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कोरोना संक्रमितों को ओटी में लाने से ले जाने तक के बनाये नये नियम

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डॉ. नवीन मल्होत्रा एएसए के राष्ट्रीय महासचिव। - फोटो : RohtakCity
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रोहतक। इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट के राष्ट्रीय महासचिव तथा दर्द निवारण केंद्र पीजीआईएमएस रोहतक के इंचार्ज डॉ. नवीन मल्होत्रा ने बताया कि सोसायटी की ओर से जारी एडवाइजरी को डब्ल्यूएफएसए व आईएमए ने अपनी स्वीकृति दी है। इसमें बताया है कि संक्रमित मरीज के ऑपरेशन में डॉक्टर पीपीई किट पहन कर कैसे सर्जरी करें और कैसे तालमेल स्थापित करें। इसके अलावा संक्रमित को ओटी में लाने से पहले व बाहर ले जाने के बाद ओटी को किस प्रकार संक्रमण मुक्त करें। संक्रमण से बचने के लिए ओटी में डॉक्टर व स्टाफ की संख्या सीमित की गई है।
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डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि ओटी में सबसे अहम एसी होता है, यह संक्रमण फैलाने का जनक भी हो सकता है। बगैर एसी ऑपरेशन भी नहीं हो सकता। इसके लिए आधुनिक एसी की जरूरत होती है, जिससे पूरे ओटी को संक्रमण मुक्त किया जा सके। कोरोना महामारी के समय में निश्चेतन विभाग के डॉक्टरों की हर संभव मदद की जा रही है। संक्रमण की शुरूआत में पीपीई किट की कमी होने पर सोसायटी ने 225 से अधिक देशभर की विभिन्न निश्चेतन शाखाओं तक मदद पहुंचाई है और राष्ट्रीय स्तर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ मिलकर वेंटिलेटर संचालन का कार्य भी किया और डॉक्टरों को सिखाया गया। इसमें यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री, नीति आयोग व अन्य सरकारी संस्थानों का तालमेल रहा है। सोसायटी निश्चेतन विभाग के अलावा अन्य विभागों के डॉक्टरों को भी वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण दे रही है, ताकि महामारी में एक्सपर्ट की कमी न हो। इसकी आवश्यकता जिला स्तर के सिविल अस्पतालों में अधिक महसूस की गई और इसे पूरा किया जा रहा है।
दो टास्क फोर्स गठित
सोसायटी ने दो नेशनल टॉस्क फोर्स का गठन किया है, इसमें क्लीनिकल कोऑर्डिनेटर्स शामिल हैं। ये आईसीयू के अंदर कोरोना मरीजों का मेडिकल उपचार पर मंथन करते हैं, इसी आधार पर उनका उपचार चलता है। वहीं दूसरी टास्क फोर्स ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर्स की बनाई गई है, जोकि राष्ट्रीय स्तर पर वेंटिलेटर कोर्स के अंदर लोगों को प्रशिक्षित कर रही है।
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सोसायटी और आरसीए लंदन उपचार की तकनीक पर कर रहे मंथन
डॉ. नवीन मल्होत्रा ने बताया कि सोसायटी का रॉयल कॉलेज ऑफ एनेस्थीसिया लंदन के साथ मंथन हुआ है। इसमें दोनों देशों के अंदर संक्रमित कोरोना मरीजों के उपचार के लिए आपस मै विचार विमर्श हो रहा है। इसमें अहम है कि निश्चेतन विशेषज्ञों को मानसिक रूप से कैसे फिट रखा जाए। क्योंकि कोरोना महामारी एक बहुत बड़ा मानसिक तनाव है। इसके लिए एनेस्थीसियोलॉजिस्ट कैंपेन, आईअसऐ कल्चरल क्लब एवं आईअस आर्ट ऐंड लिटरेरी क्लब के अंदर भी देशभर मै गतिविधियां चलाई गई हैं।
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