अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर दूर बावल विधानसभा का सबसे बड़ा गांव भाड़ावास। अगर आप थोड़ा-बहुत बीमार हैं और गांव में बने पीएचसी से इलाज करवाना चाहते हैं तो अपना इरादा बदल दीजिए। बेहतर होगा कि आप यहां आने की बजाय शहर में इलाज के लिए दौड़ लगाएं। पीएचसी के सामने सालों से गंदे पानी के भरने की समस्या के कारण यहां ऐसा लगता है कि लोग यहां ठीक होने की बजाय और बीमार हो सकते हैं। सबसे बड़ी सावधानी तो यह है कि यहां तक पहुंचने में आपकी हड्डियां तक टूट सकती है। अगर यकीन न हो तो यहां कभी आकर देख लीजिए या फिर इन तस्वीरों से ही वहां उपजे हालात का अंदाजा लगा सकते हैं। आपको जानकार यह भी जरूर अचंभा होगा कि यह समस्या एक दो दिन से नहीं बल्कि पिछले काफी समय से है। सरपंच से लेकर मंत्री तक गुहार लगाई जा चुकी है फिर भी समस्या ज्यों की त्यों हैं। आपको बता दें कि यह गांव प्रदेश के जन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बनवारीलाल के विधानसभा हलके में पड़ता है।
गांव का है मुख्य रास्ता
पीएचसी के साथ इस स्थान पर गांव का बैंक भी है। इतना ही नहीं गांव का मुख्य रास्ता भी यही है। बावजूद इसके हालात दयनीय है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों ओर गंदा पानी भरा होने के कारण यहां पर आए दिन महिलाएं एवं अन्य लोग घायल होते रहते हैं। अस्पताल में पहुंचने से पहले लोगों को कई बार सोचना पड़ता है। कुछ लोग तो गांव की बजाय रेवाड़ी से दवाई लेने जाना पड़ता है। इतना ही नहीं पास में ही स्थित जोहड़ से गंदे पानी की निकासी नहीं होने से बीमारियां होने का खतरा बना हुआ है। गंदे पानी से आसपास के लोगों में मच्छरों से होने वाली संक्रमित बीमारियों के होने का भी खतरा बना हुआ है।
जब कभी कोई स्वास्थ्य केंद्र जाने की कोशिश करता वह दोगुना बीमार होकर वापस आता है। दोनों रास्तों पर गंदा पानी भरा होने के कारण अस्पताल तक पहुंचने वाला हादसे का शिकार हो जाता है। वहीं गंदे पानी के चलते मच्छर पैदा होने से भी बीमारियां होने का खतरा बना हुआ है। कई बार अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। -रोशनलाल यादव, ब्लॉक समिति सदस्य, भाड़ावास
गांव की मेन रोड पर दोनों ओर गंदा पानी भरा होने के कारण यहां पर पैदल एवं वाहन से निकले वाले लोग घायल होते रहते हैं। इसी रास्ते पर स्वास्थ्य केंद्र हैं और बैंक भी। मजबूरी में दोनों जगहों पर जाना पड़ता हैं, लेकिन फायदे की बजाय परेशानी के साथ लौटना पड़ता है। यदि कोई अधिकारी यहां आकर देखे कि जमीनी हकीकत क्या हैं, तभी जाकर इस समस्या का समाधान हो सकता है।
-भूपेंद्र, ग्रामीण
एक ओर सरकार स्वच्छता अभियान चला रही है। प्रचार-प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर करने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन यहां पर सब इसके उल्ट है। स्वच्छता अभियान के नाम पर चारों ओर गंदगी पसरी हुई है। स्वास्थ्य केंद्र में जाने के लिए हालात से लड़ना पड़ता है। रही सही कसर इस गंदगी में गिरकर पूरी हो जाती है। -सतबीर सिंह, निवासी भाड़ावास
केंद्र हो या प्रदेश या फिर गांव यहां पर नेता आकर भाषण देकर चले जाते हैं। बातें बड़ी-बड़ी करते हैं। लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता है। यह काम सरपंच लेवल पर भी हो सकता है, लेकिन किसी कोई सुध लेने वाला नहीं है। यदि गांव के मुख्य रास्तों के हालात ऐसे है तो बाकी जगहों के हालात आसानी से समझे जा सकते हैं। -विजय, भाड़वास
यह समस्या मेरे संज्ञान में है। इसे शीघ्र ही दूर कराया जाएगा। ग्रामीणों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। -डॉ. बनवारीलाल, जन स्वास्थ्य राज्यमंत्री