हरियाणा के रोहतक के बैंयापुर लाढ़ौत के दूधिया हत्याकांड के दोषी मोनू बैंयापुर को एडीजे राजकुमार यादव की अदालत ने उम्रकैद व 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक दिसंबर 2017 में बैंयापुर लाढ़ौत निवासी सोमबीर ने शिकायत दी थी कि उसका भाई राजेश (47) दूधिया के तौर पर काम करता था।
इसके लिए डेयरी भी कर रखी थी। सुबह करीब साढ़े छह बजे बाइक पर दूध लेकर रोहतक के लिए चला था। जब राजेश लाढ़ौत रोड पर पानीपत-रोहतक रेलवे लाइन पर स्थित फाटक के पास पहुंचा तो बाइक पर तीन युवक आए और उसके भाई को गोली मार दी। अंधेरा होने के कारण वह हमलावरों को नहीं पहचान सका। उसे नहीं पता किस रंजिश में वारदात अंजाम दिया गया।
पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच की। साथ ही तीन आरोपियों बैंयापुर निवासी मोनू और उसके दो साथियों रोहित व राहुल को गिरफ्तार किया। तभी से जिला अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी। बुधवार को एडीजे राजकुमार यादव की अदालत ने मोनू को जहां दोषी करार दिया था, जबकि रोहित व राहुल को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
दोषी ने मांगी अदालत से राहत, कोर्ट ने दी उम्रकैद की सजा
शुक्रवार को अदालत में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई, जिसमें दोषी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया कि उसके परिवार में वह एकमात्र कमाने वाला है। उसे सजा में राहत दी जाए। अदालत ने दोपहर बाद फैसला सुनाते हुए दोषी मोनू बैंयापुर को आईपीसी की धारा 302 के तहत उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना और आर्म्स एक्ट के तहत दो साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दोनों सजा एक साथ चलेंगी।
बुआ की जमीन खरीदने से नाराज था मोनू, एफएसएल रिपोर्ट बनी सबूत
पीड़ित पक्ष के वकील ओपी चुघ ने बताया कि दूधिया को फाटक के पेट में गोली मारी गई थी। साथ ही चाकू से भी हमला किया गया। एफएसएल जांच रिपोर्ट में बताया गया कि मृतक के शरीर में मिली गोली आरोपी से बरामद पिस्तौल से चली है। यह रिपोर्ट केस में अहम साबित हुई। इसके अलावा दोषी ने पूछताछ में खुलासा किया था कि पीड़ित पक्ष ने उसकी बुआ की जमीन खरीद ली थी। इससे वह नाराज चल रहा था। साथ ही केस में दो आरोपियों को बरी करने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।