स्वामी रामदेव पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में देशद्रोह का केस दर्ज कराने के लिए दाखिल की गई याचिका पर सोमवार को एसीजेएम हरीश गोयल की अदालत में सुनवाई हुई। थोड़ी देर की कार्यवाही के बाद अदालत ने सुनवाई के लिए अगली तारीख एक जुलाई तय कर दी है।
अदालत में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सुभाष बतरा के वकील ओपी चुग ने सबसे पहले बहस शुरू की। चुग ने कोर्ट में कहा कि 6 अप्रैल-2016 को कोर्ट ने कार्रवाई की रिपोर्ट एसपी को पेश करने के आदेश दिये थे, लेकिन एसपी ने अपनी जगह डीएसपी को रिपोर्ट लेकर भेज दिया। इस कारण एसपी और डीएसपी को कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने रामदेव को समन जारी करने की मांग की। इसके बाद न्यायाधीश ने सुनवाई के लिए एक जुलाई की तारीख तय कर दी। दरअसल, 15 से 30 मई तक कोर्ट में गर्मियों की छुट्टियां हैं। इस कारण मामले में पूरी सुनवाई नहीं हो सकी। इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने अगली तारीख तय कर दी।
रिपोर्ट में सुबूत का जिक्र नहीं
अदालत में पेश पुलिस की रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो उसमें कहीं भी स्वामी रामदेव के खिलाफ किसी सुबूत का जिक्र नहीं किया गया है। एसपी ने रिपोर्ट में कहीं पर भी नहीं लिखा है कि बाबा रामदेव के खिलाफ सुबूत मिले हैं या नहीं।
हैदराबाद की एफआईआर का जिक्र
कोर्ट में पेश एसपी की जांच रिपोर्ट में हैदराबाद में स्वामी रामदेव के खिलाफ देशद्रोह की एफआईआर का जिक्र किया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में एसपी ने स्पष्ट नहीं किया है कि हैदराबाद की एफआईआर का जिक्र क्यों किया गया है। रिपोर्ट में लिखा है कि जांच के दौरान सामने आया है कि विवादित बयान देने पर बाबा रामदेव के खिलाफ हैदराबाद में केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा मामले में दर्ज अन्य लोगों के बयान भी रिपोर्ट में शामिल हैं।
स्वामी रामदेव ने पुलिस को 10 लाइनों में लिखित बयान भेजा है। बयान और पुलिस की ओर से कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट की कॉपी मिल गई है। अब अगली तारीख पर बहस के दौरान रामदेव के खिलाफ समन जारी करने और एसपी, डीएसपी को अवमानना का नोटिस जारी करने की मांग की जाएगी।
- ओपी चुग, शिकायत कर्ता के वकील
यह है मामला
करीब ढाई माह पहले नई अनाज मंडी में सद्भावना सम्मेलन में स्वामी रामदेव ने कहा था कि यदि कानून नहीं होता तो वे भारत माता की जय नहीं बोलने वालाें का सिर काट देते। मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सुभाष बतरा ने एसपी को शिकायत देकर मांग की कि रामदेव पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में देशद्रोह का केस दर्ज किया जाए। सुनवाई नहीं होने के कारण पूर्व मंत्री ने कोर्ट में याचिका लगा दी। कोर्ट ने एसपी को जांच करके रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए। 23 मई को हुई सुनवाई में डीएसपी ने कोर्ट में जाकर रिपोर्ट पेश की। इस पर कोर्ट ने चेतावनी दी और कहा कि खुद एसपी को कोर्ट में रिपोर्ट पेश करनी होगी। इसके बाद एसपी ने 10 दिन का समय मांगा था और सुनवाई 3 जून को तय की गई थी। तीन जून को भी एसपी रिपोर्ट लेकर पेश नहीं हुए। एसपी ने जाट आंदोलन चेतावनी के कारण कानून व्यवस्था बनाने में व्यस्त होने की बात कही और वे कोर्ट नहीं पहुंच सके। एक पुलिस कर्मी ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश की थी।
मेरे बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया : रामदेव
मैं स्वामी रामदेव पुत्र श्री शंकर देव दिव्य योग मंदिर कनखल हरिद्वार निमभनलिखित बयान करता हूं कि सद्भावना रैली के दौरान दिये गए मेरे बयान व भाषण को गलत तरीके से अनुवादित किया गया है। रैली के दौरान मेरा उद्देश्य लोगों को आपस में प्रेम भाव रखने व कानून की हद में रहकर कानून की पालना के लिए समझाना था। मैंने वहां उपस्थित लोगों को कानून और संविधान को सर्वोपरि रहने की महत्ता व उनका सम्मान करने के लिए प्रेरित करते हुए संदेश दिया था कि किसी को कानून अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए। मेरा किसी भी व्यक्ति, जाति या समाज के किसी भी वर्ग की भावना को ठेस पहुंचाने का उद्देश्य नहीं था। मेरे भाषण के अंश का गलत अर्थ निकालकर उसे अपनी सुविधानुसार तोड़-मरोड़कर अपने राजनीतिक फायदे के लिए पेश किया जा रहा है। मेरा मकसद वहां मौजूद लोगों या किसी अन्य व्यक्ति को उकसाना नहीं था। मेरे खिलाफ दुर्भावना से शिकायत की गई है। कृपया उसे खारिज किया जाए।