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सभी जगहों पर नहीं लगे हैं सीसीटीवी कैमरे, महिला मरीजों की देखभाल करते हैं पुरुष

Sun, 18 Dec 2016 01:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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सवालों में मानसिक अस्पताल की व्यवस्था और कार्यप्रणाली - फोटो : अमर उजाला
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स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (एसआईएमएच) में महिला मरीज के साथ दुष्कर्म की घटना ने संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही संस्थान की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। संस्थान में सभी जगहों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं। ऐसा नहीं होने से मरीजों की निगरानी मुश्किल हो गई है। हैरान करने वाली व्यवस्था तो यह है कि संस्थान में महिला मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी पुरुष सहायक पर है। यह भी कम आश्चर्यजनक नहीं है कि महिला का अता-पता होेने के बावजूद छह माह से उसके परिजनों से संपर्क नहीं किया गया। जबकि घटना घटित होते ही संस्थान ने महिला के परिजनों को खोज निकाला। इसे केवल संयोग ही नहीं कहा जा सकता कि एक तरफ संस्थान के डॉक्टर प्रदीप कुमार महिला के परिजनों की तलाश पूरी कर चुके थे तो दूसरी ओर संस्थान के डॉक्टर महिला के साथ हुए दुष्कर्म की शिकायत पुलिस को दे रहे थे। अब डॉक्टरों को महिला के पति को जवाब देना मुश्किल हो रहा है।
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केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश को पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में एसआईएमएच की सुविधा मिली। इसमें मानसिक रोगियों को निशुल्क उपचार होता है। संस्थान के डॉक्टर और स्टाफ की जिम्मेदारी होती है कि वे सामान्य मरीजों के अलावा कोर्ट से आने वाले मरीजों का उपचार करें। ऐसी ही मरीज थी पीड़ित महिला। सूत्रों की मानें तो महिला उत्तरप्रदेश की निवासी है और उसकी शादी घरोंडा में हुई है। उसके तीन बच्चे हैं। महिला की मानसिक स्थिति सही नहीं है। वह हर व्यक्ति को मामा कह कर बुलाती है। महिला का तीन बार खानपुर मेडिकल कालेज में उपचार कराया गया है। वह 2013, 2015 और 2016 में मानसिक स्थिति के लिए उपचार ले रही है। एसआईएमएच में कोर्ट के रिस्पशन आर्डर (कोर्ट आदेश) से उसे नौ जून 2016 को लाया गया था। विभाग की मानें तो महिला के साथ हुई गलत हरकतों का उस समय पता चला जब उसे उल्टी आई और शक के आधार पर जांच की गई। जांच के बाद जब महिला के गर्भवती होने की पुष्टि हुई तो उसने दुष्कर्म करने वाले की पहचान की। इसके बाद आरोपी को पुलिस के हवाले किया गया है।

पति से बोली महिला, मुझे मारोगे तो नहीं?

सूत्रों की मानें तो पीड़ित महिला की उसके पति से फोन पर बात हुई है। पति से उसने कहा कि उसे खुशी है कि उनसे बात हो रही है, वह उसे मारेंगे तो नहीं। वहीं, डॉक्टरों की मानें तो महिला मानसिक विक्षिप्त है, लेकिन कुछ बातों की समझ रखती है। आशंका है कि इसी कमी के कारण उसके परिजनों ने उसकी सुध नहीं ली। यह सवाल भी उठ रहा है कि जब महिला की फाइल पर सारा रिकार्ड है तो उसके परिजनों की तलाश क्यों नहीं की गई?
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छह का स्टाफ करता है जांच

मनोचिकित्सक, सोशल वर्कर, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, आक्यूपेशनल थैरेपिस्ट, डायटिशियन और स्टाफ नर्स।

बीयरर में नहीं रखा गया है लिंग भेद

एसआईएमएच में बीयरर (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) की नियुक्ति में लिंग भेद नहीं किया गया है। महिला मरीजों की पुरुष और पुरुष मरीजों की महिला बीयरर देखभाल करती हैं। इनके जिम्मे सारा काम होता है। यही इन्हें जांच के लिए लाते और ले जाते हैं। जबकि संस्थान में कोई पुरुष डॉक्टर किसी महिला की जांच बगैर किसी महिला कर्मचारी की मौजूदगी के नहीं करता। दुष्कर्म मामले में पुलिस ने जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, उसकी पत्नी भी एसआईएमएच में बीयरर के पद पर कार्य करती है। इससे भी कई सवाल उठ रहे हैं।

उठ रहे सवाल

- महिला मरीज की देखभाल की जिम्मेदारी पुरुष सहायक को क्यों?
- संस्थान में सभी जगह सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाए गए हैं?
- महिला को जांच के लिए ले जाते समय महिला क्यों नहीं होती थी ?
- गर्भ ठहरने के बाद दुष्कर्म का पता चला, पहले क्यों नहीं ध्यान दिया गया?
- ड्यूटी पर रहने वाले डॉक्टर और नर्स की जिम्मेदारी क्यों नहीं तय की?
- छह माह से महिला के पते पर परिजनों की तलाश क्यों नहीं की गई ?

एसआईएमएच का पक्ष

एसआईएमएच का कहना है कि बृहस्पतिवार को घटी घटना का जब ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को पता चला तो उसने तुरंत प्रभाव से कार्यकारी विभागाध्यक्ष डॉ. सुजाता सेठी को जानकारी दी। इसके बाद सीईओ डॉ. राजीव गुप्ता से चर्चा कर मरीज का प्रेगनेंसी टेस्ट करवाया गया। परिणाम की गंभीरता को समझते हुए पुलिस को सूचना दी गई।


उठाए जा रहे हैं जरूरी कदम
एसआईएमएच के सभी कंसलटेंट के साथ मीटिंग की है। सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए नियम बनाया जा रहा है। शनिवार को इस संबंध में चर्चा की जाएगी। संस्थान में सभी मरीज सुरक्षित हैं। मरीज के परिवार का पता चल गया है। वे संस्थान के संपर्क में हैं। मरीज के परिजनों की सहमति से जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। मरीज के ठीक होने तक वह संस्थान में रहेगी। ठेकेदार के स्टाफ के चयन में ज्यादा सावधानी बरतने की आवश्यकता को समझा गया है। जांच का विषय है कि आरोपी स्वयं दोषी है या उसके गलत कार्य में महिला भी जिम्मेदार है।
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- डॉ राजीव गुप्ता, सीईओ एसआईएमएच
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