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Rohtak News: गुलाबी सुंडी के प्रकोप से 22 प्रतिशत घट जाता है कपास का उत्पादन

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रोहतक। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. नरहरि सिंह बांगड़ ने कहा कि कपास में गुलाबी सूंडी का प्रकोप होने से 20 से 22 प्रतिशत तक उत्पादन में कमी हो जाती है। प्रदेश में कपास को गुलाबी सुंडी के प्रकोप से बचाने के लिए विभाग द्वारा किसानों को जागरूक करने के लिए राज्यव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। किसान कपास की बिजाई कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार 15 अप्रैल से 15 मई के बीच करें। मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. नरहरि सिंह बांगड़ ने यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही।
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उन्होंने कहा कि किसान अधखिले टिंडों को भी घरों में न रखें, बल्कि इनका उचित प्रबंधन करें। इन्हें मिट्टी में मिलाकर भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ाई जा सकती है। प्रदेश के 10 जिलों में लगभग 15 लाख एकड़ में कपास की खेती की जाती है, जिससे लगभग ढाई लाख परिवार जुड़े हुए हैं। रोहतक जिले में 12 हजार एकड़ क्षेत्र में कपास की फसल की खेती की जाती है। सरकार की ओर से कपास का समर्थन मूल्य 6620 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। कपास में गुलाबी सुंडी की बीमारी तेलंगाना राज्य से आई है। तेलंगाना में 18 लाख मीट्रिक टन कपास का उत्पादन होता है, जबकि संपूर्ण उत्तर भारत में 16 लाख मीट्रिक टन कपास का उत्पादन होता है। तेलंगाना द्वारा गुलाबी सुंडी पर पूर्ण रूप से नियंत्रण प्राप्त किया जा चुका है। इस वर्ष बाजरे की फसल में भी अमेरिकन सुंडी का प्रकोप देखने को मिला है, जो इस वर्ष से पहले कभी देखने को नहीं मिला।

पराली का उचित प्रबंधन करें किसान
बांगड़ ने कहा कि आईसीआर के माध्यम से 3 सेटेलाइट लगातार दिन-रात पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी कर रहे है। वर्ष 2021 में प्रदेश में पराली जलाने के 6987 मामले, वर्ष 2022 में 3661 व 2023 में अब तक 1857 मामले दर्ज किए गए हैं। इस वर्ष अब तक पराली जलाने वालों से साढ़े 5 लाख रुपये की जुर्माना राशि वसूल की गई है। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 300 करोड़ रुपये की कृषि मशीनरी अनुदान पर उपलब्ध करवाई गई है।
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गुलाबी सुंडी के प्रकोप से बचाव के लिए यह सावधानियां बरतें
कपास की चुनाई साफ-सुथरी करें व गुलाबी सुंडी या टिंडा गलन से प्रभावित कपास को अलग रखें। कपास की चुनाई करते समय सूखी पत्तियों, कागज और प्लास्टिक के टुकड़े, बीड़ी और सिगरेट के अवशेष या पान-गुटखा के पैकेट को कपास में न मिलने दें। साफ-सुथरी कपास को मंडी में अलग से बेचें। घरों में भंडारित कपास को बंद कमरे या गोदाम में रखें। अंतिम चुगाई के बाद खेत में भेड़-बकरियों को चरने दें। इसके बाद लकड़ियों को रोटावेटर या श्रेडर की सहायता से कुतर कर जमीन में मिला दें ताकि इनमें मौजूद गुलाबी सुंडी जमीन में मिलकर खत्म हो जाएं।
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