सोनीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार की अदालत ने किसान का अपहरण कर तीन करोड़ की फिरौती मांगने व हत्या करने के मामले में मृतक के भांजे समेत तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। करीब चार साल पुराने मामले में अदालत ने वीरवार को तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही दो दोषियों पर 25-25 हजार व एक पर 27 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
विदित रहे कि गांव जाट जोशी निवासी भूपेंद्र सिंह ने 7 सितंबर, 2015 को राई थाना पुलिस को शिकायत कर बताया था कि वह 5 सितंबर, 2015 को अपने भाई सतप्रकाश के साथ खेत में गया था। इसी दौरान एक युवक उनके खेत में आया और उसके भाई सतप्रकाश को बहाने से बुलाकर ले गया। उसे कहा कि सतप्रकाश अभी आ जाएगा। उसके बाद भी उसका भाई वापस नहीं आया। तलाश के बावजूद कोई सुराग नहीं लगा। 7 सितंबर, 2015 को सतप्रकाश के फोन से उसके पास फोन आया था। फोन करने वाले ने उसके भाई को छोड़ने के एवज में तीन करोड़ की फिरौती मांगी थी। इस पर उसने राई थाना में अपहरण का मामला दर्ज कराया था।
पुलिस ने मामले में जांच के बाद आरोपी पानीपत के गांव मनाना निवासी अमित उर्फ मीतू को गिरफ्तार किया था। तब अमित ने स्वीकारा था कि सतप्रकाश के भांजे मूलरूप से गांव मनाना व घटना के समय पुलिस लाइन नरेला, दिल्ली निवासी सुमित ने अपने मामा का अपहरण करवाया था। उनके साथ गांव नाहरी निवासी नीरज भी था। नीरज ने ही सतप्रकाश को खेत से बुलाकर लाया था। बाद में तीनों ने मनाना में सतप्रकाश की गोली मारकर हत्या कर दी थी। फंसने के भय से सतप्रकाश के शव को समालखा के गांव नामुंडा के पास नहर किनारे दफना दिया था। पुलिस ने शव को अमित की निशानदेही पर बरामद कर लिया था। पुलिस ने मामले में नाहरी निवासी नीरज को भी गिरफ्तार कर लिया था। वह सुमित का दोस्त था। बाद में तत्कालीन राई थाना प्रभारी रामफल ने 5 अक्तूबर, 2015 को मुख्य आरोपी सुमित को गिरफ्तार कर लिया था। सुमित का पिता सिलेंद्र दिल्ली पुलिस में कार्यरत होने के चलते वह पुलिस लाइन नरेला में रहता था। पुलिस ने सुमित को रिमांड पर लेकर उसकी निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त अवैध हथियार को भी बरामद कर लिया था। आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि सतप्रकाश की हत्या कर शव को नहर किनारे दबाने के बाद नीरज व अमित यूपी के मेरठ गए थे। वहीं से उन्होंने भूपेंद्र के पास सतप्रकाश के मोबाइल से फोन कर फिरौती मांगी थी। फिरौती मांगने के दौरान भूपेंद्र के फोन में नीरज की आवाज रिकार्ड हो गई थी। बाद में एफएसएल में मिलान कराने पर उसकी आवाज मिल गई थी। एएसजे अश्वनी कुमार की अदालत ने इस मामले में पक्षों की सुनवाई के बाद सुमित व उसके साथियों अमित और नीरज को दोषी करार दिया और सजा सुनाई।
इन धाराओं के तहत तीनों दोषियों को सुनाई सजा
अदालत ने सुमित को भादसं की धारा 302 में उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना, 201 में दो साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना, 364ए में उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना, तथा अवैध हथियार में एक साल कैद व दो हजार रुपये जुर्माना, अमित को धारा 302 में उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना, 201 में दो साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना, 364ए में उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना तथा नीरज को धारा 302 में उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना, 201 में दो साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना, 364ए में उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।