उपद्रव के दौरान मैदान छोड़कर भागे पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के बाद सख्त कार्रवाई की गई। दोषी पाए जाने पर एक सिपाही और एक एसआई की जहां पांच वेतनवृद्धि रोक दी गईं हैं, वहीं ड्यूटी से नदारत रहने वाली पांच महिला सिपाहियों को परिनिंदा की सजा हुई है। एक पुलिसकर्मी भी दोषी पाया गया है। लापरवाही बरतने वाले कुछ अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
चौकी में खड़ी की राइडर, उपद्रवियों ने जलाई
सिपाही अशोक कुमार राइडर नंबर-3 पर बतौर चालक तैनात थे। फरवरी में आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में सिपाही अशोक को कानून व्यवस्था के लिए पुलिस लाइन में बुलाया गया था। अशोक ने अपनी राइडर पुलिस लाइन में खड़ी न करके पुलिस चौकी गौकर्ण में खड़ी कर दी थी। बाद में उपद्रवियों ने राइडर को आग के हवाले कर दिया था। दोषी पाए जाने पर सिपाही अशोक कुमार की पांच वेतन वृद्धि रोक दी गईं हैं।
थाने में खड़ी एंबुलेंस नहीं बचा सके एसआई
एसआई धर्मबीर सिंह बतौर प्रभारी टीएसी महम में तैनात था। टीएसी महम में एक एंबुलेंस दी गई थी। उपद्रवियों ने थाना परिसर में खड़ी एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया था। एसआई ने उपद्रवियों से एंबुलेंस को जलाने से बचाने का प्रयास नहीं किया। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर एसआई की भविष्य में पांच वेतन वृद्धि स्थायी तौर पर रोक दी गईं हैं।
उपद्रव में ड्यूटी से रहे थे गैर हाजिर
सिपाही कुलदीप, महिला मुख्य सिपाही पपीता देवी, मंजू लता, सिपाही अन्नी देवी, सोनिया और कविता महिला थाने में तैनात थी। उपद्रव के दौरान इन कर्मचारियों की ड्यूटी कानून एवं व्यवस्था बनाये रखने के लिए कंपनी सी में लगाई गई थी। मगर ये सभी ड्यूटी से गैर हाजिर रहे। जांच के बाद सभी को परिनिंदा की सजा दी गई।
इंस्पेक्टर ने नहीं मानी अधिकारियों की बात
इंस्पेक्टर संदीप कुमार वर्ष 2012 में स्पेशल स्टाफ रोहतक में तैनात रहे हैं। थाना महम में दर्ज एक केस की जांच उन्हें सौंपी गई थी। इस केस में वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच के संबंध में संदीप को दिशा निर्देश दिए थे। संदीप ने उच्च अधिकारियों के आदेशों की पालना नहीं कर केस की जांच में लापरवाही बरती। जांच में दोषी पाए जाने पर संदीप कुमार की दो वार्षिक वेतन वृद्धि स्थायी तौैर पर बंद कर दी गई।
नगर निगम ने अवैध निर्माण की शिकायत नहीं की कार्रवाई
एसआई राजेंद्र सिंह (फिलहाल सेवानिवृत्त) वर्ष 2014 में बतौर प्रभारी थाना अर्बन एस्टेट तैनात रहे हैं। रिहायशी मकान मालिकों और बैंक्वेट हाल मालिकों की ओर से बिना सीएलयू अवैध निर्माण किया गया था। नगर निगम की ओर से अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए प्रभारी थाना अर्बन एस्टेट को पत्र लिखे गए थे। लेकिन राजेंद्र सिंह ने प्रभारी थाना अर्बन एस्टेट होते हुए अवैध निर्माण करने वालों पर केस दर्ज नहीं किया। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर एसआई की (सेवानिवृत्त) की 10 प्रतिशत पेंशन कटौती की एक वर्ष की सजा दी गई है।
आरोपी के खिलाफ नहीं जुटाए पुख्ता सबूत
ईएसआई धर्मबीर सिंह वर्ष 2015 में बतौर जांच अधिकारी थाना महम में तैनात थे। दहेज उत्पीड़न के एक मामले में धर्मबीर सिंह ने जांच की। समीक्षा में पाया गया कि उन्होंने केस की जांच सही तरीके से नहीं की। आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत हासिल नहीं किए। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर धर्मबीर की तीन वेतन वृद्धि स्थायी तौर पर बंद करने के सजा दी गई।