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एमडीयू की दाखिला प्रक्रिया पर अदालत ने लगाई रोक, विद्यार्थियों में असमंजस

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कोरोना काल में देरी से शुरू हुई एमडीयू की दाखिला प्रक्रिया फिर उलझ गई है। अदालती पचड़े में फंसकर गणित व विधि विभाग में अगले निर्देशों तक प्रवेश नहीं होगा। अर्थशास्त्र व लोक प्रशासन विभाग की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर इस बारे में वीरवार को सुनवाई होगी। इसके बाद प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगने की संभावना है। अदालत ने विद्यार्थियों की शिकायत पर सुनवाई करते हुए दाखिला प्रक्रिया पर रोक लगाने के निर्देश देने के साथ विवि प्रशासन से जवाब मांगा है। इसके लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं। इन चारों केसों के अधिवक्ताओं ने दो विषयों की प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाने व दो की सुनवाई वीरवार को अदालत में होने की बात कही है। इधर, विवि प्रशासन ने इस मामले में कुछ भी कहने से परहेज बरता है। व्हाट्सएप के जरिये भी उनका पक्ष जानना चाहा, मगर देर रात तक कोई जवाब नहीं आया।
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जेएमआईसी विक्रांत की अदालत में बुधवार को तीन केस सुनवाई के लिए रखे गए। इसमें एमडीयू का विधि विभाग, गणित, अर्थशास्त्र व लोक प्रशासन विभाग शामिल है। अधिवक्ता अनीश ओहल्यान, तरुण बुद्धीराजा व राजनीश सुंदरपुरिया केसों की पैरवी कर रहे हैं। अदालत ने प्रीति की शिकायत पर दायर किए गए गणित विभाग के खिलाफ केस में सुनवाई करते हुए प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया। छात्रा एकता ने अर्थशास्त्र व पारस ने लोक प्रशासन विभाग के खिलाफ केस दायर किया है। इन दोनों केसों की सुनवाई वीरवार को होगी। इन केसों के अलावा जेएमआईसी विवेक सिंह की अदालत में अधिवक्ता एसपी धनखड़ ने एमडीयू के विधि विभाग की प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाने की अपील की। यहां छात्रा स्मृति गोयल ने विभाग की दाखिला प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस केस की सुनवाई 31 अगस्त को होगी।
क्यों खटखटाया अदालत का दरवाजा
स्मृति गोयल: अदालत में छात्रा ने कहा है कि ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के तहत विधि विभाग में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। आवेदन जमा हो गया। इसके बाद फीस भी खाते से कट गई। जबकि दस्तावेज अपलोड नहीं हुए। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने पर मैसेज भी प्राप्त हुआ। इसके बावजूद मेरिट सूची में नाम नहीं आया। विवि की तकनीकी गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ। विभाग में सुनवाई नहीं होने के कारण अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
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प्रीति : अदालत में छात्रा ने कहा कि ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के तहत गणित विभाग में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। दाखिले के लिए विवि ने मेरिट सूची जारी की। इसमें नाम काफी नीचे आया। जबकि मेरे 99.8 प्रतिशत अंक होने के चलते सूूची में दूसरा नंबर होना चाहिए था। मेरिट सूची के लिए मेरी वेटेज काउंट किए जाने के बावजूद इसे जोड़ा नहीं गया। इस बारे विभाग में संपर्क कर शिकायत करते हुए समाधान की अपील की, मगर सुनवाई नहीं हुई।
एकता : अदालत में अपील कर छात्रा ने कहा कि उसने 12वीं के बाद विवि के अर्थशास्त्र पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। जबकि उसे दो वर्षीय स्नातकोत्तर कोर्स में शामिल किया है। वह भी स्नातक के प्रमाण पत्र के बगैर। मेरिट सूची जारी होने के बाद पांच वर्षीय कोर्स के बजाय दो वर्षीय कोर्स में नाम आने की शिकायत करते हुए विभाग में संपर्क कर समाधान की अपील की। इसके बावजूद कोई समाधान या सुनवाई नहीं हुई।
पारस : अदालत से न्याय की अपील करते हुए छात्र ने कहा है कि उसने लोक प्रशासन विभाग में प्रवेेश के लिए आवेदन किया था। मेरा आवेदन सुपर न्यूमेरी श्रेणी में लिया गया है। जबकि न तो परिवार को कोई सदस्य विवि कर्मचारी है और न ही इस बारे में दस्तावेज लगाए। विवि के सॉफ्टवेयर की तकनीकी गड़बड़ी से मेरा आवेदन दूसरी श्रेेणी में गिनते हुए मुझे दाखिले से वंचित कर दिया गया। इस बारे में शिकायत कर समाधान की भी अपील की, मगर सुनवाई नहीं हुई।
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विश्वविद्यालय की गलती की सजा विद्यार्थियों को भुगतनी पड़ रही है। कोरोना काल में बड़ी मुश्किल से दाखिला प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसमें भी ढेरों खामियां हैं। इसी कारण विद्यार्थियों को योग्य होने के बावजूद दाखिले से वंचित रहना पड़ रहा है। विद्यार्थियों ने समस्या का समाधान कराने के लिए विवि में संपर्क भी किया। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हुई। विवि प्रशासन महामारी का गलत फायदा उठा रहा है। उन्हें विद्यार्थियों के प्रदर्शन नहीं करने की पूरी उम्मीद है। विद्यार्थियों ने कोविड-19 के चलते प्रदर्शन का रास्ता न अपना कर अदालत का ही रास्ता न्याय की दृष्टि से शेष नजर आया। इसलिए अदालत में न्याय की गुहार लगाई है। यहीं से न्याय की आस है।
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-प्रदीप देसवाल, प्रदेश अध्यक्ष, इनसो।
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