फ्लैग: आरटीए द्वारा राजस्थान की ट्रांसपोर्ट कंपनी के ट्राले जब्त करने का मामला
हेडिंग : आरटीए ने की सेशन कोर्ट में अपील, कोर्ट ने मांगा ट्रांसपोर्ट कंपनी से 21 अगस्त तक जवाब
: 15 जून को आरटीए ने जब्त किए थे 6 ओवरलोडेड ट्राले, निचली अदालत के आदेश पर किए गए 50 प्रतिशत जुर्माना भरने पर रिहा
: अदालत में पेश न होने पर कोर्ट ने जारी कर दिए थे आरटीए के गिरफ्तारी वारंट, बाद में रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। आरटीए द्वारा राजस्थान की ट्रांसपोर्ट कंपनी के ओवरलोडेड ट्राले जब्त करने के मामले की मंगलवार को सेशन कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने ट्रांसपोर्ट कंपनी से 21 अगस्त तक ट्रालों के कागजात के संबंध में जवाब मांगा है। कंपनी के लीगल एडवाइजर योगेश शर्मा का कहना है कि अब उनको नोटिस नहीं मिले हैं। नोटिस मिलते ही जवाब दे दिया जाएगा।
15 जून को आरटीए रोहतक की टीम ने अलग-अलग स्थानों से राजस्थान के अजमेर की ट्रांसपोर्ट कंपनी के छह ट्राले जब्त किए थे। आरोप है कि ट्रालों में ओवरलोडड सीमेंट भरी थी। आरटीए की कार्रवाई के विरोध में कंपनी ने जेएमआईसी भरत सिंह की अदालत में याचिका दायर की थी, जो उस समय ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी थे। अदालत ने आरटीए को 50 प्रतिशत जुर्माना राशि भरवाकर ट्राले छोड़ने के आदेश दिए, लेकिन समय पर ट्राले न छोड़ने और अदालत में पेश न होने के कारण कोर्ट ने आरटीए के गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए। 29 जून को आरटीए सचिव ओमप्रकाश मोर अदालत में पेश हुए और कोर्ट को बताया कि पांच ट्राले पुलिस ने छोड़ दिए हैं, जबकि एक को आरटीए ने छोड़ दिया है। इसके बाद कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट वापस ले लिए।