भिवानी की छात्रा से दोबारा गैंगरेप मामले की गुत्थी पुलिस सुलझा नहीं पा रही है। हालांकि, मामले में उसने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन पुलिस की जांच और पीड़िता के आरोप में अंतर होने की वजह से मामला उलझ गया है। पुलिस की जांच जहां गिरफ्तार दो नये आरोपियों के इर्दगिर्द घूम रही है, वहीं छात्रा पांच अन्य को आरोपी बता रही है। ऐेसे में मामले की एफएसएल रिपोर्ट ही केस का रुख तय करेगी।
जानकारों का दावा है कि वारदात से संबंधित फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट के आधार पर केस बदल सकता है। मामले में पहले गिरफ्तार तीनों आरोपी जगमोहन, अमित और संदीप कुमार के भविष्य का फैसला भी इसी रिपोर्ट पर निर्भर है। हालांकि, अभी तक पुलिस के पास लैब से रिपोर्ट नहीं पहुंची है, लेकिन पुलिस का दावा है कि रिपोर्ट आने के बाद उसे तुरंत कोर्ट में पेश किया जाएगा।
मामले में पुलिस जांच की बात करें तो एसआईटी के पास केस में पहले पकड़े गये तीनों आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं होने की बात कही जा रही है। जबकि बाद में पकड़े गये दोनों आरोपी संदीप हुड्डा और प्रमोद कुमार के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया जा रहा है। सरकारी वकील भी कोर्ट में इसका जिक्र कर चुके हैं। पुलिस ने इन दोनों से वारदात में इस्तेमाल की गई कार को भी बरामद किया है। इन दोनों में से एक के खिलाफ होटल कर्मचारियों के बयान भी दर्ज हो चुके हैं। दोनों आरोपियों की लोकेशन भी छात्रा के आसपास मिली है।
इसलिए अहम है एफएसएल रिपोर्ट
अपनी जांच को पुख्ता करने के लिए वैसे तो पुलिस अधिकतर केस में वारदात से संबंधित एफएसएल रिपोेर्ट को शामिल करती है। लेकिन छात्रा से गैंगरेप मामले में एफएसएल रिपोर्ट इसलिए अहम है कि इसे कोर्ट में पेश किये बिना पहले पकड़े गये तीन आरोपियों को केस से डिस्चार्ज कराना मुश्किल होगा, क्योंकि पीड़िता अब भी अपने बयान पर कायम है, जबकि पुलिस ने मामले में दो नये आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ऐसे में आरोपियों और पीड़िता के सैंपल की जांच से ही पुष्टि होगी कि दुष्कर्म में कौन-कौन शामिल है। पहले गिरफ्तार आरोपियों के वकील हरेंद्र भालौठिया ने बताया कि जब तक कोर्ट में एफएसएल रिपोर्ट पेश नहीं की जाती तब तक पुलिस तीनों को डिस्चार्ज करने की मांग से बचेगी।
डीएनए रिपोर्ट भी बनेगी आधार
गैंगरेप मामले में डीएनए रिपोर्ट को भी अहम माना जा रहा है। हालांकि डीएनए रिपोर्ट के मुकाबले एफएसएल रिपोर्ट को कोर्ट में ज्यादा पुख्ता माना जाता है। आमतौर पर 15 से 20 दिनों में एफएसएल रिपोर्ट पुलिस के पास पहुंच जाती है, क्योंकि यह करनाल के मधुबन स्थित लैब में तैयार की जाती है। जबकि आरोपियों के वकील हरेंद्र भालौठिया के अनुसार डीएनए रिपोर्ट मुंबई स्थित लैब में तैयार होकर आती है। डीएनए रिपोर्ट के आने में 2 से 4 महीने तक का समय लग जाता है।
इसलिए होती है एफएसएल रिपोर्ट तैयार होने में देरी
करनाल स्थित मधुबन लैब में एफएसएल रिपोर्ट क्रम के हिसाब से तैयार की जाती है। पहले हाईकोर्ट के केस को तरजीह दी जाती है। इसके बाद सेशन कोर्ट के सैंपल का नंबर आता है। हालांकि, यदि पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए रिपोर्ट जल्दी तैयार करने का आग्रह करे तो समय पर रिपोर्ट पुलिस के पास पहुंच जाती है।
सीसीटीवी फु टेज में छात्रा का चेहरा स्पष्ट नहीं
मामले में एक नया तथ्य और सामने आ रहा है। सूत्रों की मानें तो पुलिस के पास छात्रा से संबंधित जो भी सीसीटीवी फु टेज है उनमें उसका चेहरा स्पष्ट नजर नहीं आ रहा है। कई जगहों पर तो छात्रा की पहचान भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में पुलिस डिस्चार्ज की मांग के लिए एफएसएल रिपोर्ट के इंतजार में है। बता दें कि पुलिस ने मामले में विभिन्न जगहों से 26 सीसीटीवी फु टेज बरामद की है। इनमें से तीन जगहों की फुटेज में छात्रा के नजर आने की बात कही जा रही है।