अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। शिक्षा, राजनीति व अन्य कारणों से रोहतक में काम करना चुनौतीपूर्ण है। मेरा प्रयास जनता को साफ-सुथरा व बेहतर प्रशासन देना है। इसमें जनता का सहयोग भी चाहिए। अपराध पर नियंत्रण के लिए दो नए थाने खोले जाएंगे। इनका प्रपोजल मुख्यालय को भेज दिया गया है। आईएमटी थाना भी 20 दिन में शुरू हो जाएगा। यह कहना है पुलिस अधीक्षक जश्नदीप सिंह रंधावा का। वह सोमवार को अमर उजाला कार्यालय के संवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां उन्होंने अपने पिछले नौ महीने के कार्यकाल का अनुभव साझा किया।
एसपी ने कहा कि अपराध व अपराधियों पर अंकुश के लिए दो नए थाने शुरू करने हैं। इनमें से एक बहुअकबरपुर और दूसरा सुनारिया में बनाया जाएगा। इन दोनों थानों के प्रपोजल तैयार कर मंजूरी के लिए मुख्यालय भेज दिया गया है। नए थाने बनने से पुलिस की अपराधियों तक पहुंच आसान होगी। रोहतक को अपराध मुक्त बनाने में लोग भी पुलिस के साथ आएं। संदिग्धों व अपराधियों की सूचना पुलिस को दें। ऐसे लोगों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
पुलिस की नौकरी बेहद टफ है। परिवार से दूर रहना। दिन-रात की ड्यूटी। बगैर सुविधा रहना। इसके बावजूद अपना मानसिक संतुलन बनाए रखना और जनहित में बेहतर काम करना सराहनीय है। ऐसे में जवानों का वेलफेयर बहुत जरूरी है। इसी कड़ी में जवानों के लिए चाय बिस्किट योजना शुरू की गई है। इसे बेहतर ढंग से लागू करने के लिए बजट की भी व्यवस्था की गई है। इस प्रयास को सराहा गया है। ऐसे और भी कदम उठाए जाएंगे। जवानों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।
एसपी ने कहा कि पहले पुलिस के लिए काम करना काफी आसान था। एक कांस्टेबल के जाने से ही काम हो जाता था, लोग भी सहयोग करते थे। अब स्थिति उलट हो गई है। इस कारण अपराध भी बढ़ा है। हमारा देश युवा है। समाज में यूथ की ऊर्जा को सही तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत है। उन्हें रोजगार नहीं मिलना अपराध की दलदल में धकेल रहा है। इस दौड़ में नाबालिग भी शामिल हो गए हैं। ड्रग को लेकर भी मुहिम चलाई जाएगी।
एसपी एक नजर में
- 1988 में जन्म हुआ।
- 2012 बैच आईपीएस।
- 2013 हैदराबद में ट्रेनिंग।
- 2014 बल्लभगढ़ थाना प्रभारी।
- एसपी हांसी सवा साल रहा।
- एसपी अंबाला।
- एसपी झज्जर।
- एसपी करनाल।
- एसपी रोहतक।
- पत्नी आईआरएस 2017 बैच।
- असिस्टेंट कमीश्नर रोहतक।
शांतिपूर्वक निगम चुनाव कराना रहा चुनौतीपूर्ण
एसपी ने कहा कि रोहतक में दो बड़े चैलेंज रहे। इनमें से एक नगर निगम चुनाव को शांतिपूर्वक संपन्न कराना रहा। इसके लिए रात भर पेट्रोलिंग पर रहा। पुलिस यह संदेश देने में कामयाब रही कि गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। संदिग्धों को एक दिन पहलेे ही सख्त हिदायत दे दी गई थी। दिन में कार्यालय संबंधी दूसरे कार्य निपटाए। दूसरा मामला टिटोली का रहा। यहां एक गाय की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया था। दोनों की मामलों को पूरे ध्यान से संभाला। राम रहीम व रामपाल के मामलों को लेकर भी पुलिस ने बेहतर कार्य किया है। पुलिस हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
पुलिस सेवा से बड़ी दूसरी सेवा नहीं
मुश्किल से घिरे व्यक्ति को भगवान के बाद पुलिस ही याद आती है। यह बेहद टफ काम है। किसी हादसे में मृतक का शव उठाना हो, मर्डर केस हो या 24 घंटे की भूखे पेट रह कर ड्यूटी हो, पुलिस के जवान इसे करते हैं। कहीं भी कोई भी घटना हो, सबसे पहले पुलिस का नाम आता है। इसलिए पुलिस एक विभाग नहीं है। यह जन सेवा का एक जरिया है। इसके जरिए लोगों से सीधा जुड़ाव रहता है। व्यक्ति मन से, ईमानदारी से काम करे तो पुलिस से बेहतर कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इसीलिए आईपीएस बना।
केपीएस गिल हैं आदर्श
पंजाब से जुड़ा होने के कारण वहां के आतंकवाद को लोगों की जुबान से जाना समझा है। यहीं पुलिस महकमे में केपीएस गिल ने मेरे आदर्श हैं। इन्होंने पंजाब में कई विवादों में बेहतर काम किया। मेरे आईपीएस बनने की एक वजह यह भी हैं। मेरा लक्ष्य पहले से स्पष्ट था। इसीलिए पहली ही बार में चयन हो गया। यही नहीं देश में तीसरा रेंक हासिल किया। बीटेक करने के बाद एनटीपीसी में इंजीनियर व सीआरपीएफ में डीएसपी रहा।
मेहनत करें सफलता जरूर मिलेगी
एसपी रंधावा ने सफलता का मूलमंत्र साझा करते हुए कहा कि कुछ भी करना है, करते रहो। विचार आए काम करो। काम करोगे आदत बनेगी। आदत लाइफ स्टाइल बनेगी। लाइफ स्टाइल बन गई तो मंजिल भले दो दिन पहले मिले, बाद में मिले, मिलेगी जरूर। बैलेंस लाइफ के साथ फोकस और टारगेट स्पष्ट होना चाहिए। यह जितना जल्द हो जाए, उतना बेहतर है।
रोहतक रिटर्न करियर में अहम
एसपी ने कहा कि रोहतक कई मायनों में अहम है। अपराध के मामले रोहतक हरियाणा में तीसरे स्थान पर है। यहां काम करने और अपराध पर नियंत्रण पाने वाले एसपी का रुतबा बन जाता है। क्योंकि रोहतक न केवल प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों का गढ़ है बल्कि आंदोलन व रामरहीम के फैसलों के चलते पुलिस की जिम्मेदारी भी बढ़ गई थी। यहां के लोग जितने अग्रेसिव हैं, उतने ही सहयोगी भी। उनका विश्वास जीतने की जरूरत है। संवेदनशील मामलों में पुलिस अधिकारी निचले स्तर के भरोसे काम नहीं छोड़ते हैं।