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पीजीआईएमएस में दर्द की दवा न ताकत की

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फोटो : एक से पांच
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: अमर उजाला लाइव रिपोर्ट :
पीजीआईएमएस में दर्द की दवा न ताकत की
-पीसीएम को तरसे बुखार के मरीज, गर्भवतियों को आयरन व फोलिक एसिड का इंतजार
-दवा के इंतजार में दिल और सांस के मरीजों की अटकीं सांसें
-संस्थान में चार साल से नहीं है बीकॉम्प्लेक्स, अब मल्टीविटामिन भी खत्म
विकास सैनी
रोहतक। सर्दी में सुबह आठ बजे घर से चली थी। दोपहर का एक बज गया है। दर्द से जान निकली जा रही है। कमर से नीचे का सारा हिस्सा दुख रहा है। पैर तो सुन्न पड़ा है। इलाज के लिए पीजीआई आई हूं। डॉक्टर ने तो कार्ड पर दवा लिख दी। डिस्पेंसरी में दवा ही नहीं है। कैलशियम की कमी बताई है। कमजोरी के लिए भी दवा लेने को कहा है। अब बाजार से दवा लेनी पड़ेगी। न जाने कितने की आएगी। राहत के लिए सोनीपत से किराया खर्च करके आई। फायदा कुछ नहीं मिला। यह कहानी है वीरवार को प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र पीजीआईएमएस में इलाज के लिए पहुंची भैंसवाल की 55 वर्षीय रित देवी की। यह अकेली नहीं हैं, जिन्हें यहां आने के बाद भी राहत नहीं मिली। ऐसे और भी लोग हैं। जिन्हें पीजीआई में न दर्द की दवा मिल रही है और न ताकत की। आईए पीजीआई के हालात को दर्शाती अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट से आपको भी अवगत कराएं।

बुखार की सामान्य दवा पैरासीटामोल भी नहीं
पीजीआईएमएस में कुछ दिनों से बुखार की सामान्य दवा पीसीएम (पैरासीटामोल) नहीं है। ओपीडी में रोजाना औसतन बुखार के 500 मरीज आ रहे हैं। इन्हें पीसीएम लेने की सलाह दी जाती है। नई जिंदगी को जन्म देने वाली गर्भवतियों को आयरन व फोलिक एसिड दवा का इंतजार है। संस्थान के स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग की ओपीडी में रोजाना औसतन 550 महिलाएं आती हैं। इनमें से 90 प्रतिशत को इन दवाओं की जरूरत पड़ती है। इसकी वजह इनका एनिमिक होना है।
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दवा के इंतजार में दिल और सांस के मरीजों की अटकीं सांसें
मौसम में ठंड बढ़ने के साथ ही दिल और सांस के मरीजों की सांसें अटकने लगी हैं। ऐसे मरीजों की संख्या भी सौ से कम नहीं है। इन्हें खून में कोलेस्ट्रोल कम करने व खून पतला करने की दवा नहीं मिल रही हैं। ऐसे में दिल व सांस के मरीज रिस्क पर हैं।

संस्थान में चार साल से नहीं है बीकॉम्प्लेक्स
पीजीआई में मुख्य स्टोर में बीकॉम्प्लेक्स दवा नहीं है। यह दवा पिछले चार साल से खत्म है। अब मल्टीविटामिन भी खत्म हो गई है। अब तक किसी तरह इसी से काम चलाया जा रहा था। शुगर व अन्य रोगों से आहत मरीजों का भी यही हाल है।

2 करोड़ देने के बावजूद एचएमएससीएल नहीं कर पा रही दवाओं की खरीद
सरकार ने प्रदेश के अस्पतालों में दवा खरीदने के लिए आईएएस अधिकारियों की एक कमेटी गठित की थी। इसे एचएमएससीएल (हरियाणा मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन लिमिटेड) नाम दिया गया। इस कमेटी को दवा खरीद से पहले भुगतान करना होता है। इसके चलते पीजीआई की ओर से करीब दो साल पहले दो करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके बावजूद संस्थान में दवा का टोटा बना हुआ है।

केस 1 :
गले में गांठ है। कई दिनों से परेशान हूं। इसलिए इलाज के पीजीआई आया। यहां बड़े डॉक्टर मिलते हैं। डॉक्टर ने दो तरह की दवा लिखी है। ओपीडी की डिस्पेंसरी में एक भी नहीं है। ये दोनों दवाएं दर्द की हैं। अब बाहर जा रहा हूं। मेडिकल स्टोर से खरीदूंगा। इलाज तो कराना है।
-दयानंद, भिवानी

केस 2 :
हाथ में कई दिनों से दर्द है। पीजीआई की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया है। डॉक्टर ने दवा लेने को कहा। हाथ पर लगाने की एक जेल लिखी है और खाने की दवा है। डिस्पेंसरी में आई तो दवा नहीं होने की बात कही। अब बाजार से दवा खरीदनी पड़ेगी।
-अनीता, झज्जर चुंगी, रोहतक

केस 3 :
कमर से नीचे शरीर में दर्द है। डॉक्टर ने दवा लेने के लिए कहा है। कार्ड में चार तरह की दवाएं हैं। मिली एक भी नहीं। इसमें से एक दवा दर्द की व एक गैस की है। दर्द को जेल और विटामिन डी की भी दवा लिखी है। सब बाजार से खरीदनी होगी।
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-दीपक, सिवाह

वर्जन :
दवाओं की कुछ कमी है। पहले खरीद एचएमएससीएल कर रही थी। अब संस्थान खुद दवा खरीदेगा। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। जल्दी ही दवाओं की कमी दूर हो जाएगी। संस्थान में जेनरिक दवाओं का स्टोर खोला गया है। जल्दी ही एक ओर स्टोर शुरू किया जाएगा।
-डॉ. ओपी कालरा, वीसी, हेल्थ यूनिवर्सिटी
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