कृषि विधेयक के विरोध में कांग्रेस के जिला मुख्यालय पर स्थानीय नेताओं ने प्रदर्शन किया और उपायुक्त ज्ञापन सौंपा। विरोध प्रदर्शन में सबसे अहम रहा कि शहर में कांग्रेस के तीनों बतरा लंबे समय बाद एक साथ एच मंच पर दिखाई दिए। वहीं महम के पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी व किसान नेता बल्लू नांदल के बीच लघु सचिवालय में गलत फहमी के चलते कहासुनी हो गई। हालांकि बाद में सुलह भी हो गई।
सोमवार को कृषि विधेयक के विरोध में कांग्रेस के जिला मुख्यालय पर सुबह से पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं का जमघट लगना शुरू हो गया। इसमें विधायक भारत भूषण बतरा, पूर्व राज्यसभा सदस्य शादीलाल बतरा, पूर्व गृह राज्यमंत्री सुभाष बतरा की तिगड़ी एक साथ एक मंच पर नजर आई। इसके अलावा कलानौर विधायक शकुंतला खटक, पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी, पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा, संत कुमार, चक्रवती शर्मा आदि भी इसमें प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी नेताओं ने कार्यकर्ताओं व किसानों के साथ कांग्रेस भवन में पहले बैठक की और बाद में लघु सचिवालय तक पैदल मार्च निकाला और सरकार के विरोध में नारेबाजी की। विधायक भारत भूषण बतरा ने कहा कि भाजपा का समझ में नहीं आ रहा है कि वह व्यापारी और किसान का रिश्ता क्यों तोड़ना चाह रही है। यह उनका परंपरागत रिश्ता है। सरकार अपने ही विधेयक पास कर अपना पक्ष नहीं रख पा रही है। यदि विधेयक किसान के हित में होता तो किसान खिलाफ नहीं होते। एमसपी देने की बात पीएम करते हैं, यदि वह देना चाहते हैं तो इसका नियम क्यों नहीं बनाते। कांट्रेक्ट फार्मिंग की बात की जाती है तो क्या अब किसान चक्कर काटता रहेगा। इस कानून की प्रदेश को जरूरत नहीं थी। वहीं महम के पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी ने कहा कि देश भर में विधेयक की आलोचना हो रही है। हर फैसला प्रजातांत्रिक तरीके से होता है। एमएलए की विस में एमपी की संसद में सलाह के साथ कोई बात रखी जाती है, इसमें वोटिंग और बहस होती है। लेकिन भाजपा ने जल्दबाजी करते हुए एक ध्वनि मत से इसे पास कर दिया, यह किसानों के खिलाफ कानून है। वहीं पूर्व गृह राज्यमंत्री सुभाष बतरा ने कहा कि भाजपा किसानों के लिए काला कानून ला रही है। किसानों पर लाठीचार्ज करवाने वाली सरकार और उनके गृह राज्य मंत्री को इस मामले की जांच करवानी चाहिए। यदि किसानों पर अत्याचार हुआ है तो उन्हें पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए। इसके अलावा पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा, चक्रवती शर्मा, पूर्व राज्यसभा सांसद शादीलाल बतरा ने किसानों के खिलाफ पास हुए विधेयक के खिलाफ आवाज उठाई।
किसान नेता को पीछे धकेला और हुई बहस
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष अंबावत बल्लू नांदल को विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने धक्का देकर पीछे कर दिया। इस पर लघु सचिवालय में हंगामा हो गया। मौके पर पुलिस प्रशासन को किसान नेता को भीड़ से अलग करना पड़ा, हालांकि मौके पर ही मामला शांत हो गया। इस संबंध में कांग्रेसी नेताओं से पूछा तो उन्होंने बताया कि किसी को धक्का नहीं मारा गया, भीड़ में पहचान न होने के चलते कुछ समस्या हुई थी, जो बाद में सुलझ गई। इस मामले में बल्लू नांदल ने भी बताया कि कहीं कोई विवाद नहीं है, पहचाने न जाने के कारण कुछ बात हुई थी। अब कोई विवाद नहीं है। गौरतलब है कि बल्लू प्रधान पहले इनेलो में थे, उसके बाद कुछ दिन जेजेपी और कुछ दिन भाजपा में रहे। बाद में वह कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा और आशा हुड्डा की मौजूदगी में करीब एक साल पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे।
सोशल डिस्टेंसिंग के चलते गेट पर भीड़ को रोका
कोरोना संक्रमण काल में सोशल डिस्टेंसिंग के चलते प्रशासन ने अधिक प्रदर्शनकारियों को लघु सचिवालय के भवन में नहीं आने दिया। कांग्रेसी नेताओं के साथ कुछ गिने-चुने लोग गेट के अंदर जबरन प्रवेश कर पाए। वहीं उपायुक्त ने स्वयं नीचे आकर कांग्रेसी नेताओं से ज्ञापन लिया।