रोहतक कोर्ट ने दुराचार और दरिंदगी के एक और मामले में सजा-ए-मौत का फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंहल की अदालत ने केक खिलाने के बहाने 3 साल की बच्ची से दुराचार कर हत्या करने के आरोपी नजफगढ़ के पपरावट निवासी संदीप सिंह पुत्र नफे सिंह को फांसी की सजा सुनाई है।
साथ ही आरोपी को वारदात के बाद पनाह देने के मामले में दिल्ली के नरेला निवासी नरेंद्र को भी 4 साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने 61 पेज के फैसले में दोषियों को सभी धाराओं में अलग अलग सजा सुनाई।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार झारखंड स्थित रांची के गांव जालाडुमोर निवासी एक व्यक्ति ने 12 सितंबर 2013 को सिविल लाइन थाने में शिकायत दी थी। पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित ने बताया था कि वह सेक्टर 14 स्थित ऑफिसर कॉलोनी में परिवार सहित रहता है। मेहनत मजदूरी कर गुजारा करता है।
उसकी 3 बेटी और एक बेटा है। 11 सितंबर को परिवार के सभी सदस्यों ने दोपहर का खाना साथ में खाया था। इसके बाद वह और उसकी पत्नी मजदूरी के लिए घर से बाहर चले गए। 3 साल की छोटी बेटी क्वाटरों के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी।
जब पीड़ित शाम को घर पहुंचा तो बेटी लापता मिली। अगले दिन दोपहर 12 बजे बच्ची को तलाशते हुए कृषि विभाग भवन के पास पहुंचे। यहां देखा तो भवन के अंदर उनकी बेटी का शव पड़ा था। पिता ने पुलिस को शिकायत दी थी कि संदीप उनके साथ मजदूरी करता है।
आरोप है कि आरोपी बहला फुसलाकर केक खिलाने के बहाने छोटी बेटी को अपने साथ ले गया। पहले तो संदीप ने बेटी से दुराचार किया और बाद में आरोपी ने उसकी हत्या कर शव को कृषि विभाग के कार्यालय में फेंक दिया। वारदात के बाद आरोपी नरेला निवासी नरेंद्र के घर भाग गया था।
बाद में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या, पोस्को एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तार किया। अदालत ने पूरे मुकदमे की सुनवाई के बाद दोनों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। बड़ी बेटी चंगुल से निकली तो छोटी को बनाया शिकार आरोपी संदीप ने पहले पीड़ित की बड़ी बेटी को हवस का शिकार बनाने का प्रयास किया था। पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि पहले तो आरोपी संदीप ने बड़ी बेटी को 20 रुपये दिये और केक खिलाने के बहाने अपने साथ ले जाने की बात कही। लेकिन बड़ी बेटी ने इनकार कर दिया। इसके बाद वह छोटी बेटी को बहला फुसलाकर ले गया था।
20 गवाहों ने दी गवाही
3 साल की बच्ची से रेप के बाद हत्या के मामले में करीब 20 गवाहों ने गवाही दी। सिविल लाइन थाना प्रभारी सहित कई पुलिस कर्मी भी गवाही में शामिल रहे। पुलिस की बेहतर जांच के कारण आरोपी पक्ष की दलीलें काम न आ सकी। करीब ढाई साल बाद अदालत ने मामले की सुनवाई कर फैसला सुनाया।
किस धारा में कितनी सजा
हत्या- फांसी व 50 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न भरने पर दो महीने की अतिरिक्त कैद। पोस्को एक्ट 6- उम्रकैद व 50 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न भरने पर दो महीने की अतिरिक्त कैद।
बहलाना फुसलाना- 5 साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न भरने पर 15 दिन की अतिरिक्त कैद। अपहरण- 10 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न भरने पर एक माह की अतिरिक्त कैद।
इसी तरह कोर्ट ने नरेंद्र को आईपीसी की धारा 216 अभियुक्त को पनाह देने का दोषी मानते हुए 4 साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर दोषी को 15 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
तीन माह पहले सात को सुनाई थी फांसी की सजा
सीमा सिंहल की अदालत ने दूसरी बार महिला विरुद्घ अपराध के मामले में तीन महीने में दूसरी बार फांसी की सजा सुनाई है। इससे पहले अदालत ने नेपाली युवती गैंगरेप और हत्या के मामले में गद्दी खेड़ी गांव के सातों को सात आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। वहीं, नायब कोर्ट हेड कांस्टेबल बिजेंद्र सिंह ने मामले को बारीकी से देखा। बिजेंद्र सिंह सहित नेपाली गैंगरेप व हत्या से जुड़े अन्य पुलिस कर्मचारियों का नाम पदोन्नति के लिए आईजी कार्यालय में भेजा जा चुका है।