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एफआईआर दर एफआईआर होती रही दर्ज, गिरफ्तारी नहीं हुई ‘साहब’

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हुडा के एक से ज्यादा आरक्षित प्लाट हड़पने का मामला
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पहले कोर्ट के आदेश पर एफआईआर, अब हुडा ने दिया गिरफ्तारी पर स्टे का मौका

- स्थानीय हुडा प्रशासन अब गेंद को डाल रहा चंडीगढ़ मुख्यालय के पाले में
- हुडा के एक से ज्यादा आरक्षित प्लाट हड़पने के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी पर स्टे
- पुलिस केवल जांच में शामिल कर सकती है आरोपी उनकी गिरफ्तारी नहीं

शनि शर्मा
रोहतक।

एफआईआर दर एफआईआर दर्ज होती रही मगर कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। जी हां यह हालत है फर्जीवाड़ा करके हुडा के एक से ज्यादा आरक्षित प्लॉट हड़पने के मामले की।
पहले तो हुडा प्रशासन ने झूठे शपथपत्र के माध्यम से आंख मूंदकर आरक्षित श्रेणी के एक से ज्यादा प्लॉट आवेदकोें को दे दिये। जब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने खुद ही संज्ञान लेकर मामले की विभागीय जांच करवाई और फर्जीवाड़ा करके प्लॉट हड़पने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिये, तो हुडा प्रशासन के ढुलमुल रवैये और कोर्ट में सही तरह से अपना पक्ष नहीं रखने के कारण एक आरोपी ने मामले में गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया है। इसी वजह से पुलिस इन मामलों में आज तक एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
दूसरी तरफ खुद की नाकामी छिपाने के लिए स्थानीय हुडा प्रशासन ने गेंद चंडीगढ़ मुख्यालय के पाले में फेंक दी है। जबकि विभागीय जांच के दौरान आरक्षित प्लॉट हड़पने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस मामले में तीन दिन पहले भी अर्बन एस्टेट थाने में एक केस दर्ज किया गया है।
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क्या है मामला :-
दरअसल हुडा विभाग में विशेष सरकारी विभाग के अधिकारियों को आरक्षित श्रेणी में प्रदेश में एक ही प्लॉट आवंटित करने की योजना है। प्लॉट लेने से पहले संबंधित अधिकारी को अपनी नौकरी सहित अन्य दस्तावेज विभाग में जमा करवाने होते हैं। करीब पांच साल पहले विभाग को प्रदेशभर से शिकायत मिली थी कि कई अधिकारियों ने प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करके आरक्षित श्रेणी के एक से ज्यादा प्लॉट ले रखे हैं। इसके बाद पूरे प्रदेश में हुडा के अधिकारियों ने विभागीय जांच की तो खुलासा हुआ कि कई अधिकारियों के पास प्रदेश में रिजर्व कैटेगरी से जुड़े एक से ज्यादा प्लॉट है। विभाग ने अपनी जांच पूरी करने के बाद संबंधित थाने में आरोपियों के खिलाफ शिकायत दी। फिर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज होने का सिलसिला शुरू हुआ था।

जिले में 117 एफआईआर दर्ज
यदि रोहतक जिले की बात करे तो ऐसे मामलों में अर्बन एस्टेट थाने में अभी तक 117 एफआईआर दर्ज हो चुकी है। एफआईआर दर्ज होने का सिलसिला दो साल से जारी है। पुलिस ने एफ आईआर तो दर्ज कर ली लेकिन गिरफ्तारी का ग्राफ आज तक जीरो है। गिरफ्तारी के संबंध जब भी पुलिस अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने जांच करने का बहाना बनाकर टालमटोल जवाब दिया। हैरत की बात यह है कि हुडा विभाग भी केस दर्ज करवाने के बाद टालमटोल रवैया अपनाया। विभाग ने भी केस दर्ज करवाने के बाद पुलिस से गिरफ्तारी के संबंध में बात करने की जहमत नहीं उठाई।

अधिकतर आरोपी सेना और अन्य विभाग के उच्च अधिकारी
यदि पूरे मामले पर गौर करें तो इस मामले में जिन लोगों पर केस दर्ज किया गया है उनमें अधिकतर सेना या अन्य विभाग के उच्च अधिकारी शामिल हैं। गिरफ्तारी नहीं होने का एक कारण इसे भी माना जा रहा है। नामजद आरोपियोें में कर्नल, मेजर, शिक्षक सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। इनमें से कुछ अधिकारी रिटायर हो चुके हैं जबकि कुछ सेवा में है। आरोपियों ने बड़े शातिर तरीके से आरक्षित श्रेणी का दूसरा प्लॉट लिया। आरोपियों ने पहले सही दस्तावेज के माध्यम से प्लॉट लिया। फिर संबंधित जिले को छोड़कर दूसरे जिले में झूठा शपथपत्र देकर प्लॉट हड़पा।

पुलिस ने मात्र बीस लोगों को किया जांच में शामिल
धोखाधड़ी के मामले में जिले में 117 लोगों को नामजद करने के बाद पुलिस मात्र बीस लोगों को ही जांच में शामिल कर चुकी है। इन लोगों को थाने में बुलाकर बयान दर्ज किये गये है। दर्ज की गई एफआईआर में रोहतक सहित हिसार, कुरुक्षेत्र, गुरुग्राम, जींद व यमुनानगर सहित अन्य जिलों के आरोपी नामजद किये गये हैं। पुलिस ने मामले में सेवानिवृत्त मेजर राजपूत कादयान, सोनीपत सेक्टर 14 निवासी प्रेम सिंह, मॉडल टाउन निवासी भूपेंद्र सिंह, अस्थल बोहर निवासी चंद्रभान नेहरा, विकास हुड्डा, कुरुक्षेत्र की आदर्श गली में रहने वाले जितेंद्र सिंह, पीयूष गोयल, सोनीपत खरखौदा निवासी प्रताप सिंह, सोनीपत प्रीत विहार कॉलोनी निवासी बलबीर सहित अन्य लोगों को नामजद किया था।

2013 में हाईकोर्ट ने दिये थे जांच के आदेश
विभागीय स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद विभाग ने सभी संदिग्धों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में वर्ष 2013 में एक याचिका दायर की गई थी। इसके बाद अदालत ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिये थे। जांच में सामने आया था कि आरोपियों ने गलत प्रमाण पत्र देकर प्लॉट आवंटन कराया है। तीन दिन पहले ऐसे ही मामले में पुलिस ने भिवानी के गांव मंढौली कलां निवासी रविंद्र सिंह पर केस दर्ज किया था। जांच में पता चला है कि उसने रिजर्व कैटेगरी में रोहतक के सेक्टर 6 में 21 मई 2012 को प्लॉट मिला था। जब विभाग ने जांच की तो सामने आया कि रविंद ने गुरुग्राम पटौदी के सेक्टर एक में 10 मार्च 2011 को ही आरक्षित श्रेणी का प्लॉट लिया था। आरोपी ने गलत प्रमाण पत्र देकर दूसरी जगह आरक्षित श्रेणी का प्लॉट खरीदा।

हाईकोर्ट में स्टे, इसलिए नहीं हुई गिरफ्तारी - एसएचओ
अर्बन एस्टेट थाना प्रभारी एसआई देवेंद्र ने बताया कि फिलहाल इन मामलों की सुनवाई पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में स्टे लगा हुआ है। रेवाड़ी के एक आरोपी ने स्टे ले रखा है। इस कारण आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जा रही है। अभी तक आरोपियों को केवल जांच में शामिल करने की अनुमति है।
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पूरा मामला हाईक ोर्ट में, मुख्यालय से की गई थी पैरवी - हुडा प्रशासक
मामले में हुडा प्रशासक वीरेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि फिलहाल पूरा मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। पूरे मामले को चंडीगढ़ मुख्यालय से देखा जा रहा है। मुख्यालय से ही हाईकोर्ट में पैरवी की जा रही है। इस कारण मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही अतिरिक्त प्लॉट का आवंटन रद्द होगा।
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