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बेटे की हत्या की खबर सुनते ही थानेदार को आया हार्ट अटैक, दाखिल

Tue, 01 Sep 2015 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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नोएडा में कृपाल नगर निवासी थानेदार के बेटे की हत्या से पूरा परिवार टूट गया है। बेटे की मौत की खबर सुनते ही थानेदार को हार्ट अटैक आ गया और उसे शहर के एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। एक बेटे की हत्या, दूसरा घायल और अब पति को दिल का दौरा।
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एक पल में परिवार बिखरता देख मां सुनीता का रो-रोकर बुरा हाल है। एसआई रणवीर सिंह की पत्नी और मृतक इंजीनियर सचिन की मां सुनीता ने नोएडा पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गुस्साए परिजनों ने शव सड़क पर रखकर जाम लगाने की चेतावनी दी तब जाकर नोएडा पुलिस हरकत में आई। आरोप है कि पुलिस लापरवाही की वजह से उनके बेटे की हत्या कर दी गई। हमने शव सड़क पर रख आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करने का इरादा कर लिया था। परिजनों के गुस्से को देख एसपी ने मौके पर पहुंचकर बदमाशों को जल्द पकड़ने का आश्वासन दिया। एसपी के आश्वासन पर मामला शांत हुआ।

रॉड मारकर तोड़ा बुलेट प्रूफ कार का शीशा, फिर मारी सचिन को गोली
सुनीता सांगवान ने बताया कि जिस कार में सचिन सांगवान और उसका छोटा भाई तरुण सांगवान अपने फ्लैट पर जा रहे थे, वह बुलेट प्रूफ थी। वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों को भी इस बात की भनक थी। इसलिए जब सचिन ने कार नहीं रोकी तो बदमाशों ने लोहे की रॉड से कार का शीशा तोड़ा और फिर सचिन पर गोलियां बरसा दी।  
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पिस्तौल तानकर बदमाश बोले- बाहर निकल
यदि  सचिन की मां की माने तो बाइक सवार बदमाशों ने करीब 1 किलोमीटर पहले से ही उनकी कार का पीछा करना शुरू कर दिया  था। सचिन के गले में सोने की चेन और हाथ में एक ब्रेस्लेट  था। छोटे बेटे घायल तरुण ने अपनी मां को बताया कि आरोपियों ने रेड लाइट पर सचिन को कार से बाहर निकलने के लिए कहा था। इस पर सचिन ने कार दौड़ा दी।
छोटे भाई को नोएडा में ही कराता था कोचिंग
मृतक सचिन का छोटा भाई तरुण सांगवान शहर के सैनी कॉलेज में बीए सेकेंड ईयर में पढ़ाई कर रहा था। लेकिन किसी प्रोफेशनल कोर्स की तैयारी के लिए सचिन अपने भाई को नोएडा ले गया था। हाल ही में सचिन ने तरुण की नोएडा में ही कोचिंग शुरू कराई थी। वहीं, दो महीने पहले ही सचिन ने मारुति कंपनी से नौकरी छोड़कर सैमसंग में ज्वाइन किया था। फ्लैट पर खाना बनाने के लिए सचिन सारा सामान और एक नेपाली युवक को भी अपने साथ ले गया था।

मेरे लाल की नहीं थी किसी से दुश्मनी
सचिन  को नौकरी लगे करीब तीन साल हो गए थे। इस दौरान वह आमतौर पर अवकाश पर घर आ जाता था। मां सुनीता का कहना है कि घर आने के बाद भी मेरा लाडला सचिन दुकान पर भी कोई सामान लेने नहीं जाता था। उसकी किसी से दुश्मनी तो दूर की बात है।
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