फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दंगों की पीड़ा: दर्द सुनाने भी 40 रुपये उधार लेकर आना पड़ा

Sun, 06 Mar 2016 01:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
विज्ञापन
प्रकाश सिंह जांच कमेटी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
अब जांच फाइल में दंगों का दर्द दर्ज किया जाने लगा है। शनिवार को जांच कमेटी ने रोहतक में पीड़ितों के बयान सबूतों के साथ दर्ज किए। पीड़ितों के लिखित बयानों में भी सिर्फ और सिर्फ जिला और पुलिस प्रशासन की लापरवाही ही नजर आई। जांच कमेटी के सामने कुल 375 पीड़ित पेश हुए। इनमें से 136 ने समूह में बयान दिए तो 56 पीड़ितों ने शपथ पत्र समेत लिखित में बयान दर्ज करवाए।
विज्ञापन


सभी ने एक  सुर में कमेटी अध्यक्ष प्रकाश सिंह के सामने उपद्रव के दौरान अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी। वहीं, शुक्रवार को सुखपुरा चौक पर प्रकाश सिंह को पीड़ा बताने वाला सत्यनारायण कैनाल रेस्ट हाउस में बयान दर्ज करवाने पहुंचा। सत्यवान के दर्द में हरेक दंगा पीड़ित का दर्द छलका। कभी सुखपुरा चौक पर किरयाणा की बड़ी दुकान के मालिक रहे सत्यवान को बयान दर्ज कराने रेस्ट हाउस में पहुंचने के लिए भी किराये के 40 रुपये किसी से उधार मांगने पड़े।

सत्यनारायण ने बिलखते हुए बताया कि उपद्रवियों की तबाही की वजह से उसके 10 लाख रुपये फंस गए हैं। जैसे तैसे करके एक प्लाट लिया था, लेकिन अब रुपये नहीं होने के कारण बयाना भी वापस नहीं मिल रहा है। अभी दो बेटियों की शादी भी करनी है। 
विज्ञापन


7 घंटे तक सिर्फ दर्द की दास्तां
कमेटी प्रमुख प्रकाश सिंह और एडीजीपी क्राइम केपी सिंह ने शनिवार सुबह 9 बजे कैनाल रेस्ट हाउस में पीड़ितों के बयान दर्ज करने शुरू किए। 7 घंटे तक बिना खाना खाए लगातार दहशत भरी दास्तां सुनी गई। रेस्ट हाउस में एसपी शशांक आनंद सहित जिला प्रशासन व भारी पुलिस बल मौजूद रहा। दोपहर 1 बजे तक पीड़ितों को क्र म के हिसाब से कमेटी के सामने बयान दर्ज करवाने भेजा जा रहा था।

ज्यादा समय लगने के कारण बाद में पीड़ितों को सीधे कमेटी के सामने भेजा गया। भीड़ बढ़ने पर प्रकाश सिंह पीड़ितों के बीच में आ गए। माहौल बिगड़ने से पहले ही प्रकाश सिंह ने उनके बीच पहुंचकर बातचीत की। इसके बाद पीड़ित शांति बनाकर टैंट के नीचे बैठ गए।

जो सबूत मिला, 
जांच कमेटी के सामने जितने भी पीड़ितों ने बयान दर्ज करवाए, उनमें से अधिकतर के पास जिला व पुलिस प्रशासन सहित उपद्रवियों के खिलाफ पुख्ता सबूत थे। किसी के पास उपद्रव से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज की सीडी थी तो किसी ने पास फोटो। उपद्रव के समय पीड़ितों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति और गैर उपस्थिति के संबंध में भी सबूत पेश किये। पीड़ितों द्वारा सौंपे गए सारे सबूतों को रिकॉर्ड में रख लिया गया है। 

किसी ने बयान दर्ज कराए तो किसी ने दिया शपथपत्र 
अपने बयानों को लेकर पीड़ित प्रतिबद्ध दिखे। किसी ने कमेटी के समाने बयान दर्ज करवाए तो किसी ने शपथपत्र दिया। कुछ पीड़ितों ने शपथपत्र देते हुए कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपने बयानों से पीछे नहीं हटेंगे ताकि उपद्रवियों और जिम्मेदार अधिकारियों को सजा मिल सके। जिस कमरे में पीड़ितों के बयान दर्ज किए जा रहे थे उसके अंदर वीडियो रिकार्डिंग भी कराई जा रही थी। 

कोई इलाज तो कोई मुआवजे के लिए पहुंचा 
कुछ पीड़ित ऐसे भी पहुंचे जिन्होंने न तो जिला प्रशासन की शिकायत की और न ही उपद्रवियों पर कार्रवाई की मांग। उन्होंने सिर्फ भविष्य को बेहतर बनाने के लिए मुआवजा और उपचार की बात की। प्रकाश सिंह ने कहा कि कुछ लोग इलाज कराने की गुहार लगाने पहुंचे थे तो कुछ मुआवजे की मांग कर रहे थे। हालांकि सभी को संबंधित विभाग में भेज दिया गया। 

गांवों से नहीं पहुंचे पीड़ित, खाली पड़ी रही कुर्सी 
हालांकि सभी पीड़ित भारी तादाद में बयान दर्ज करवाने नहीं पहुंच सके। दिनभर रेस्ट हाउस में कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। हालांकि शाम तक इक्का-दुक्का पीड़ितों के आने का सिलसिला जारी रहा। इतना ही नहीं गांव से एक भी आदमी कमेटी के सामने बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचा। 

कौन पहुंचा- किसने क्या कहा 
12-14 साल के बच्चों के हाथ में भी हथियार थे
19 फरवरी की शाम को हम अपने घर की छत पर खड़े थे। यहां से कोर्ट के बाहर का सारा नजारा दिखता है। शाम को अचानक वकीलों और अन्य लोगों में मारपीट हो गई। करीब आधा घंटे तक जमकर उपद्रव मचा। जब मैं अपने परिजनों के साथ किसी काम से दिल्ली बाईपास की तरफ गई तो यहां 12 से 14 साल के बच्चे भी हाथों में हथियार और डंडे लेकर खड़े थे। शायद उन्हें यह भी नहीं पता हो कि वे क्या कर रहे हैं। सिर्फ खाकी वर्दी के खिलाफ ही गुस्सा नजर आ रहा था। 
विज्ञापन

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें