रोहतक। जिलास्तरीय शैक्षणिक ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया है कि अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर को दो ही स्थिति में हटाया जा सकता है। पहला उसी पद पर नियमित नियुक्ति हुई हो या अनुबंधित प्रोफेसर का काम संतोषजनक न हो। ऐसे में 2017-18 के बाद दोबारा नौकरी पर न रखे गए अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर शंकर गुलिया को दोबारा जाट कॉलेज को नौकरी पर रखना होगा।
याचिकाकर्ता के वकील राकेश सपड़ा ने बताया कि अक्तूबर 2021 में सुखपुरा निवासी शंकर गुलिया ने जाट काॅलेज में गणित के अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नौकरी ज्वाइन की थी, लेकिन साल 2018-19 में उन्हें दोबारा नौकरी पर नहीं रखा गया, बल्कि नए सिरे से विज्ञापन जारी करके साक्षात्कार लिए गए। इसमें उनकी जगह किसी अन्य को नौकरी पर रख लिया, जबकि यह नियमों के खिलाफ है। शंकर गुलिया व अन्य ने मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि ऐसा करके कॉलेज की तरफ से दो माह का वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। हाईकोर्ट ने दो माह का वेतन जारी करने के आदेश दिए। बाकी सुनवाई के लिए जिलास्तर पर सेशन जज की अध्यक्षता में गठित ट्रिब्यूनल में जाने की सलाह दी। ऐसे में शंकर गुलिया ने ट्रिब्यूनल में अर्जी लगाई। सेशन जज नीरजा कुलवंत कल्सन की अध्यक्षता में सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने फैसला दिया कि अनुबंधित सहायक प्रोफेसर को गलत हटाया गया। उसे दोबारा नौकरी पर रखा जाए।य