तिलियार पर्यटक स्थल स्थित झील में मंगलवार को दिनदहाड़े डूब रहा एक युवक बचाओ-बचाओ की आवाज लगाता रहा, लेकिन गोताखोर नहीं होने की वजह से उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। कुछ देर बाद किसी तरह से लोगों ने शव को बाहर निकाला। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बताया जा है कि युवक मानसिक रूप से कमजोर था, हालांकि उसकी पहचान नहीं हो सकी। युवक की उम्र 30 साल के आसपास होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
अर्बन एस्टेट थाना पुलिस को दोपहर बाद करीब डेढ़ बजे सूचना मिली कि तिलियार पर्यटक स्थल स्थिल झील में गिरने से एक युवक की मौत हो गई है। करीब 20 मिनट बाद पुलिस मौके पर पहुंची तब तक लोग युवक के शव को बाहर निकाल चुके थे। बताया गया कि पिछले कई दिनों से यह युवक तिलियार के आसपास ही कुछ-कुछ बोलते हुए घूम रहा था। इसलिए संदेह जताया जा रहा है कि युवक मानसिक रूप से कमजोर रहा होगा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस समय वह डूब रहा था, उसने बचाओ-बचाओ शोर भी मचाया, मगर गोताखोर नहीं होने की वजह से उसे बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने शव की शनाख्त करने का प्रयास किया, मगर उनकी पहचान नहीं हो सकी। इंस्पेक्टर नीरज कुमार ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर बताया कि गुलाल लगा होने की वजह से युवक झील किनारे मुंह धो रहा था, तभी पैर फिसलने के कारण झील में डूबने से युवक की मौत हो गई। युवक ने काले रंग की शर्ट और क्रीम कलर की पैंट पहन रखी थी।
गोताखोर होते तो बच सकती थी युवक की जान
तिलियार पर्यटन स्थल पर झील के पास रोजाना हजारों की संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं, मगर यहां पर सुरक्षा और बचाव के कोई इंतजाम नहीं है। यहां वोटिंग की सुविधा तो दी गई है, लेकिन यदि कोई डूब जाए तो उसे बचाने के लिए गोताखोर तक तैनात नहीं किए गए है। मंगलवार को यदि झील पर गोताखोर होते तो शायद डूबने वाले युवक की जान बचाई जा सकती थी। लापरवाही का आलम यह है कि वोटिंग करने वालों को अनिवार्य रूप से लाइफ जैकेट नहीं पहनाई जाती।
कोट-
लोगों पर निगरानी के लिए झील के आसपास चार-पांच कर्मियों को तैनात किया गया है, लेकिन हमारे पास गोताखोर की सुविधा नहीं है।
- जेपी शेखावत, प्रबंधक, तिलियार झील