अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल की अदालत ने शनिवार को चौंकाने वाला फैसला सुनाया। अपने प्रेमी सहित तीन लड़कों को गैंगरेप के झूठे आरोप में फंसाने वाली लड़की को 7 घंटे कोर्ट में खड़े रहने की सजा सुनाई गई। लड़की को 500 रुपये जुर्माना भी भरना होगा। लड़की के गुनाह कबूलने पर कोर्ट ने नरमी बरतते हुए यह सजा सुनाई।
तीनों युवक बवानीखेड़ा के गांव दौलतपुर निवासी मनदीप, हिसार के गांव मूठ रागड़ान के अजमेर सिंह और मध्यप्रदेश के दमोह जिला निवासी प्रह्लाद को बरी कर दिया गया। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि तीनों को 1-1 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
पहले प्रेमी के साथ गई, फिर फंसाया
अदालत में चले अभियोग के अनुसार 30 अगस्त 2013 को शौरा कोठी निवासी एक युवती अपने प्रेमी मनदीप के साथ घर से चली गई थी। युवती की मां ने सिटी थाना पुलिस को शिकायत दी कि मेरी बेटी को मनदीप भगाकर ले गया है। दो महीने बाद पुलिस को दोनों हिसार में मिले। यहां थाने में हुई पंचायत में युवती ने अपने मायके वालों के साथ जाने से इनकार कर दिया और लड़के के साथ चली गई।
फिर मायके पक्ष के लोगों ने लड़की को बेदखल कर दिया। इसके बाद लड़की दो महीने तक मनदीप के साथ हिसार में किराये के मकान में रही। यहां कुछ दिन बाद ही उसका मन नहीं लगा और अपने मायके आ गई। रोहतक आकर मायके वालों से मिल युवती ने सिटी थाने में मनदीप, उसके दोस्त अजमेर और प्रह्लाद पर उसे मध्यप्रदेश और हिसार ले जाकर गैंगरेप करने का केस दर्ज करा दिया। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। तभी से जिला कोर्ट में सुनवाई चल रही थी।
कोर्ट ने 18 सितंबर को लड़की को सीआरपीसी की धारा 340 और 344 (झूठी गवाही देने के संबंध में) के तहत नोटिस जारी कर पेश होने के आदेश दिए। लड़की शनिवार सुबह 9 बजे पेश हुई। यहां लड़की ने स्वीकार किया कि मैंने तीनों लड़कों के खिलाफ झूठे बयान दिये थे। दलील दी कि मेरी शादी कानपुर में हो चुकी है और 11 महीने की बेटी है। गलती स्वीकाराने पर कोर्ट ने रियायत बरतते हुए उसे सुबह 9 से शाम 4 बजे तक कोर्ट में खड़ा रहने की सजा सुनाई।
एसपी को बताना होगा, क्या कार्रवाई की आईओ पर
कोर्ट ने माना कि पुलिस ने बिना जांच किए ही तीनों युवकों पर केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। यह पुलिस का उदासीन रवैया है। कोर्ट ने एसपी को नोटिस जारी किया है। एसपी को चार माह में रिपोर्ट देनी होगी कि उन्होंने तीनों युवकों पर गैंगरेप का केस दर्ज करने वाले जांच अधिकारी (आईओ) के खिलाफ क्या कार्रवाई की।