सरकार भले ही गौ संरक्षण, गौ संवर्धन का नारा देकर लोगों को जागरूक करती हो, लेकिन सरकार की गौशालाओं में गौवंश की बेकद्री की जा रही है। पहरावर स्थित नगर निगम की गौशाला पर हर माह चारे समेत कर्मचारियों के वेतन पर 14 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, इसके बावजूद यहां पिछले दो माह में 135 गौवंश की मौत हो चुकी है। इस सब के पीछे गौशाला के कर्मचारियों की लापरवाही सामने आ रही है। इसका खुलासा सोमवार को नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर के गौशाला का निरीक्षण करने पर हुआ। उन्होंने गौशाला की जिम्मेदारी संभाल रहे सभी अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही है।
सरकार के गौ संरक्षण, गौ संवर्धन अभियान को सफल बनाने के लिए नगर निगम की ओर से पहरावर में छह माह पहले गौशाला बनाई गई। इसमें 900 गौवंश रखे गये और उसे चारों ओर से टिन से कवर किया गया। उसी समय गौशाला में टिन शेड लगाने का काम शुरू किया गया था, लेकिन अभी तक केवल एक शेड बन सका है। गौशाला में निगम की ओर से 18 कर्मचारी तैनात हैं, जिनको डीसी रेट से वेतन दिया जाता है। पशुओं की सेहत की जांच के लिए दो डाक्टर भी तैनात हैं। चारे के लिए हर माह 9 लाख रुपये दिए जाते हैं। कर्मचारियों के वेतन, पानी के लिए अलग से खर्च दिया जाता है। इसके बावजूद गौशाला में गौवंश को बिना कटा चारा खिलाया जाता है, वह भी गंदगी में उनके बीच ही फेंक दिया जाता है। जहां चारा डाला जाता है
वहीं पर गौवंश का गोबर भी पड़ा रहता है। भीषण गर्मी में जहां हर किसी की हालत खराब है, वहीं गौवंश खुले में रहते हैं। जमीन पर तपती रेत की वजह से वह पूरा दिन बैठ भी नहीं पाते हैं। गौशाला में चारों ओर कवर करने के लिए लगाई गई टिन के नीचे से कुत्ते आ जाते हैं और गौवंश पर हमला करते हैं। इस कारण कुत्ते खूंखार हो चुके हैं और वह आये दिन गौवंश को काटते रहते हैं। इन कारणों से हालात यह हैं कि दो महीने में 135 गौवंश की मौत हो चुकी है। बताते हैं कि यहां हर रोज 3-5 गौवंश मर जाते हैं। इसके बाद वह कई-कई दिनों तक वहीं सड़ते रहते हैं। इस तरह गौशाला में गौवंश मौत के मुंह में जा रहे हैं। जबकि वह उनकी सुरक्षा के लिए बनाई गई है। गौशाला की हालत पर भाजपा पार्षद अशोक खुराना और पार्षद पति सूरजमल किलोई ने चिंता जताई है। वह मामले की शिकायत कृषि एवं पशुपाल मंत्री ओपी धनखड़ से करेंगे।
ज्वाइंट कमिश्नर बोले, सभी लापरवाहों पर कार्रवाई होगी
नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर अजय चोपड़ा ने कार्यभार ग्रहण करते ही सबसे पहले गौशाला के हालात जानने के लिए वहां का निरीक्षण किया। उनके निरीक्षण करने पर ही पूरी सच्चाई सामने आयी। जबकि उससे पहले किसी अधिकारी ने वहां जाकर देखा भी नहीं। अपने कार्यालय में बैठकर ही हर महीने 14 लाख रुपये गौशाला के नाम पर बहाते रहे। ज्वाइंट कमिश्नर अजय चोपड़ा ने गौशाला के हालात देखकर नाराजगी जताई और एमई से लेकर अन्य सभी जिम्मेदारों को तलब करते हुए कार्रवाई करने के लिए कहा है। वहीं, उन्होंने कहा कि दो महीने में शेड बनवा दिए जाएंगे और हालात को सुधार दिया जाएगा।
नगर निगम की ओर से पहरावर गौशाला पर लगभग 14 लाख रुपये खर्च किया जाता है। उसके बावजूद गौशाला में हालात काफी खराब हैं और गौवंश बचने की जगह मर रहे हैं। गौशाला को इतने दिन हो गये हैं, लेकिन उसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है। मामले में मंत्री ओपी धनखड़ से मिलकर शिकायत करेंगे।
-अशोक खुराना, पार्षद नगर निगम
गौशाला में दो महीने के अंदर 135 गौवंश मर चुके हैं। वह गौशाला में सड़ते रहते हैं और उनसे बीमारी फैलने के कारण अन्य गौवंश भी बीमार हो जाते हैं। कर्मचारी यहां से गायब रहते हैं। इस तरह हालात काफी खराब हैं।
- सूरजमल किलोई, पूर्व पार्षद