फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना वारियर्स : डेढ़ महीने से पुलिस जवानों का बने हैं रक्षा कवच

विज्ञापन
Corona Warriors: Defense personnel made of police personnel for one and a half months - फोटो : RohtakCity
विज्ञापन
दिन भर की थकान भरी ड्यूटी। शाम को घर पहुंच कर खुद को क्वारंटीन रखना। न बच्चों से मिलना न पत्नी या माता-पिता से। कमरे में जाने से पहले कपड़े डिटर्जेंट में डालने। बंद कमरे में ही खाना खाकर सोना। वहीं से सुबह तैयार होकर फिर ड्यूटी पर चले आना। पिछले डेढ़ महीने से फार्मासिस्ट हरेंद्र व श्रीकृष्ण की यही दिनचर्या है। पुलिस अस्पताल में तैनात ये दोनों कोरोना वारियर्स अपनी फोर्स को स्वस्थ व मजबूत बनाए रखने के लिए बगैर छुट्टी लगातार काम कर रहे हैं। यही नहीं रात को भी किसी जवान की तबीयत बिगड़ने या महामारी का संदेह की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य जांच को दौड़ पड़ते हैं। इन योद्धा के लिए भी सैल्यूट बनता है। अमर उजाला ने इनसे बातचीत की तो उनकी कर्तव्य परायणता सामने आई।
विज्ञापन

पुलिस के 2000 जवानों का एक बार हो चुका चेकअप
जिला पुलिस के करीब 2000 जवान कोरोना ड्यूटी पर तैनात हैं। कुछ हाई रिस्क, कुछ रिस्क व कुछ सामान्य ड्यूटी पर हैं। इन सभी जवानों का सुरक्षा की दृष्टि से एक बार चेकअप हो चुका है। इन दोनों फार्मासिस्टों ने इस काम को अंजाम दिया है। इनके साथ पुलिस कर्मचारियों के 383 परिजनों का भी स्वास्थ्य जांचा गया है। अब दोबारा नए सिरे से जवानों की स्वास्थ्य जांच शुरू की गई है।
बीपी, शूगर व 50 से अधिक उम्र वाले लाइन में भेजे
पुलिस अस्पताल की स्वास्थ्य टीम ने जवानों की जांच की। जांच में कुछ जवान बीपी व शूगर से पीड़ित मिले। इन्हें व 50 से अधिक उम्र वाले जवानों को कोरोना की रिस्की ड्यूटी से अलग कर दिया गया है। इन्हें पुलिस लाइन में सामान्य ड्यूटी के लिए रखा गया है। फील्ड में सेहतमंद जवानों को ही रखा गया है।
विज्ञापन

सैनिटाइजेशन व पीपीई किट की दी जानकारी
पुलिस के जवानों को इन दो लोगों की स्वास्थ्य टीम ने महामारी से बचाव व सेहतमंद बने रहने के लिए सैनिटाइजेशन का पाठ पढ़ाया। उन्हें हाथों को साफ रखना, मास्क व ग्लव्ज पहनने व दवा का स्प्रे करने के साथ पीपीई किट पहनना व बाद में उतार कर नष्ट करना सिखाया। अस्पताल में ही होम मेड सैनिटाइजर तैयार कर सभी जगह दवा का स्प्रे किया गया।
महामारी के दौर में अपने साथ परिवार को भी संक्रमण से बचाना है। इसलिए घर जाकर सिर्फ एक ही कमरे में रहते हैं। यहां कोई और नहीं होता है। सबसे पहले बाथरूम में जाकर पहने हुए कपड़े उतार कर डिटर्जेंट में डालते हैं। फिर गर्म पानी से नहाते हैं। यह सब प्रक्रिया खुद को व परिजनों को संक्रमण से दूर रखने के लिए जरूरी है। बंद कमरे में ही खाना पीना व सोना होता है। सुबह यहीं से ड्यूटी पर आ जाता हूं।
हरेंद्र सिंह, फार्मासिस्ट, पुलिस अस्पताल।
महामारी के समय ड्यूटी के बाद घर जाना परिवार के स्वास्थ्य की चिंता पैदा करता है। हालात ये हैं कि एक बंद कमरे में ही डेढ़ महीने से ठिकाना बनाया हुआ है। यहीं खाना खाने के बाद अपने बर्तन खुद धोते हैं। ऐसा केवल परिवार को हमारे जरिए संक्रमण न लगने देना है। इस कमरे से ही रोज ड्यूटी पर आते हैं। परिजनों से ठीक से बात भी नहीं हो पाती है।
विज्ञापन

श्रीकृष्ण, फार्मासिस्ट, पुलिस अस्पताल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें