दीपावली के दिन अगवा किए गए बच्चे को रोहतक पुलिस ने बिहार के मुंगेर जिले के एक गांव से बरामद कर लिया है।
हालांकि बच्चे को अगवा करने वाला आरोपी कुंदन पुलिस के हाथ नहीं लगा, लेकिन पुलिस उसके पिता को उठा लाई है। बच्चे को नक्सल प्रभावित इलाके से बरामद किया गया है।
ऐसे में आरोपी के नक्सलियों से भी संबंध होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस कुंदन की गिरफ्तारी के बाद ही सारी स्थिति साफ होने की बात कह रही है।
बच्चे का मेडिकल करा कर उसे परिजनों को सौंप दिया गया।
मूलत: आजमगढ़ यूपी निवासी मजदूर विनोद गांधी कैंप पुलिस चौकी क्षेत्र के पटेल नगर में रहता है। दीपावली के दिन 11 नवंबर को विनोद के साथ काम करने वाला बिहार के मुंगेर जिले का निवासी कुंदन उसके घर आया।
यहां दोनों ने खाना खाया और कुछ देर बाद कुंदन विनोद के चार वर्षीय बेटे अंकुश को कपड़े दिलाने के बहाने ले गया। जब वह बच्चे को लेकर नहीं लौटा तो अगले दिन गांधी कैंप चौकी में कुंदन के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखाई गई।
दस दिन बाद यूं पहुंची पुलिस
पुलिस ने तफ्तीश के बाद साइबर सेल की मदद से कुंदन की लोकेशन का पता लगाया। दबिश देकर बच्चे को बिहार के मुंगेर जिले के गांव हरिनमार से बरामद कर लिया। पुलिस टीम रविवार को वापस लौटी है। विनोद और उसकी पत्नी अनीता को दस दिन बाद बच्चा सकुशल मिला तो उनके आंसू छलक आए। दंपति ने सीआईए टू के दफ्तर में बच्चे को लेकर आए पुलिसकर्मियों सहित पूरे महकमे का आभार जताया।
ऐसे पता चला अंकुश का
एसपी शशांक आनंद ने मामले की जांच डीएसपी हेडक्वार्टर विजेंद्र सिंह और सीआईए टू प्रभारी राकेश कुमार को सौंपी। पुलिस ने अपने स्तर पर तहकीकात करने के बाद कुंदन का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर रखवाया।
बताया जाता है कि 16 तारीख को विनोद के मोबाइल की लोकेशन मुंगेर जिले में मिली। एएसआई सुभाष चंद्र के नेतृत्व में आईओ एएसआई अवतार सिंह, साइबर सेल के एएसआई रणवीर सिंह, हेड कांस्टेबल नवीन और हेड कांस्टेबल देवेंद्र की टीम 17 नवंबर को मुंगेर पहुंची।
सुभाष चंद्र ने बताया कि मुंगेर जाकर पता चला कि हरिनमार एक नक्सल प्रभावित इलाका है और गांव में जाने के लिए न तो सड़क हैं और न ही वहां बिजली है। वहां जाने का एक मात्र रास्ता गंटक और गंगा का संगम घाट ही है। पुलिस टीम नाव के जरिये गांव में पहुंची। हरिनमार पुलिस स्टेशन के एसएचओ कौशल कुमार भारतीय से मदद मांगी। उन्होंने पूरी मदद की और कुंदन के घर का पता लगवाया। 20 नवंबर को तड़के चार बजे कुंदन के घर पर दबिश दी। यहां कुंदन तो नहीं मिला, लेकिन साजिश में शामिल उसका पिता भादौ यादव बच्चे के साथ मिल गया। पुलिस ने बच्चा बरामद कर भादौ यादव को गिरफ्तार कर लिया और मुंगेर कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे ट्रांजिक्ट रिमांड पर रोहतक पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस ने मुंगेर में ही अंकुश का मेडिकल भी कराया। रविवार को भादौ को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया है।
अमर उजाला का भी धन्यवाद
बच्चा मिलने के बाद विनोद ने एसपी शशांक आनंद से मिलकर उनका आभार जताया। पीड़ित पिता ने साथ में अमर उजाला का भी आभार जताया। गौरतलब है कि बच्चे के अगवा होने की खबर सबसे पहले अमर उजाला ने 13 नवंबर को ‘घर आया, खाना खाया और बच्चा उठाकर ले गया’ शीर्षक से प्रकाशित की थी। 14 नवंबर को भी ‘अंकुश का नहीं लगा सुराग, पुलिस ने मांगा बर्थ सर्टिफिकेट’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की।
अपहरण के पर्दे के पीछे कई सवाल ?
पुलिस ने बेशक अंकुश को बरामद करके सराहनीय काम किया है, लेकिन मुख्य आरोपी के फरार होने से कई राज खुलना बाकी रह गए। विनोद चूंकि एक गरीब व्यक्ति है। साफ है कि फिरौती के लिए उसके बच्चे का अपहरण नहीं किया गया होगा। पुलिस भी यह बात मान रही है। आरोपी नक्सली क्षेत्र में रहता है। अंदेशा है कि कुंदन के संबंध भी नक्सलियों से हो सकते हैं। पत्रकारवार्ता में डीएसपी विजेंद्र सिंह ने बताया कि बच्चे के अपहरण के पीछे क्या कारण रहें? इसका खुलासा कुंदन की गिरफ्तारी के बाद ही हो पाएगा। पुलिस किसी भी आशंका से इनकार नहीं कर रही है। ऐसे में यदि कुंदन के नक्सलियों से संबंध निकलते हैं तो एक बड़े गिरोह का हाथ होने की भी आशंका है, जो अबोध बच्चों का अपहरण कर उन्हें तैयार कर नक्सली गतिविधियों के लिए तैयार करता हो?