अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पार्टी मनाने निकले पांच दोस्तों में से तीन का शव 66 घंटे बाद सांपला लाया गया। अपने लाल का शव देख मां और बाप की चीख पुकार सुनकर हर किसी का दिल दहल उठा। यह सांपला का दुर्भाग्य ही था जब पहली बार एक साथ एक कुनबे के तीन बेटों की चिताओं को मुखाग्नि दी गई।
रोहट नहर का पानी कम होने के बाद मंगलवार सुबह नौ बजे तीनों हितेश उर्फ हन्नी, रोहित और सौरभ के शव मिले। मृतकों के कुछ परिजन सुबह से ही घटनास्थल पर पहुंच गये थे। जैसे ही युवकों के शव मिलने की सूचना सांपला में परिजनों और बाजार में रहने वाले अन्य लोगों के पास पहुंची तो मुख्य बाजार में सांत्वना देने वालों की भीड़ इकट्ठा होना शुरू हो गई। क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं सहित अन्य लोग घरों से बाहर निकलकर मुख्य बाजार रोड पर आ गये। कुछ ही देर में हजारों की संख्या में भीड़ इकट्ठा हो गई। सोनीपत में पोस्टमार्टम होने के बाद दोपहर करीब दो बजे जैसे ही तीनों के शव एंबुलेंस में सांपला बाजार में पहुंचे तो परिजन बिलखते हुए दौड़ पड़े। चीख पुकार के बीच लोगों की मदद से तीनों दोस्तों के शवों को उनके घर लाया गया।
पूर्व सीएम, सांसद और सहकारिता मंत्री भी पहुंचे सांत्वना देने
युवकों के शव सांपला आने की सूचना मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा के साथ, पूर्व विधायक बीबी बतरा, प्रो. विरेंद्र सिंह पीड़ितों के घर सांत्वना देने पहुंचे। दोनों नेता तीनों मृतकों के घर गये। इसके बाद वह युवकों की अंतिम यात्रा में भी शामिल हुए। कुछ ही देर बाद सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर और इनेलो जिलाध्यक्ष सतीश नांदल भी श्रद्धांजलि देने श्मशान घाट पहुंचे।
बेटे का शव पहुंचते ही सीए हितेश की मां हुई बेसुध
शव के घर पहुंचते ही हितेश की माता जनक बेहोश हो गई। तीनों घरों में परिजन बिलखने लगे। शव को दस मिनट तक अंतिम दर्शन के लिए घर में रखा गया। इसके बाद तीनों को श्मशान घाट ले गए। श्मशान घाट की तरफ ले जाते समय महिला परिजन भी पीछे-पीछे चल पड़ी। वहां की अन्य महिलाओं ने उन्हें सहारा देकर वापस लाईं। बाजार के चार युवकों की मौत के शोक में सांपला का मुख्य बाजार हादसे के तीसरे दिन भी बंद रहा। पांचों युवकों का घर सांपला के मुख्य बाजार में है।
अपने सपने भी पूरे नहीं कर पाया मेरा बेटा: जनक
सौरभ और हितेश की माता दोनों के शव से लिपटकर कर रोती रहीं। हितेश की मां रोते हुए बार-बार कह रहीं थी कि उनका बेटा अपने सपने भी पूरे नहीं कर सका। अभी तो उसने सीए की परीक्षा पास की थी। उसे जिंदगी में बहुत कुछ करना था।