कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लगाया लॉकडाउन का असर अब गेहूं की कटाई पर पड़ने लगा है। कोरोना की दहशत से जिले में पंजाब से गेहूं कटाई के लिए आने वाली कंबाइनों पर ब्रेक लग गया है। संक्रमण और सख्ती के कारण कंबाइन मालिकों ने रोहतक आने से हाथ खींच लिए हैं। हालांकि गुजरात और एमपी से कुछ कंबाइन पहुंची हैं, लेकिन पहले की तुलना में अभी तक वे 25 फीसदी से भी कम हैं। वहीं जिला प्रशासन ने भी पूरी तैयारी कर ली है, सभी नाकों पर कंबाइनों का सैनिटाइज किया जा रहा है, इसके बाद ही उन्हें प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।
जिले में गेहूं का रकबा लगभग एक लाख हेक्टेयर है। पिछले कुछ सालों से उसके ज्यादातर हिस्से की कटाई कंबाइनों से ही हो रही है। हाथों से कटाई का रकबा बहुत मामूली है। गेहूं कटाई के लिए हर साल पंजाब से करीब 200 कंबाइन आती हैं वहीं जिले में करीब 113 कंबाइन है, लेकिन इनका संचालन करने वाले पंजाब के संगरूर, मोगा, पटियाला और बरनाला जिलों से आते हैं। जिले के किसान अपने-अपने परिचितों को फोन कर बुला रहे हैं, लेकिन कंबाइन मालिक कोरोना के डर से इनकार कर रहे हैं।
मायना गांव के प्रगतिशील किसान विनय पाल ने कहा कि अब तक उनके गांव में 3-4 कंबाइनें आ जाती थीं, लेकिन इस बार एक भी नहीं आई। खेतीबाड़ी विभाग अभी तक ऐसा आंकड़ा नहीं जुटा सका है कि पिछले साल की तुलना में कितनी कम कंबाइनें आई हैं। लेकिन माना जा रहा है कि उनकी संख्या 25 प्रतिशत भी नहीं है। इनमें भी ज्यादातर वे लोग हैं जो गुजरात और मध्य प्रदेश से कटाई के बाद लौट रहे हैं।
पास बनवा लिए पर घरवाले जाने नहीं दे रहे
अमृतसर के कंबाइन निर्माता कुलदीप सिंह ने कहा कि हरियाणा में गेहूं की कटाई 5 अप्रैल से शुरू हो जाती थी, बीस अप्रैल तक आधा काम हो जाता था, उसके बाद यहां के कंबाइन वाले पंजाब लौट आते थे। इस बार भी लोगों ने पास बनवा लिए थे, पर पंजाब, हरियाणा में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद घरवाले जाने नहीं दे रहे। एमपी, गुजरात से लौट रहे लोग भी हरियाणा रुकने के बजाय घर लौट रहे हैं। हर साल अपनी कंबाइन लेकर हरियाणा में कटाई को आने वाले वल्टोहा, अमृतसर के किसान शिंदर सिंह ने कहा कि वह अगर पांच दिन भी हरियाणा लगाते थे तो ड्राइवर, डीजल और बाकी खर्चे निकल जाते थे। इस बार डीसी ने आदेश किए हैं कि बाहर से आने पर 14 दिन अकेले रहना पड़ेगा, बीमारी का भी डर है। पास बनवा लिया था, पर नहीं जा रहे।
सात नाकों पर कंबाइनों का सैनिटाइजेशन शुरू
जिला प्रशासन ने पहले ही कंबाइन समेत सभी कृषि उपकरणों, वाहनों को लॉकडाउन से छूट दे दी थी। अब जिले में एंट्री के सात प्वाइंट पर नाके लगाए गए हैं, जहां बाहर से आने वाली कंबाइनों का सैनिटाइजेशन शुरू किया है। ये नाके हांसी बार्डर नहर पुल के पास, जींद बार्डर, खैरड़ी मोड़ बौंद रोड पर, घिलौड़ बार्डर, करौंथा में सतलोक आश्रम के सामने, पुलिस चौकी कंसाला के सामने और पूर्वी बाईपास सांपला पर लगाए गए हैं। यहां स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ भी है जो कंबाइन के साथ आने वाले लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रहा है। रविवार को करौंथा नाके पर मध्य प्रदेश से लौट रही कुछ कंबाइनों का सैनिटाइजेशन किया गया। जिसके बाद वे गेहूं कटाई के लिए लाखनमाजरा चली गईं।
स्थानीय कंबाइन मालिकों को दी अनुमति
डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर रोहताश सिंह ने कहा कि पंजाब से इस बार कंबाइनों की आमद कम है। इसकी आशंका को देखते हुए पहले ही स्थानीय कंबाइन मालिकों की सूची बना ली गई थी। जिनका स्थानीय स्टाफ है, उनकी कोई चिंता नहीं है। जिनका स्टाफ पंजाब से आता है, उनसे पूछा गया था कि विभाग उनकी किस प्रकार मदद कर सकता है। बहुत से लोगों का स्टाफ पहले ही पंजाब से आ चुका था। 17 लोगों ने स्टाफ लाने के लिए वाहनों की परमिशन मांगी थी, जो दे दी गई है। अगर सभी स्थानीय कंबाइनें चलेंगी और कुछ पंजाब से आ जाएंगी तो दिक्कत नहीं आएगी।
ऑल इंडिया कंबाइन मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव अमर सिंह ने बताया कि पंजाब में करीब 17-18 हजार कंबाइनें हैं। जिनमें से करीब 7 हजार हर साल हरियाणा के विभिन्न जिलों में जाती हैं। लेकिन इस बार बहुत कम ही जा रही हैं। केंद्र सरकार के निर्देश पर इनके लिए बैरियर हटा लिए गए हैं। लेकिन कोरोना के कारण कोई रिस्क लेने को तैयार नहीं है।
पंजाब में सबसे ज्यादा मृत्यु दर
उत्तरी राज्यों में कोरोना से सबसे ज्यादा मृत्यु दर पंजाब में है। यह भी एक वजह है कि पंजाब के कंबाइन मालिक और ड्राइवर इस बार यहां नहीं आ रहे हैं।
राज्य कोरोना मरीज मौत
पंजाब 151 11
हरियाणा 177 4
हिमाचल प्रदेश 32 1
जम्मू कश्मीर 207 4
दिल्ली 1069 19
चंडीगढ़ 19 0
नोट : 12 अप्रैल शाम सात बजे तक का डाटा।