कैंसर विभाग के एसी में स्पार्किंग, रेडियोथैरेपी कक्ष में भरा धुंआ
दमकल विभाग ने तीन घंटे से अधिक समय में पाया नियंत्रण
फोटो सहित एसएनजे चार कैंसर विभाग में आग बुझाने आई दमकल विभाग की टीम
पांच : दमकल विभाग की गाड़ी गेट पर और विभाग के बाहर खड़ा स्टाफ
छह : कमरे से धुंआ निकालने घुसे कर्मचारी की हालत।
सात : सहायक दमकल अधिकारी : संजीव डागर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कैंसर विभाग में शुक्रवार एसी की तारों में स्पार्किंग होने से पल भर में पूरे कक्ष में धुंआ ही धुंआ भर गया। इससे पहले किसी को कुछ समझ आता सभी सेंटर से निकल कर बाहर खडे़ हो गए। धुंए की घनिष्ठता होने के चलते कोई कर्मचारी कक्ष के अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। घटना की सूचना मिलने पर विभाग के अधिकारियों ने दमकल विभाग को घटना की जानकारी दी और दमकल के कर्मचारियों ने तीन से अधिक घंटे में समस्या पर नियंत्रण पाया।
शुक्रवार को क्षेत्रीय कैंसर चिकित्सा केंद्र में सुबह लगभग साढे़ 11 बजे एसी में स्पार्किंग हो गई। इस दौरान मरीजों की कमरा नंबर एक में रेडियोथैरेपी करने के लिए जांच चल रही थी। मरीजों के उपचार वाले स्थान पर स्टाफ निशान लगा रहा था। ऐसी से धुंआ निकलता देख सभी को लगा कि आग लग गई है और लगभग मौके पर 15 मरीजों को बाहर निकाला गया। घटना की जानकारी विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कौशल और अन्य सीनियर डॉक्टरों को दी गई। इन अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर दमकल विभाग को इसकी जानकारी दी। घटना की सूचना पर मौके पर तीन दमकल गाड़िया पहुंची। दमकल कर्मचारियों ने बताया कि मशीन खराब होने के चलते अंदर पानी की बौछार को नहीं करने दिया गया। लेकिन जब उन्होंने अंदर जा कर पता कर लिया कि आग बुझ गई है और अब सिर्फ धुंआ ही निकालना है तो सभी ने राहत की सांस ली। धुंआ की घनिष्ठता इतनी अधिक थी कि जो भी कर्मचारी कक्ष में गया वह काला हो कर निकल रहा था। दमकल विभाग को कक्ष से धुंआ निकालने के लिए स्पेशल पाइप व एग्जास्ट फैन मंगाना पड़ा। इसकी सहायता से कमरे के अंदर भरे धुएं को बाहर निकाला गया। संस्थान ने कर्मचारियों को जहरीले धुंऐ से बचाने के लिए अपने सामान्य मास्क दिए थे। हैरानी तो इस बात की थी कि घटना स्थल पर कोई प्रशासनिक अधिकारी स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचा।
कोबाल्ट कक्ष की संरचना बन गई मुसीबत
रेडियोथैरेपी के लिए बनाए गए कोबाल्ट कक्ष की संरचना इस प्रकार होती है कि रेडिएशन किसी तरह बाहर न आए। इससे मरीजों के अलावा अन्य लोगों को खतरा हो सकता है। यही उपलब्धता धुंआ को निकलने से रोक रहा था और कक्ष में किसी के जाने की हिम्मत नहीं हो पा रही थी। कमरे से धुंआ निकालने में दमकल के कर्मचारियों को लंबा समय लग गया। वहीं सूत्रों की मानें तो विभाग के फायर अलार्म खराब था, क्योंकि सारी घटना होने के बाद तक अलार्म नहीं बजा।
इन कर्मचारियों ने दिखाई हिम्मत
कोबाल्ट कक्ष से धुआं निकालना आसान नहीं था। लेकिन रेस्क्यू आपरेशन टीम में शामिल सहायक दमकल अधिकारी संजीव डागर के नेतृत्व में सुधीर, सत्यवान, कौशल, संतराम, पवन, हरिकेश, महिपाल और आशीष ने धुएं को बाहर निकाला।
बोले अधिकारी
जैसे ही दमकल को सूचना मिली तो एक्सपर्ट टीम के साथ तीन गाड़ियों को भेज दिया गया। मशीनरी में कोई नुकसान न हो, इस पर ध्यान रखते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया गया है। घटना से हुए नुकसान का आंकलन विभाग की ओर से लगाया जाएगा। इसमें किसी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
- संजीव डागर, सहायक दमकल अधिकारी, रोहतक