माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। सेशन कोर्ट ने कहा है कि करंट लगने से व्यक्ति की मौत पर विभागीय जांच में बिजली निगम ने मनमानी की है। बराबर कसूर होने पर एएलएम को चेतावनी देकर छोड़ दिया था जबकि सेवानिवृत्त फोरमैन पेंशन में से एक साल तक पांच प्रतिशत प्रति माह काटने का निर्णय लिया था।
सेशन जज अजय तेवतिया की अदालत ने बुधवार को अपना निर्णय सुनाते हुए कहा कि यह एक तरह की मनमानी है। इसके साथ ही कोर्ट ने बिजली निगम की अपील को खारिज कर दिया।
सोनीपत के गोहाना शहर स्थित देवीपुरा निवासी सज्जन सिंह ने अदालत में दायर याचिका में बताया था कि वह 1978 में बिजली निगम में भर्ती हुए और 2016 में फोरमैन के तौर पर सेवानिवृत्त हुए थे। सेवाकाल के दौरान 2014 में पानीपत के इसराना क्षेत्र में करंट लगने से प्रेम सिंह नामक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
प्रेमसिंह के परिजनों ने अदालत में केस दायर किया था। दो साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने बिजली निगम को आदेश दिया कि मृतक के परिजनों को एक लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित दिया जाए। बिजली निगम को 1.26 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ था।
बिजली निगम ने विभागीय जांच के बाद एएलएम कुलदीप व फोरमैन सज्जन सिंह को जिम्मेदार माना था। एसडीओ की रिपोर्ट पर एएलएम को चेतावनी देकर छोड़ दिया था जबकि 2016 में सेवानिवृत्त हो चुके सज्जन सिंह की पेंशन से एक साल तक प्रति माह पांच प्रतिशत काटने का निर्णय लिया था।
सज्जन सिंह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने बिजली निगम के फैसले पर न केवल रोक लगाई बल्कि काटी गई राशि ब्याज सहित वापस देने का निर्णय लिया।
पंचकूला स्थित बिजली निगम के मुख्य प्रबंध निदेशक, यूएचबीवीएन ऑपरेशन मुख्य अभियंता रोहतक, सब अर्बन कार्यकारी अभियंता पानीपत व एसडीओ इसराना व जांच अधिकारी एक्सईएन सिटी पानीपत ने सितंबर 2025 में बिजली निगम ने सेशन कोर्ट में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी। सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को सही मानते हुए निगम की अपील खारिज कर दी।