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फैसला जानने कोर्ट से लेकर सड़कों तक उमड़ी भीड़

Tue, 22 Dec 2015 02:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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दस माह से ज्यादा समय से जिसका इंतजार था, सोमवार वही दिन था। नेपाली मूल की मंदबुद्धि युवती के साथ गैंगरेप और मर्डर मामले में अदालत ने दोषियों को मौत की सजा सुना दी। इस ऐतिहासिक फैसले को लेकर लोगों में उत्सुकता थी, सो अदालत परिसर से लेकर आसपास की सड़कों तक भीड़ जमा रही।
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 लंच में वकील और जज भले ही कोर्ट के बाहर गए हो, आम लोग सड़क और कोर्ट के बाहर पूरा दिन डटे रहे। इधर, पुलिस विभाग भी मुस्तैद रहा। अदालत के चप्पे-चप्पे में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। अदालत के बाहर विकास भवन से लेकर जनस्वास्थ्य विभाग के दफ्तर तक पुलिस जवान तैनात थे।

फैसले पर बहस सुबह करीब 11 बजकर 21 मिनट पर हुई, लेकिन कोर्ट परिसर में लोगों का आना सुबह दस बजे से ही शुरू हो गया था। सजा पर पहले बहस हुई फिर लंच के बाद फैसला देने की सूचना आई। दोषियों को बैरक में लाया गया। वकील और जज सभी लंच के लिए चले गए, लेकिन बाहर लोगों की भीड़ कम नहीं हुई। लंच के बाद जब फैसला आया तब लोगों की जुबान पर फैसले को लेकर उत्साह था।
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लोगों ने एक स्वर में कहा- सही फैसला, दरिंदों को ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए थी। भीड़ से एक आवाज यह भी आई कि जिस तरीके से जल्दी-जल्दी सुनवाई कर एक वर्ष से पहले ही इस मामले में फैसला आ गया, ऐसा ही हर मामले में होना चाहिए।

हर चप्पे पर पुलिस बल
पीडब्ल्यूडी ऑफिस के बाहर पुलिस ने बैरिकेट्स लगाए थे। यहां करीब पांच पुलिसकर्मी मुस्तैद थे। इसके बाद बार एसोसिएशन के दफ्तर के बाहर भी पुलिस की एक टीम मौजूद थी। सर्किल के पास पुलिस की करीब छह गाड़ियां मौजूद थीं। पुलिसकर्मी हर शख्स पर पैनी नजर जमाए हुए थे।

बिना तलाशी नहीं मिला प्रवेश
कोर्ट परिसर में प्रवेश करते ही सभी की तलाशी ली गई। यहां करीब एक दर्जन से ज्यादा पुलिस कर्मी के अलावा एसपी शशांक आनंद, डीएसपी अमित भाटिया, डीएसपी पवन कुमार, डीएसपी विजेंद्र सिंह के अलावा कई एसएचओ भी मौजूद थे। कोर्ट के पहले तल से लेकर तीसरे तल तक छह-छह पुलिसकर्मी हथियारों से लैस थे। कोर्ट भवन की गैलरी में भी हथियारबंद पुलिसकर्मी लगाए गए थे।

कई बार करनी पड़ी पुलिस को मशक्कत
कोर्ट परिसर के बाहर जब लोगों की भीड़ बढ़ने लगती तब-तब पुलिसकर्मियों को लोगों को हटाने में मशक्कत करनी पड़ती। यही हाल कोर्ट नंबर-12 के बाहर भी था। यह वही कोर्ट है जहां दरिंदगी के गुनाहगारों को फैसला सुनाया गया।
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 उसके बाहर वकीलों, मीडिया कर्मियों के अलावा दोषियों के परिजन और आम लोग भी जमा थे। यहां से भी कई बार भीड़ को हटाने के लिए पुलिस का सहारा लिया गया।
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