फ्लैग : कलानौर खंड की नाबालिग के अपहरण व उत्पीड़न का मामला
हेडिंग: जाट आरक्षण आंदोलन के चलते पुलिस व्यस्त, दोषी की टली एक दिन के लिए सजा
: ककराना के युवक मोनू को किया था अदालत ने दोषी करार
: बुधवार को सुनाई जानी थी सजा, पुलिस नही कर सकी दोषी को कोर्ट में पेश
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। दो दिन पहले फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा नाबालिग के अपहरण व उत्पीड़न के मामले में ककराना गांव निवासी मोनू को दोषी करार दिया गया था। उसे बुधवार को सजा सुनाई जानी थी, लेकिन जाट आरक्षण आंदोलन के चलते व्यस्त होने के कारण पुलिस ककराना निवासी मोनू को अदालत में पेश नहीं कर सकी। इसके चलते अदालत ने सजा पर फैसला एक दिन के लिए टाल दिया। अब गुरुवार को अदालत सजा सुनाएगी।
मामले के अनुसार 2015 में एक व्यक्ति ने कलानौर थाने में शिकायत दी कि उसका बेटा बाहर गया हुआ था। पीछे से उसकी 17 वर्षीय पोत्री अचानक लापता हो गई। बाद में पता चला कि ककराना गांव का मोनू उसे बहला-फुसला कर ले गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लड़की को बरामद कर लिया। उसके अदालत में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए गए। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक पीड़ित ने कहा कि आरोपी लंबे समय से उसका शोषण कर रहा था, लेकिन आरोपी की बहन ने उसे धमकी दी कि अगर उसके भाई के खिलाफ बयान दर्ज कराए तो कहीं का नहीं छोड़ेंगे। डर के कारण वह सही बयान नहीं दे सकी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक व उसकी बहन को गिरफ्तार कर लिया। तभी से जिला अदालत में मामले की सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने सोमवार को मोनू को दोषी करार दिया, जबकि उसकी बहन को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था।