6 दिन, 20 हादसे, 7 मौत
सड़क सुरक्षा के हालात बदतर
शनि शर्मा
रोहतक।
जिले भर में पिछले छह दिनों में होने वाले तीस सड़क हादसों में सात लोगों की मौत हो चुकी है और छत्तीस लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। सड़क सुरक्षा को लेकर हालात बद से बदतर है।
6 दिन में रोडवेज की पांच बसें दुर्घटनाग्रस्त
हालत यह है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली रोडवेज की अधिकतर बसों में न तो रिफ्लेक्टर लगा है और न ही फॉग लाइट। इसी कारण स्मॉग और घने कोहरे में बसें हादसों का शिकार हो रही है। यदि आंकड़ों की बात करें तो छह दिनों में रोहतक डिपो की पांच बस सड़क हादसों का शिकार हो चुकी है। हादसों में कई चालक सहित कई सवारियों को भी चोट आई है। इन दुर्घटनाओं के बावजूद बसों में अभी तक फॉग लाइट और रिफ्लेक्टर की व्यवस्था नहीं की गई है।
मुख्य मार्गों से गायब पुलिस, जिलेभर में मात्र एक इंटरसेप्टर
ऐसे ही हालात पुलिस विभाग के है। शहर की चारों सीमाओं पर पुलिस नाके लगाए गये है, मगर प्रमुख नेशनल हाइवे से पुलिस गायब नजर आती है। यदि एक दो जगह को छोड़ दिया जाए तो शहर के आसपास के किसी भी नेशनल मार्ग पर पुलिस का स्थाई नाका नहीं है। इतना ही नहीं पुलिस के पास जिले भर में ओवर स्पीड से दौड़ने वाले वाहनों पर लगाम लगाने के लिए मात्र एक इंटरसेप्टर है। इसी के भरोसे जिले भर में हाईवे पर दौड़ने वाहनों की गति मापी जा रही है।
पुलिस भरोसे सड़क सुरक्षा, आरटीए विभाग नींद में
जिला प्रशासन ने सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पुलिस के भरोसे छोड़ रखा है। जबकि इसमें सबसे ज्यादा जिम्मेदारी आरटीए विभाग की बनती है। मगर लगातार हादसों के बाद भी आरटीए की नींद नहीं टूटी है। स्मॉग के कारण शून्य दृश्यता होने के बावजूद विभाग की तरफ से यातायात सुचारु करने को लेकर कोई अभियान नहीं चलाया गया है। जबकि स्मॉग व घना कोहरा होने के तुरंत बाद विभाग की तरफ से सड़कों पर विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाता है। इसके तहत मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इतना ही नहीं जिला प्रशासन ने हाइवे के आसपास स्वास्थ्य सेवा व क्रेन का इंतजाम भी नहीं किया है। ताकि रात को हादसा होने पर दुर्घटनाग्रस्त वाहन को सड़क से हटाया जा सके।
एंबुलेंस की संख्या कम, उपचार के अभाव में दम तोड़ती जिंदगी
सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में इजाफा होने का एक कारण समय पर स्वास्थ्य सेवा का नहीं मिलना भी है। हादसा होने के बाद समय पर एंबुलेंस के मौके पर नहीं पहुंचने और उपचार नहीं मिलने के कारण घायल दम तोड़ देता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की मानें तो एक समय में कई सड़क दुर्घटना होने पर एंबुलेंस की संख्या कम पड़ जाती है। जब तक एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंचती है तो घायल दम तोड़ देता है। फिलहाल सिविल अस्पताल में मात्र 13 एंबुलेंस है। इनमें से एंबुलेंस 8 नवंबर को महम के पास रजवाहे में गिर गई थी। इसमें चालक को चोट आई थी और एंबुलेंस क्षतिग्रस्त हो गई थी। नियमों के अनुसार हादसा होने पर प्राथमिक तौर पर सिविल अस्पताल की एंबुलेंस को ही मौके पर भेजा जाता है। जरूरत पड़ने पर वह निजी अस्पतालों की एंबुलेंस का भी प्रयोग कर लेते हैं।
यह है लगातार हो रहे हादसों की वजह
- ओवर स्पीड
- वाहनों पर रिफ्लेक्टर व फॉग लाइट का न होना
- रात को सड़क पर वाहन खड़ा करते समय इंटीकेटर न चालू करना
- स्मॉग के कारण शून्य दृश्यता
- सड़क के गलत साइड चलना
पिछले दिनों हादसों में जान गंवाने वाले लोग
- गांव पटवापुर निवासी 60 वर्षीय जयभगवान की बाइक की बाइक डोभ बाईपास स्थित पेट्रोल पंप के पास सड़क के बीच में एक ट्रक से टकरा गई थी। हादसे में उनकी मौत हो गई थी जबकि उनका बेटा घायल हो गया था। वह अपने बेटे की शादी के कार्ड बांटने जा रहे थे।
- जींद रोड समरगोपाल पुर मोड़ पर एक कार ने पैदल चल रहे जींद के पौली गांव निवासी 28 वर्षीय अनिल को कुंचल दिया था। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
- काहनौर-बेरी मार्ग पर गांव मसूदपुर के पास अज्ञात वाहन की टक्कर लगने से बाइक सवार भिवानी के गांव खरक कला निवासी मनोज की मौत हो गई थी। उनकी पत्नी व बेटा घायल हो गये थे।
-गोहाना रोड स्थित दलाल भवन के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से यूपी के जिले लखीमपुर खिरी स्थित पसगांव निवासी आठ साल के बच्चे अभिजीत की मौत हो गई थी।
- सांपला स्थित चौधरी ढाबे के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से झज्जर के गांव सुबाना निवासी 31 वर्षीय अजीत की मौत हो गई थी।
- शुक्रवार तड़के जसिया के पास सड़क के बीच में खड़े दुर्घटनाग्रस्त कैंटर में भिड़ंत होने से चालक नरेंद्र और सवारी पूजा की मौत हो गई थी।
इन जगहों पर हुई दुर्घटना, यह है घायल
पिछले दिनों स्मॉग के कारण रोहतक हिसार मार्ग स्थित गांव बहुअकबरपुर के पास, गोहाना रोड, गांव करौंथा, घिलौड़ कला, दिल्ली से हिसार मार्ग, गांव मोखरा, दिल्ली रोड खरावड़ बाइपास, गांव लाहली के पास बंसीलाल स्टेडियम, कलानौर बाइपास, दिल्ली गोहाना आउटर नेशनल हाइवे और जसिया बाइपास रेलवे पुल पर हादसे हुए। हादसों में अनिल, सुशील, प्रवीण, बीरमति, बाला, कांता, दीपक, कमलेश, प्रोमिला, नरेश, जितेंद्र, संगीता, विनोद, शीला, सुनील, महिला कमलेश, कंचन, सुषमा, कुनाल, पंकज, जोगिंद्र, वीरेंद्र, भूरापाल, दीपक, हरिशंकर, परमिंदर, नियामत, अंजू, निधि, तमन्ना, कलावती, सोमबीर, अजीत सहित अन्य लोग घायल हो गये। इनमें से कुछ उपचाराधीन है और अन्य को छुट्टी मिल गई।
क्या कहते है जिम्मेदार अधिकारी
हादसों को देखते हुए जिले भर में गहन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान काटे जाएंगे। दुर्घटना का कारण बनने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई की जाएगी।
- एडीसी अजय कुमार, कार्यवाहक आरटीए रोहतक
रोडवेज सरकारी बसों में रिफ्लेक्टर और पीली लाइट की व्यवस्था करने के साथ वाइपर तक सही करा दिए गए हैं। यात्रियों को सर्दी से बचाया जा सके, इसके लिए विंड स्क्रीन तक सही करा दी गई है। सड़क किनारे वाहन चालक बगैर पार्किंग लाइट के वाहन खड़ा करते हैं, इसके चलते सड़क हादसा होना सामान्य घटना हो गया है।
- राहुल जैन, महाप्रबंधक रोहतक डिपो