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भगवान की रचना की सेहत डॉक्टर की जिम्मेदारी : राज्यपाल

Fri, 21 Oct 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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पीजीआई के दीक्षांत समारोह में पहुंचे राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने डॉक्टरों को पढ़ाया कर्तव्य का पाठ - फोटो : amar ujala
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भगवान की रचना इंसान को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी डॉक्टर की होती है। क्योंकि प्राकृतिक रूप से इंसान का शरीर 40 वर्ष तक स्वयं अपना उपचार कर सकता है। इसके बाद डॉक्टर की जरूरत होती है, इसलिए डॉक्टर को दूसरा भगवान कहा जाता है। देश में डॉक्टरों की कमी है और डॉक्टर बनना आसान नहीं है। कोई अकेला व्यक्ति डॉक्टर नहीं बन सकता। विद्यार्थी की मेहनत के साथ-साथ उसकी फैकल्टी व उसके माता-पिता को भी मेहनत करनी होती है। जहां वह शिक्षा गृहण करता है उसमें सरकार का सहयोग होता है और सरकार जो खर्च करती है वह आम जनता से मिलने वाला राजस्व होता है। इसलिए डॉक्टरों को आमजन के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए।  
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यह कहना है राज्यपाल एवं पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी का। वे बृहस्पतिवार को हेल्थ विवि (पीजीआई) के प्रथम दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करने पहुंचे थे। उन्होंने भक्त हनुमान का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें नि:स्वार्थ भाव से सेवा करनी चाहिए। फोर एस का फार्मूला समझाते हुए कहा कि सभी में सेवा, लगन, गंभीरता व आध्यात्मिकता के भाव होने चाहिए। उन्होंने कहा कि हेल्थ विवि 2008 में शुरू हुआ, लेकिन कोई दीक्षांत समारोह नहीं हुआ। शायद दीक्षांत समारोह भी प्रो. ओ. पी. कालरा के कुलपति बनकर आने का इंतजार कर रहा था। डॉक्टर कभी भी ऐसा काम न करें कि उनके पेशे को कलंक लगे।  

जल्द शुरू होगा किडनी ट्रांसप्लांट : कालरा

कुलपति डॉ. ओ.पी. कालरा ने कहा कि बहुत जल्द पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट शुुरू होने जा रहा है। इसके लिए डॉक्टरों व नर्सों को ट्रेनिंग के लिए एम्स भेजा जा चुका है। डॉ. कालरा ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन एनबीई के कार्यकारी निदेशक डॉ. बिपिन बतरा को मानद उपाधि देकर सम्मानित किया। रजिस्ट्रार डॉ. एच. के. अग्रवाल ने सभी का धन्यवाद व्यक्त किया। मंच संचालन डॉ. वरुण अरोड़ा और डॉ. हंसा ने किया।
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कैंपस के 1798 छात्रों ने ली डिग्री

समारोह में करीब आठ हजार डिग्री बांटी गईं। इसमें से मौके पर पीजीआई कैंपस के 1798 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इस मौके पर राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग धनपत सिंह, एमडीयू के कुलपति डॉ. बी. के. पूनिया, एसजीटी के कुलपति डॉ. श्याम सिंगला, खानपुर महिला विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. आशा कादियान, सीडीएलयू भिवानी के कुलपति एस. के. गक्खड़, वेस्ट बंगाल हेल्थ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भाभातोष बिश्वास, लाला लाजपत राय विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल श्रीकांत शर्मा, कमिश्नर रोहतक चंद्रप्रकाश आईएएस, उपकुलपति डॉ. वी. के. जैन, निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता, खानपुर मेडिकल कालेज के निदेशक डॉ. पी. एस. गहलोत, सीटीएम महेंद्रपाल, डीन एकेडमिक अफेयर डॉ. आरबी सिंह मौजूद रहे।

यूं बोले होनहार

तीन गोल्ड मेडल ने बढ़ाया मान

मोहन नगर गाजियाबाद निवासी डॉ. अर्पिता वार्ष्णेय ने 2014 एमबीबीएस बैच में आलओवर गोल्ड मेडल हासिल किया। अर्पिता ने एनाटमी और फोरेंसिक विषयों में भी गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने कामयाबी का श्रेय उनके इंजीनियर पिता और गृहणी माता के साथ दोस्तों को दिया। अभी वे रेडियोलाजी में पीजी कर रही हैं।  

शिक्षक की बेटी बनेगी सर्जन

आदमपुर की रहने वाली डॉ. मीनू बेनीवाल ने 2013 एमबीबीएस बैच एनाटमी में गोल्ड मेडल हासिल किया। उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय शिक्षिका मां सुशीला और पिता राजदीप को दिया। मीनू ने बताया कि वह सर्जरी में पीजी कर रही है, जबकि इसमें लड़कों की अधिक रुचि होती है। लेकिन माता-पिता के आशीर्वाद से उन्हें इसमें कोई समस्या नहीं आ रही है। वे भविष्य में एमसीएच कर मरीजों की सेवा करना चाहेंगी।

एमबीबीएस 2013 बेच में पाया द्वितीय स्थान

पीजीआई में सर्जन डॉ. एमजी वशिष्ठ की बेटी डॉ. आरुषि वशिष्ठ ने एमबीबीएस 2013 बेच में द्वितीय स्थान पाया है। इसका श्रेय वे अपने माता-पिता और परिजनों को देती हैं। आरुषि फिलहाल पीजीआई में ही ईएनटी में पीजी कर रही हैं। उनकी बहन अन्नू एमबीबीएस अंतिम वर्ष में हैं।

किसान पिता का बेटा बनेगा हार्ट सर्जन

कैथल निवासी डॉ. अशोक चहल को कार्डियोथोरेसिक सर्जरी में एमसीएच की डिग्री प्रदान की गई है। डॉ. चहल की माता गृहणी हैं और उनके पिता किसान हैं। डिग्री मिलने पर डॉ. अशोक ने बताया कि यह एक यादगार पल है और इसका बेसब्री से इंतजार था। आज मेहनत और इंतजार का फल एक साथ मिला है। उनका प्रयास है कि वे अपने जीवन में मरीजों को बेहतर से बेहतर इलाज करें।

क्लीनिकल साइकोलाजी में पाया मुकाम

सेक्टर एक निवासी डॉ. सुमन हुड्डा को क्लीनिकल साइकोलाजी की डिग्री मिली है। इसमें वे दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने बताया कि  पिता सतनारायण गन्नौर में पब्लिक हेल्थ में एसडीओ और मां गृहणी हैं। वर्तमान में वे निजी अस्पताल में बतौर साइकोथैरेपिस्ट कार्य कर रही हैं। इसके अलावा वे चाइल्ड हेल्प लाइन और अर्पण संस्था में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उनकी कामयाबी के पीछे उनके माता-पिता और दोस्तों का काफी योगदान है।  

बेहतर सर्जन बनने की है तैयारी

दिल्ली की डॉ. प्रेरणा जैन एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर बहुत खुश हुईं। उन्होंने बताया कि उनके पिता आरके जैन दिल्ली में सरकारी जॉब में हैं और मां गृहणी हैं। इसके बावजूद मेडिकल की पढ़ाई करने में उन्होंने पूरा सहयोग किया। वे फिलहाल पीजीआईएमएस में सर्जरी में पीजी कर रही हैं। उनका प्रयास है कि अधिक मेहनत करके वे जीवन में बेहतर सर्जन बनें और मरीजों की सेवा करें।
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