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Rohtak News: काउंसिलिंग, परिवार और हिम्मत ने दिलाई नशे से मुक्ति

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पीजीआई में ​राज्य व्यसन निर्भरता केंद्र।
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रोहतक। कभी नशे में जिंदगी तलाशने वाले अब समाज के लिए उम्मीद की किरण बन चुके हैं। नशे से आजादी की राह आसान नहीं थी लेकिन हिम्मत, काउंसिलिंग और परिवार के सहयोग से कई युवाओं ने अपने जीवन की नई शुरुआत की है। अब वही युवा दूसरों को नशे से दूर रहने का संदेश दे रहे हैं।
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पीजीआई के राज्य व्यसन निर्भरता केंद्र के चिकित्सकों ने बताया कि यहां सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, वीरवार और शनिवार को ओपीडी चलती है। हर हफ्ते लगभग 50 मरीज नशे के इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें गांजा, चिट्टा, स्मैक और तंबाकू की समस्या लेकर आने मरीज शामिल होते हैं। इनका इलाज काउंसिलिंग, दवाइयों और थैरेपी से किया जाता है।
ऐसे ही एक रोहतक के 23 वर्षीय युवा मरीज हैं, जिन्होंने नशे से जंग जीतकर नई जिंदगी शुरू की है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने दोस्तों के कहने पर सिगरेट पीना शुरू की, फिर धीरे-धीरे कोरेक्स सिरप और ड्रग्स की लत लग गई। शुरुआत में एक बोतल से शुरू होकर लत 15 बोतलों तक पहुंच गई। हालत बिगड़ने पर परिवार ने उन्हें दिल्ली में इलाज के लिए भर्ती कराया लेकिन वापसी के बाद वह दोबारा पुराने साथियों के चक्कर में फंस गए।
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करीब चार साल तक संघर्ष करने के बाद किसी रिश्तेदार की सलाह पर वे पीजीआई के नशामुक्ति केंद्र पहुंचे। यहां छह महीने के इलाज और नियमित काउंसिलिंग के बाद अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। वे अब अपना काम शुरू कर चुके हैं और दूसरों को नशे से दूर रहने की सलाह देते हैं। नशे की लत के कारण घर वालों ने अलमारियों तक के ताला लगाना शुरू कर दिया था लेकिन अब वो भी खुल गए हैं।
उनका कहना है कि मन में ठान लें तो पुराने से पुराने नशे को छोड़ा जा सकता है। जब उनकी मां से इस बारे में बात की गई तो बताया कि इकलौते बेटे को आठवीं कक्षा से नशे की लत लग गई थी। पति के निधन के बाद उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी लेकिन पीजीआई के इलाज ने बेटे को नई जिंदगी दी।
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अधिकतर लोग पीयर प्रेशर यानी दोस्तों या साथियों के दबाव में नशा शुरू करते हैं, इसलिए नशा करने वाले साथियों से दूर रहना चाहिए और नशा न करने वाले लोगों से मित्रता करनी चाहिए। नशे से बाहर निकलना मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं। अगर समय पर नशा छोड़ने का मन बना लें तो इससे निजात पाया जा सकता है।
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- डॉ. विनय, प्रोफेसर, नशामुक्ति केंद्र पीजीआई
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