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बिहार, यूपी, पंजाब, नेपाल, राजस्थान के चालीस वांछित बदमाशों को नहीं पकड़ पा रही पुलिस

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अमर उजाला एक्सक्लूसिव
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बिहार, यूपी, पंजाब, नेपाल, राजस्थान के चालीस वांछित बदमाशों को नहीं पकड़ पा रही पुलिस
- वर्ष 1988 से वांछित चल रहे बदमाशों को पकड़ने में नाकाम है रोहतक पुलिस
- हत्या, जान से मारने की धमकी व धोखाधड़ी, अपहरण के आरोपी अभी भी चल रहे वांछित
महबूब अली
रोहतक। कुख्यात बदमाशों को तो छोड़ ही दीजिए, रोहतक पुलिस वर्ष 1988 से बिहार, यूपी, पंजाब, नेपाल, राजस्थान से विभिन्न मामलों में वांछित चल रहे बदमाशों को ही पकड़ने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। चालीस वांछित बदमाशों को पुलिस नहीं पकड़ सकी है। हालांकि बीस बदमाशों को गिरफ्तार कर पुलिस ने सलाखों के पीछे भी पहुंचाया है। अब पुलिस अधिकारियों ने कई साल से वांछित चल रहे बदमाशों को पकड़ने के निर्देश दिए हैं।

हाल ही में दिल्ली की स्पेशल सेल ने हरियाणा के क्रांति गैंग के सरगना राजेश भारती, संजीत बिदरो समेत चार को एनकाउंटर में मार गिराया था। हरियाणा पुलिस देखती ही रह गई थी। देखने में आता है कि अकसर हरियाणा पुलिस बड़े बदमाशों को पकड़ने में नाकाम रहती है। हालांकि गैंगस्टर संपत नेहरा को हरियाणा एसआईटी ने जरूर गिरफ्तार किया है।
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रोहतक पुलिस 1988 से वांछित चल रहे बदमाशों को पकड़ने में ही पूरी तरह से नाकाम रही है। बिहार के पटना निवासी नागमणी 2008 से धोखाधड़ी व साजिश रचने, यूपी के बदायूं निवासी साहब सिंह धोखाधड़ी, यूपी के गाजियाबाद निवासी रामलाल 1988 से जान से मारने की धमकी, आगरा निवासी प्रमोद 2002 से धोखाधड़ी, पंजाब के अमृतसर निवासी मंगल 2002 से सरकारी कार्य में बाधा, उत्तराखंड के रुड़की निवासी रमेश वर्ष 2005 से अपहरण, सोनीपत निवासी सुभाष 2002 से धोखाधड़ी, मेरठ का अफसर खान वर्ष 2003 से लूट, राजस्थान के जयपुर निवासी बाबूलाल वर्ष 2005 से धोखाधड़ी, नेपाल निवासी बलराम वर्ष 2004 से स्वामी के यहां से चोरी, पंचकूला निवासी प्रवीण वर्ष 2002 से धोखाधड़ी, आगरा निवासी प्रमोद वर्ष 2002 से धोखाधड़ी के मामले में वांछित चल रहा है। करीब चालीस बदमाश वर्ष 1988 से फरार चल रहे हैं। जिन्हें पकड़ने का प्रयास पुलिस ने बंद कर दिया है। हालांकि बीस से अधिक वर्ष 1990 के बाद से वांछित चल रहे बदमाशों को पुलिस ने सलाखों के पीछे भी पहुंचाया है। सवाल यह उठता है कि उक्त बदमाशों को जमीन खा गई या फिर आसमान निकल गया। पुलिस के पास भी इसका जवाब नहीं है।

इन बड़े बदमाशों को पकड़ने में भी पुलिस नाकाम
पचास हजारी निंदाना गांव निवासी अभिषेक, बलियाना गांव निवासी अशोक, दस हजारी मोखरा गांव निवासी राकेश, गोहाना निवासी दस हजारी अमित को पुलिस पकड़ने में नाकाम है।

अधिकतर बाहरी बदमाशों के पुलिस के पास फोटो तक नहीं
फरार चल रहे अधिकतर बाहरी बदमाशों के पुलिस के पास फोटो तक नहीं है। यहीं कारण है कि पुलिस बाहरी बदमाशों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है। हालांकि सिपाही से लेकर एसआई तक को बदमाशों को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मगर पुलिसकर्मी बदमाशों को पकड़ने में सिर्फ खानापूर्ति ही करते नजर आ रहे हैं।
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पिछले कई साल से वांछित चल रहे बदमाशों को पकड़ने के निर्देश सभी पुलिस अधीक्षकों को दिए हैं। यदि कोई लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बड़े वांछित बदमाशों को भी पकड़ने के लिए पुलिस दबिश दे रही है।
- बीएस संधू, डीजीपी, हरियाणा
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