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फर्जी बिल पर लिए टैक्स क्रेडिट से दुबई भेजे जा रहे माल का चुकाया जीएसटी, पांच करोड़ की लगाई चपत

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रोहतक। फर्जी बिल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेकर तैयार माल को दुबई भेजने के दौरान जीएसटी की रकम चुकाकर सरकार को पांच करोड़ रुपये की चपत लगा दी गई। इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए जीएसटी को मुंबई में चुकाया गया था, वहां बात करने पर पता चला कि दुबई निर्यात किए जा रहे माल की जानकारी भी गलत दी गई थी। गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स रोहतक आयुक्तालय ने अपनी जांच के दौरान यह फर्जीवाड़ा पकड़ लिया। जांच में पता चला कि जिस कंपनी से नाम से फर्जी बिल लिया गया था, उसका अस्तित्व ही नहीं है।
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केंद्रीय माल एवं सेवाकर मंडल रोहतक के आयुक्त वीएम जैन ने बताया कि बहादुरगढ़ स्थित मैसर्स ट्रिवानो इंटरनेशनल पर जीएसटी टैक्स चोरी का शक हुआ। जांच में पता लगा कि सिर्फ कागजों में मौजूद फर्म बालाजी टिंबर की ओर से जारी फर्जी बिल पर कच्चे माल की खरीद दिखाकर 4.99 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट बनाया गया। इसके बाद इस इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रयोग मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट पर किया गया, जहां माल को दुबई भेजा जाने वाला था। इस पर मुंबई कस्टम की प्रिवेंटिव शाखा से संपर्क किया गया तो पता चला कि माल का विवरण गलत देने की वजह से ट्रिवानो पर केस दर्ज कराया गया है। इस पर ट्रिवानो इंटरनेशनल के मालिक को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए गए। जिस पर उसने फर्जी आईजीएसटी को क्रेडिट को रिफंड करने की हामी भरी। फर्म के बैंक खातों को सील करा दिया गया। हालांकि, फर्म के मालिक ने 4.56 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया और बाकी राशि ब्याज एवं जुर्माने के साथ वसूला जाएगा। आयुक्त ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच भी जारी है, पूर्व में हुए लेनदेन की जांच भी की जा रही है।

माल का विवरण गलत होने पर मुंबई कस्टम ने भी दर्ज कराया केस
मुंबई कस्टम में ट्रिवानो कंपनी के माल को तब रोका गया जब विवरण गलत निकला। दुबई भेजे जा रहे माल का विवरण दिया गया था कि अल्ट्रा वायलेट विकिरण के लिए रूपांकित सीमेंट कंक्रीट का सामान है, जबकि जांच करने पर पता चला कि उसमें सीमेंट की सामान्य ईंट थीं। जिस पर ट्रिवानो इंटरनेशनल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
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डबल टैक्सेशन को खत्म करने के नाम पर होती है घपलेबाजी
जीएसटी में कच्चे माल की खरीद से लेकर माल तैयार होने तक एक ही बार टैक्स लगता है। इसके लिए जीएसटी के तहत नियम है कि कच्चा माल खरीदने के दौरान बनने वाली जीएसटी की रकम को माल तैयार होने के बाद बनने वाली जीएसटी की रकम से घटा दिया जाता है, जिससे एक ही माल पर दो बार टैक्स नहीं लगता है। यह भी टैक्स चोरी होती है। कंपनियां फर्जी बिल लगातार कच्चे माल की खरीद दिखाती है, जबकि कोई माल खरीदा ही नहीं जाता है। इस पर बनने वाले टैक्स को तैयार माल पर बनने वाले टैक्स में से घटाकर टैक्स की चोरी की जाती है।
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