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तीसरी आंख कमजोर
सीसीटीवी कैमरे लगाने के नाम पर कहीं गोलमाल तो नहीं
- 30 की स्पीड से चलने वाले वाहनों की नंबर प्लेट ही पढ़ पाते हैं कैमरे
- ढाई करोड़ से अधिक में लगवाए गए थे सीसीटीवी कैमरे
- निगम के अधिकारियों का दावा- विभाग ने नहीं किया कोई भी गोलमाल
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। शहर के विभिन्न स्थानों पर लगवाए गए सीसीटीवी कैमरों के नाम पर कहीं गोलमाल तो नहंी किया गया है। ढाई करोड़ से अधिक के कै मरे लगाए गए हैं। जबकि 30 हजार तक में बहुत ही अच्छे कैमरे शहर में लगवाए जा सकते थे। जो आसानी से वाहनों की नंबर प्लेट भी पढ़ सकते थे। मामले की जांच कराने की मांग व्यापारियों ने की है।
शहर की सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करने के लिए नगर निगम ने 23 स्थानों पर ढाई करोड़ से अधिक की लागत के 90 सीसीटीवी लगवाए थे। इसका कंट्रोल रूम एसपी कार्यालय के अंदर बनाया गया था। जहां से पूरे शहर की निगरानी की जाती है। मगर लगाए गए सीसीटीवी वारदातों के खुलासे में भी कारगर साबित नहीं हो रहे है। व्यापारियों का आरोप था कि वारदात के समय जहां आरोपी कैद इन सीसीटीवी कैमरों में होने के बाद भी पुलिस उन्हें नहीं पकड़ पाती है वहीं वाहनों की नंबर प्लेट तो कैमरे पढ़ ही नहीं पाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम ने मूव करने वाले जो 15 कैमरे विभिन्न स्थानों पर लगाए हैं, उनमें एक कैमरे की कीमत करीब एक लाख 83 हजार दशाई है। जबकि अन्य 75 कै मरों में एक कैमरे की कीमत करीब 69 हजार दर्शाई है। शहर के व्यापारी की ओर से लगाई आरटीआई के तहत उपलब्ध कराई गई सूचना में भी उक्त जानकारी नगर निगम ने दी थी। जबकि सीसीटीवी कैमरे लगाने वाले एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अच्छी क्वालिटी का एक मूवेबल कैमरा 30 से 35 हजार जबकि अन्य कैमरे मात्र 15 से 20 हजार में भी लगाए जा सकते हैं। जिन पर वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ना भी आसान होता है। आशंका जताई जा रही है कि सीसीटीवी लगाने के नाम पर शहर में गोलमाल किया गया है। हालांकि यह विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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सीसीटीवी के नाम पर गोलमाल की भी आशंका है। मामले की शिकायत विभागीय उच्चाधिकारियों से की जाएगी। - हेमंत बख्शी, प्रदेश अध्यक्ष हरियाणा पंजाबी स्वाभिमान ट्रस्ट
टेंडर छोड़ने के बाद ही शहर के विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी लगवाए गए थे। कैमरे भी बढ़िया कंपनी के लगवाए गए है। कैमरे लगवाने में कोई गोलमाल नहीं किया गया है
-केके वार्ष्णेय, डीटीपी नगर निगम
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बारिश आते ही आ जाती है खराबी
व्यापारियों का कहना है कि वैसे तो कुछ सीसीटीवी आए दिन खराब पड़े रहते है। मगर अगर जरा सी बारिश आ जाती है तो तुरंत ही कैमरे काम करना बंद कर देते है। कई बार यह स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। मामले की शिकायत के बावजूद विभागीय अधिकारी कोई ध्यान नहीं देेते है।
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30 की स्पीड से चलने वाले वाहनों की नंबर प्लेट ही पढ़ पाते है कैमरे
आरटीआई कार्यकर्ता को उपलब्ध कर्राइ गई सूचना में नगर निगम के अधिकारियों ने कहा है कि 30 की स्पीड से चलने वाले वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़ने मे ंही उक्त कैमरे कामयाब है। यदि 30 से ऊपर की स्पीड होती है तो वाहनों की नंबर प्लेट को कैच नहीं कर पाते है।