एक वृद्धा की मौत के बाद भी उसके प्लाट की फर्जी रजिस्ट्री करा दी गई। इसका खुलासा होने पर पानीपत में रहने वाली वृद्धा की बेटी ने सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। इसमें तहसीलदार समेत रजिस्ट्री कराने वाले फर्नीचर व्यापारी, उसकी पत्नी, बेटे व पांच गवाहों को नामजद किया गया। हालांकि मुकदमा दर्ज होने के बाद कई अधिकारियों से जांच कराई गई और अब इंस्पेक्टर की जांच के बाद फर्नीचर व्यापारी को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
पानीपत की देशराज कॉलोनी में रहने वाले विजय कुमार की पत्नी मधु ने सिविल लाइन थाने में कई महीने पहले एक मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें कहा गया था कि उनकी मां विमला निझावन के नाम पर रोहतक में एक प्लाट था। उस प्लाट को विमला निझावन की मौत के एक साल बाद गोहाना अड्डे पर रहने वाले फर्नीचर व्यापारी प्रवीण कुमार ने अपने नाम करा लिया। प्लाट को अपने नाम कराते समय विमला निझावन को जिंदा बताया गया था। वहीं मुकदमे की वादी मधु, उनके पति विजय व बेटे की जगह किसी ओर को तहसील में खड़ा कर दिया गया। इस कारण ही मधु ने तहसीलदार प्रमोद चहल, प्रवीण कुमार, उनकी पत्नी गीता, बेटा मोहित, पांच गवाहों को आरोपी बनाया था। इस प्लाट की कीमत उस समय 19 लाख 35 हजार रुपये बताई गई थी।
मधु के पति विजय कुमार ने बताया कि मामले में तहसीलदार का नाम भी होने के कारण कई बार जांच बदली गई। पहले कई डीएसपी व इंस्पेक्टर से जांच कराई गई। उनके अनुसार सभी ने उनके खिलाफ रिपोर्ट दी। लेकिन डीएसपी बहादुरगढ़ के पास जांच पहुंची तो उन्होंने मामला सही पाया। जिसका दूसरे पक्ष के लोगों ने विरोध किया तो आईजी श्रीकांत जाघव ने जांच एसपी झज्जर को सौंपी। उनकी जांच रिपोर्ट में भी मामला सही पाया गया तो डीएसपी बिजेंद्र ने भी मामला सही पाया। इस तरह कई जांच रिपोर्ट होने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने प्रवीण कुमार को गिरफ्तार किया। इस मामले में अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनको जल्द ही गिरफ्तार करने की बात कही जा रही है। एसएचओ सिविल लाइन रमेश कुमार का कहना है कि धोखाधड़ी के एक मामले में व्यापारी प्रवीण को पकड़ा गया। उनको कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उनको 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।