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अपने थाने और चौकियां नहीं बचा सकी पुलिस, लोगों की सुरक्षा क्या करती

Wed, 01 Jun 2016 01:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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हरियाणा ​हिंसा पर प्रकाश सिंह कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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 प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में उन डीएसपी, एसएचओ और चौकी इंचार्ज पर तल्ख टिप्पणी की गई है, जिनके यहां ज्यादा बवाल हुआ है या जिनके थाने और चौकियां उपद्रवियों के निशाने पर आ गए। ऐसे लोगों के लिए रिपोर्ट में कहा गया है कि अपने थाने और चौकियां नहीं बचा सकी पुलिस तो आम लोगों की सुरक्षा क्या करती?
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पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने अपनी रिपोर्ट में ऐसे पुलिस अफसरों पर तल्ख टिप्पणी की, जिनके बारे में लोगों ने बताया कि उनके पास सुरक्षा के लिए फोन करते रहे और उन्होंने फोन नहीं उठाया। किसी ने फोन उठाया तो उसने सही से बात नहीं की और अपनी सुरक्षा खुद करने की बात कही। प्रकाश सिंह ने ऐसे ही पुलिस अफसरों व चौकी इंचार्ज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। अर्बन एस्टेट के एसएचओ रहे बालकृष्ण व डीएसपी अमित भाटिया को दंगा रोकने व सुरक्षा करने में नाकाम बताया गया। महम एसएचओ रहे रामनिवास के बारे में कहा गया कि जब दंगाइयों ने हथियार लूटकर आग लगाई तो उनके खिलाफ फोर्स का इस्तेमाल नहीं किया गया। वहां के डीएसपी सुरेंद्र सिंह पर भी सवाल उठाया गया है। फायर ऑफिसर सज्जन कुमार के लिए कहा गया है कि उन्होंने फोन कॉल पर ध्यान नहीं दिया और आग बुझाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। हालात यह थे कि शिक्षा भारती स्कूल की लाइब्रेरी में तीन दिन तक आग जलती रही और वहां कोई गया तक नहीं। इंद्रा कालोनी के चौकी इंचार्ज जयभगवान, गौकर्ण के कप्तान सिंह, आर्यनगर के नरेश कुमार, सलारा मोहल्ला के नरेंद्र, कंसाला के रमेश चंद, खरावड़ के अजित सिंह को सुरक्षा व्यवस्था में फेल बताया गया है।

300 लोगों के बयान, सभी बोले अधिकारियों के खिलाफ

प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में लोगों के नाम व बयान भी सार्वजनिक किए गए हैं, जिनसे वह कैनाल रेस्ट हाउस में मिले थे और उनके मौखिक बयान लिए थे। ऐसे 300 लोग थे, जिनमें व्यापारी, वकील, उद्यमी, समाजसेवी, नेता शामिल थे। सभी ने अधिकारियों के खिलाफ बयान दिए और अधिकारियों के बारे में कहा कि उन्होंने दंगा रोकने को कोई कदम नहीं उठाया। इसके अलावा बयानों में लोगों ने आरोप लगाया है कि एमडीयू के छात्र आंदोलन में शामिल हुए और बाद में दंगे पर उतारू हो गये। कमेटी के सामने कुछ राजनीतिक लोगों ने अपने बयान दर्ज कराए, जिनमें भाजपाई ज्यादा रहे और सभी ने दंगे के लिए कांग्रेस नेताओं को जिम्मेदार बताया।
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इतनी लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी हुई

दंगे के दौरान 957 दुकान, 153 वाहन, 4 मंदिर एवं धर्मशाला, 24 शिक्षण संस्थान, 12 कार्यालय, 1 रेस्टोरेंट, 2 फार्म हाउस, 29 मकान, 40 शिप गोट्स, 3 ट्रांसफार्मर एवं जनरेटर, 1 गोदाम, 43 होटल एवं मैरिज होम, 10 पेट्रोल पंप, 7 अस्पताल, 6 मॉल्स, 2 एटीएम को नुकसान पहुंचाया गया। प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 30 अप्रैल तक 1210 केस दर्ज हुए और 131 की गिरफ्तारी की गई है।
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