ऑस्ट्रेलिया में टूरिस्ट वीजा पर घूमने गए उपभोक्ता को हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने यह कहकर मुआवजा देने से इनकार कर दिया कि उपभोक्ता पहले से बीमार था। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी पर न केवल 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है, बल्कि उपचार में खर्च हुई ढाई लाख रुपये की राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित देनी होगी। साथ में पांच हजार रुपये कानूनी खर्च के देने होंगे। आयोग के चेयरमैन नगेंद्र सिंह कादियान का कहना है कि उपभोक्ता ने कॉलम भरने से पहले की बीमारी का जिक्र किया है। अब बीमारी के कागजात लेना इंश्योरेंस कंपनी की जिम्मेदारी है।
शीला बाईपास के नजदीक भरत सिंह कॉलोनी निवासी चांद सिंह पहल ने अक्तूबर 2018 में जिला उपभोक्ता आयोग में अर्जी दी थी कि उसने गुरुग्राम स्थित एक कंपनी से ऑस्ट्रेलिया की यात्रा के दौरान स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। इसके लिए पांच हजार यूएस डॉलर यानि 10 हजार 616 रुपये खर्च किए थे। ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान उसकी तबीयत खराब हो गई। निजी अस्पताल के डाॅक्टर से उसने 80 आस्ट्रेलियन डॉलर देकर उपचार कराया। बाद में उनको लगातार खांसी होने लगी। इसके चलते के अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। छाती का एक्स-रे से लेकर पैथोलॉजिकल परीक्षण तक करवाना पड़ा। उसके उपचार पर 4780 ऑस्ट्रेलिया डॉलर यानि 2 लाख 50 हजार 981 रुपये खर्च हुए।
कंपनी का आरोप- उपभोक्ता ने बीमा पॉलिसी लेते समय बीमारी को छिपाया
स्वदेश लौटने के बाद उसने इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजा मांगा तो कंपनी यह कहकर इंकार कर दिया कि बीमा करवाते समय उपभोक्ता ने यह नहीं बताया कि उसे से पहले कोई बीमारी है। पीड़ित ने जिला उपभोक्ता आयोग में अर्जी देकर न केवल मेडिकल क्लेम मांगा, बल्कि 2 लाख 64 हजार 951 रुपये एयरलाइन का किराया मांगा। मुआवजे के तौर पर 1 लाख रुपये व कानूनी खर्च के लिए 25 हजार रुपये की मांग की। आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा। कंपनी ने वहीं जवाब दोहराया कि पहले बीमारी के बारे में अवगत नहीं कराया गया, जो नियमों का उल्लंघन है। जबकि उपभोक्ता ने बताया कि उसने कॉलम में पहले से उच्च रक्तचाप की बीमारी होने का जिक्र किया है।
साथ ही मई 2017 में सीएजी से गुजरने का भी उल्लेख किया गया था। दोनों पक्षों की बहस के बाद फोरम ने पाया कि उपभोक्ता ने पहले से बीमार होने का जिक्र किया है। ऐसे में बीमारी से जुड़े सभी दस्तावेज लेने की जिम्मेदारी कंपनी की थी। ऐसे में कंपनी एक माह के अंदर 2 लाख 50 हजार 981 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित उपभोक्ता को दे। साथ ही 10 हजार रुपये मुआवजा व 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर दिए जाएं।