जाट आरक्षण आंदोलन को बीते करीब छह माह हो गए हैं, लेकिन उस समय दर्ज मुकदमे लोगों का पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। आंदोलन के समय दर्ज मुकदमों के संबंध में बोहर गांव के 11 छात्रों को पुलिस की ओर से नोटिस भेज गया है। एक साथ इतने छात्रों को घर नोटिस मिलने पर ग्रामीण भड़क गए और शुक्रवार को अर्बन एस्टेट थाने पहुंच गये। यहां ग्रामीणों को बताया गया कि 20 अगस्त तक छात्रों को थाने में पेश होना होगा, लेकिन उन्होंने छात्रों को थाने भेजने से साफ मना कर दिया। इस संबंध में सोमवार के बाद किसी दिन ग्रामीणों की पंचायत होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस पंचायत से पहले इस मामले में गांव में आकर किसी तरह की जबरदस्ती करती है तो उसका विरोध किया जाएगा।
बता दें कि प्रदेश में फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन हुआ तो वह पहले शांतिपूर्ण चला, लेकिन बाद में हिंसक हो गया। उपद्रव शांत होने के बाद कई लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए। रोहतक में 1200 से ज्यादा केस दर्ज किए गए। बाद में पुलिस ने गिरफ्तारियां शुरू की तो जाट समाज के लोग आंदोलन करने लगे। इससे पुलिस की कार्रवाई धीमी पड़ गई। इस संबंध में पुलिस अब छात्रों के घर नोटिस भेजे रही है। बोहर गांव के 11 छात्रों के घर एक मुकदमे में नोटिस भेजे गए हैं।
धारा 160 सीआरपीसी के तहत अर्बन एस्टेट थाने से भेजे गए नोटिस में कहा गया कि वह 12 अगस्त को 10 बजे थाने पहुंचे, जिससे उनको मुकदमे की तफतीश में शामिल किया जा सके। नोटिस मेें चेताया गया है कि नोटिस की अनदेखी करने की सूरत में वह खुद जिम्मेदार होंगे। नोटिस केवल एक मुकदमे में भेजा गया है, जबकि जिले के सभी थानों में दंगे के कई-कई मुकदमे दर्ज हैं। नोटिस मिलने के बाद बोहर के लोगों का गुस्सा भड़क गया। उन्होंने पुलिस पर छात्रों को मुकदमों में फंसाये जाने की तैयारी करने का आरोप लगाया।
बोहर गांव के काफी लोग, जिसमें महिलाएं भी शामिल थीं, ट्रैक्टर-ट्राली में सवार होकर शुक्रवार को अर्बन एस्टेट थाने पहुंचे थे। जगपाल, राजू, आजाद, अजीत, धर्मपाल, कुलदीप, जयदेव, चंचल नांदल, बलराज, अतर सिंह आदि की एसएचओ सतेंद्र कुमार से बातचीत हुई और नोटिस भेजने का विरोध किया। एसएचओ ने उनसे कहा कि वह अपने लड़कों को 20 अगस्त तक थाने जरूर भेज दें। पुलिस का जवाब सुनकर लोग लौट आए और पुलिस पर गलत कार्रवाई करने का आरोप लगाया। लोगों ने एलान किया कि इस संबंध में गांव में बड़ी पंचायत की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पंचायत करके आईजी और कमिश्नर से मिलेंगे
बोहर गांव के लोगों ने फैसला किया है कि वह पहले पंचायत करेंगे। साथ ही मामले में आईजी और कमिश्नर से मिला जाएगा। दोनों अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया जाएगा। उनसे कहा जाएगा कि एक ओर वह मदद की बात करते हैं, जबकि दूसरी ओर पुलिस उनके बच्चों को फंसाने के लिए नोटिस जारी करती है। लोगों का कहना है कि अभी एक मुकदमे में नोटिस भेजे गए हैं। बाद में दूसरे मुकदमोें में नोटिस भेजकर उन्हें परेशान किया जाएगा। जबकि उनके बच्चों का इन मामलों से कोई मतलब नहीं है।
आंदोलन के डर से दबाव बनाने को भेजे जा रहे नोटिस: मलिक
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक का कहना है कि सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर रही है। इस कारण जाट समाज के लोग फिर आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं। आंदोलन की सुगबुगाहट को देखते हुए नोटिस भेजकर लोगों को डराया जा रहा है। जबकि फरवरी से अभी तक छह महीने बीत चुके हैं। इस बीच पुलिस को सभी मुकदमे खत्म कर देने चाहिए थे। लेकिन लोगों को परेशान किया जा रहा है। पुलिस को इस संबंध में कोई बात करनी भी है तो वह सूचना देकर गांव में जाकर बात करे और लौट जाए।
जिसने पुलिस बल को बचाया, उसी को आरोपी बनाया
इधर आंदोलन के दौरान जिस व्यक्ति ने पुलिस बल को उपद्रवियों ने बचाया पुलिस ने उसे ही आरोपी बना दिया। पुलिस ने उसके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश कर दिया। जबकि वह एसआईटी से उन डीएसपी की भी बात करा चुका था जिनकी टीम को उपद्रवियों से बचाया गया था। अब व्यक्ति मामले को लेकर आईजी से मिलेगा। गांव बलियाणा निवासी जितेन्द्र कुमार आईएमटी ट्रक यूनियन का प्रधान है। उनका दावा है कि आरक्षण हिंसा के दौरान 19 फरवरी को पुलिस पार्टी को उपद्रवियों से बचाया था।
गांव खेतों के नजदीक उपद्रवी और पुलिस पार्टी आमने सामने आ गई थी। यहां उपद्रवियों और पुलिस बल के बीच कहासुनी शुरू हो गई थी। इसके बाद जितेन्द्र ने पुलिस बल को खेतों के रास्ते से निकाला था। यहां पर उपद्रवियों ने पुलिस की गाड़ी को आग लगा दी थी। जितेन्द्र ने अन्य ग्रामीणों की मदद से डीएसपी धीरज के नेतृत्व में मौजूद पुलिस बल को झज्जर छोड़ा था। अब जितेन्द्र का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में हुई आगजनी और लूटपाट में आरोपी बना दिया है। उनके खिलाफ कोर्ट में भी चालान पेश कर दिया। जबकि जितेन्द्र का कहना है कि वह हिंसा के समय रोहतक शहर में थे ही नहीं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।