मौत का राज 
बच्ची के परिजनों ने स्पलैश वाटर पार्क और स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाये हैं। लेकिन केस की गुत्थी तभी सुलझेगी जब पार्क में लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जाएगा। बताया जा रहा है कि पार्क में प्रत्येक पूल के पास सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। पुलिस ने घटना की सच्चाई जानने के लिए पार्क से सीसीटीवी फु टेज ली है। फु टेज में घटना के समय बच्ची की लोकेशन को खंगाला जा रहा है, ताकि पता चल सके कि किसकी लापरवाही से बच्ची की मौत हुई है।  

सुलगते सवाल 
अनुष्का की मौत के बाद ही स्पलैश वाटर पार्क प्रबंधन पर सवाल उठने शुरू हो गये हैं। परिजनों ने सभी को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।  
- हादसे के समय पूल के पास सिक्योरिटी के उद्देश्य से कोई तैराक तैनात था या नहीं। 
- यदि पूल के पास तैराक तैनात था तो बच्ची की जान क्यों नहीं बचाई जा सकी। 
- जब बच्ची डूब रही थी तो उस पर किसी की नजर क्यों नहीं गई। जबकि परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगने का दावा किया जा रहा है। 
- क्या पूल में बच्चों की क्षमता के हिसाब से ज्यादा पानी भरा गया था। 
- क्या स्कूल प्रबंधन के सदस्य भी अपने बच्चों पर ध्यान नहीं रख रहे थे। 
 
अनुष्का का पहला टूर बना काल 
अपने माता-पिता की लाडली अनुष्का पहली बार शहर से बाहर किसी टूर पर आई थी। उसे क्या पता था कि उसका यह पहला टूर ही जिंदगी का आखिरी टूर बन जाएगा। बच्ची की मौत की खबर सुनने के बाद उसके पिता सूरज और परिवार के अन्य सदस्यों में कोहराम मच गया। देर रात बच्ची के परिजन बिलखते हुए निजी अस्पताल पहुंचे। अनुष्का के दुनिया से चले जाने के बाद अब परिवार के लोग खुद को भी कोस रहे हैं कि उन्होंने उसे टूर पर भेजा ही क्यों। 

कक्षा एक से चार तक बच्चे थे टूर में शामिल 
जो बच्चे स्कूल प्रबंधन की तरफ से स्पलैश वाटर पार्क में आये थे उनमें कक्षा एक से लेकर कक्षा चार तक के बच्चे शामिल थे। इसके अलावा स्कूल के प्रधानाचार्य सहित स्कूल स्टाफ के अन्य सदस्य मौजूद थे। घटना के बाद परिजनों ने जितनी लापरवाही पार्क प्रबंधन की बताई है, उतनी ही आरोप स्कू ल प्रबंधन पर लगाये हैं। यही वजह है कि पुलिस ने स्कूल प्रिंसिपल को भी हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। 
 
ये होते हैं स्वीमिंग पूल बनाने के नियम 
- आयु वर्ग के हिसाब से पूल की गहराई होनी चाहिए। 
- प्रत्येक पूल के पास सिक्योरिटी के हिसाब से तैराक तैनात किये जाने चाहिए। 
- पूल का पानी साफ सुधरा होना चाहिए। किसी के डूबने या अन्य जरूरत पड़ने पर आसानी से पता चल सके। 
- बच्चों के पूल में तैराक कभी-कभी बच्चों के साथ पूल के अंदर ही होते हैं। 
- क्षमता के हिसाब से पूल के अंदर बच्चों को भेजना चाहिए, ताकि पूल के अंदर ज्यादा भीड़ न हो। 

थाना इंचार्ज तक को नहीं दी हादसे की सूचना 
मामले में स्पलैश वाटर पार्क और स्कूल प्रबंधन की लापरवाही तो सामने आ ही रही है, पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि हादसे के तुरंत बाद सुखपुरा चौकी पुलिस को सूचना मिल गई थी। पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। लेकिन देर शाम तक शहर थाना प्रभारी को हादसे की सूचना नहीं दी गई। जब मीडिया ने उनके पास कॉल क रनी शुरू की तो उन्हें हादसे के बारे में जानकारी मिली। 

मैं अभी दिल्ली से बाहर हूं। हादसे के बारे में पता चला था। पूल की सीसीटीवी फु टेज देखने के बाद ही असली सच्चाई सामने आएगी। वैसे आमतौर पर प्रत्येक पूल के पास सिक्योरिटी के हिसाब से 3 से 4 लोग तैनात होते हैं।
- सतीश देशवाल, मालिक स्पलैश वाटर पार्क 

टूर में स्कूल के करीब 50 बच्चे शामिल थे। इन बच्चों में कक्षा चार तक के बच्चे शामिल थे। अचानक हुए हादसे के बारे में बाद में पता चला। 
- सुरेंद्र कुमार स्कूल के प्रिंसिपल 

मामले में स्पलैश वाटर पार्क प्रबंधन की लापरवाही की जांच की जा रही है। परिजनों के बयान के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही वाटर पार्क की सीसीटीवी फु टेज को खंगाला जा रहा है। 
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- इंस्पेक्टर सुनीता, एसएचओ सिटी थाना
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