माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी संजू को एएसजे शैलेंद्र सिंह की अदालत ने 20 साल कैद और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत में गवाहों के मुकरने के बाद डीएनए रिपोर्ट को ठोस सबूत मानते हुए अदालत ने कहा ऐसी स्थिति में न्याय को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता है।
तीन साल पहले जिले के एक गांव के व्यक्ति ने लाखनमाजरा थाने में शिकायत दी थी कि उनकी 13 साल की बेटी शाम सात बजे लापता हो गई। उसने आरोप लगाया कि संजू नामक युवक पर उसे शक है। दो दिन बाद पुलिस नाबालिग को बरामद करने में कामयाब रही।
मुख्य आरोपी संजू के अलावा पुलिस ने आरोपी के ही गांव के युवक को वारदात में साथ देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। तभी से जिला अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी। 16 जुलाई को अदालत ने संजू को दोषी करार दिया जबकि वारदात में सहयोग करने के आरोपी को बरी कर दिया।
शनिवार को अदालत ने दोषी संजू को छह पॉक्सो एक्ट व दुष्कर्म की धारा 376 (3) के तहत 20-20 साल की कैद व 15-15 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
......
माता-पिता और पीड़िता कोर्ट में गवाही से पलटीं, कोर्ट ने कहा-डीएनए रिपोर्ट अहम सबूत
केस की सुनवाई के दौरान पीड़िता व उसके माता-पिता पहले दिए गए अपने बयान से पलट गए थे। अदालत ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि गवाह पूरी तरह से पूर्व दिए बयानों से पलट गए हैं। इससे साफ है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें मना लिया गया। इस तरह के व्यवहार से न्याय की राह को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। खासकर तब जब साइंटिफिक सबूतों से आरोप साबित हो चुका हो। अदालत ने कहा कि खास बात यह है कि आरोपी संजू ने इस बारे में कोई सफाई नहीं दी है कि पीड़िता के कपड़ों पर उसका सीमन कैसे मिला।