रोहतक। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ऑनलाइन शॉपिंग करवाने वाली एक निजी कंपनी को आदेेश दिए हैं कि एक माह के अंदर उपभोक्ता के मोबाइल की राशि 59 हजार 859 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित एक माह में लौटाए। साथ ही 5 हजार रुपये हर्जाने के तौर पर दे। क्योंकि कंपनी ने ऑर्डर के समय मोबाइल का जो रंग बुक हुआ था, उसी रंग का मोबाइल नहीं भेजा। जबकि दूसरे मामले में आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को हादसे के समय मोबाइल फोन टूटने पर ब्याज सहित राशि लौटाने व हर्जाने देने का आदेश दिया है।
ऑनलाइन की शॉपिंग, बाक्स खोलने पर नहीं मिला सफेद रंग का मोबाइल
मामले के अनुसार सेक्टर 14 निवासी प्रियंका ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में याचिका दायर की थी कि उसने मई 2019 में ऑनलाइन एक कंपनी से 59 हजार 859 रुपये का मोबाइल फोन ऑर्डर किया। आर्डर के समय ही पूरी पेमेंट भी कर दी। जब उसे मोबाइल भेजा गया तो वह दूसरे रंग का था। जबकि उसने सफेद रंग का मोबाइल ऑर्डर किया था, जिसकी एक साल की गारंटी बताई गई थी। उसने संबंधित कंपनी व ऑनलाइन शांपिंग करवाने वाली कंपनी से संपर्क किया और मोबाइल न बदलने पर पेमेंट वापस करने व 25 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न के चलते हर्जाने के तौर पर देने की मांग की। जब कोई जवाब नहीं आया तो उसने जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया, जो कि अब जिला उपभोक्ता आयोग बन गया है। आयोग ने फैसला सुनाया गया है कि संबंधित कंपनी उपभोक्ता को मोबाइल की कीमत 9 प्रतिशत ब्याज के साथ एक माह में वापस करे, साथ ही 5 हजार रुपये याचिकाकर्ता को हर्जाने के तौर पर भी दे।
हादसे में टूटे मोबाइल की कीमत देनी होगी इंश्योरेंस कंपनी को
प्रीत विहार निवासी अंकित ने आयोग को बताया था कि उसने 2016 में 10 हजार 900 रुपये का मोबाइल खरीदा, जो 2017 में एक हादसे में सड़क पर गिरने से क्षतिग्रस्त हो गया। उसने इंश्योरेंस होने के चलते संबंधित कंपनी से संपर्क किया कि उसका मोबाइल बदला जाए, लेकिन कंपनी ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। इस पर आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिए कि उपभोक्ता केे 11 हजार रुपये की राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाई जाए। साथ ही 3 हजार रुपये हर्जाने के तौर पर दिए जाए।
उपभोक्ताओं को किया जागरूक, कहीं भी दायर करें याचिका
वहीं, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण रोहतक के पैनल के वरिष्ठ अधिवक्ता राजबीर कश्यप ने सोमवार को लिटिगेंट हाल में उपभोक्ताओं व वकीलों को संशोधित उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के बारे में विस्तार से बताया। कश्यप ने कहा कि अधिनियम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह अधिनियम लागू किया गया है। अब उपभोक्ता किसी भी उपभोक्ता न्यायालय में मुकदमा दायर कर सकेगा, पहले के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था।