फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पति को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले मे पत् नी को तीन साल की कैद

विज्ञापन
विज्ञापन
एमडीयू में डाटा एंट्री के पद पर पांच साल से काम कर रहा था नवीन
विज्ञापन

सजा के बाद पत्नी ज्योति बोली, मेरी रीढ़ की हड्डी में दर्द, रहम बरता जाए
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
शादी के छह माह बाद ही जिंदा पति को मरा हुआ मानने वाली पत्नी चिन्नोट कालोनी निवासी ज्योति को सेशन जज संतकुमार की अदालत ने तीन साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
मामले के अनुसार नवंबर 2013 में चिन्नोट कालोनी निवासी विनोद कुमार ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दी कि उसके दो बेटे हैं। बड़े बेटे नवीन की शादी मदीना निवासी ज्योति के साथ हुई थी। नवीन महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में डाटा एंट्री आपरेटर की नौकरी करता था। शादी के कुछ दिन बाद ही ज्योति ने उसके बेटे नवीन और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ झगड़ा करना शुरू कर दिया। यहां तक नवीन के साथ हाथापाई तक करने लगी और कहने लगी कि उसको नवीन के अलग रहना है। विनोद का कहना है कि बेटे की खुशी के लिए वह उन्हें अलग करने पर सहमत हो गया। दोनों चिन्नोट कालोनी में ही एक मकान लेकर रहने लगे। इसी बीच ज्योति ने नवीन से कहा कि वह उससे शादी ही नहीं करना चाहती थी। घर वालों के दबाव में शादी करनी पड़ी। नवीन ने अपने पिता को पूरे मामले से अवगत कराया, कहां ज्योति कहती है कि वह उसे पति ही नहीं मानती। उसके लिए वह मर चुका है। 11 नवंबर 2013 नवीन ने फांसी लगाकर जान दे दी। साथ ही मरने से पहले सुसाइड नोट छोड़कर गया। सिविल लाइन पुलिस ने ज्योति के खिलाफ अपने पति को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज कर लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

मेरी रीढ़ की हड्डी में दर्द, रहम किया जाए
अदालत में दोषी करार देने के बाद ज्योति ने अपने वकील के माध्यम से सेशन कोर्ट में अर्जी लगाई कि उसकी रीढ़ की हड्डी में दर्द रहता है, जिसका उपचार दिल्ली चल रहा है। उसके साथ अदालत रहम बरते। शुक्रवार को सेशन कोर्ट ने ज्योति को पति को आत्महत्या के लिए मजबूर करने पर आईपीसी की धारा 306 के तहत 3 साल कैद व 10 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें